भारत-भूटान

पशुधन, अनुसंधान और खेती में सहयोग बढ़ाएंगे भारत-भूटान

भारत और भूटान ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए थिम्फू में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत दोनों देश कृषि अनुसंधान, तकनीक, पशुधन स्वास्थ्य, खाद्य प्रसंस्करण और किसानों के कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इस समझौते को लागू करने के लिए संयुक्त तकनीकी कार्य समूह (JTWG) का गठन किया गया है, जिसकी पहली बैठक थिम्फू में हुई और अगली बैठक भारत में होगी।

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FTA - News Potli

ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय किसानों को क्या लाभ, कौन से प्रोडक्ट इस समझौते से हैं बाहर ?

इस समझौते में घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए भारत के कुछ सबसे संवेदनशील कृषि क्षेत्र जैसे डेयरी उत्पाद, सेब, जई और खाद्य तेल शामिल नहीं होंगे। इन क्षेत्रों पर कोई टैरिफ रियायत नहीं है, जो खाद्य सुरक्षा और घरेलू मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देने की भारत की सोची-समझी व्यापार रणनीति को दर्शाता है। 

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उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्से में 10 मई को तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में अगले कुछ दिन कैसा रहेगा मौसम का मिजाज़?

भारत में अगले कुछ दिन कहीं बारिश होने की संभावना है, तो कहीं आंधी-तूफान के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्से में 10 मई को तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने अपने ताजा अपडेट में कहा है कि, 10 और 11 मई…

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भारत

क्या है सिंधु जल समझौता? पहलगाम हमले के बाद भारत ने रोका पाकिस्तान का पानी, जानिए और क्या फैसले लिये गये?

22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. भारत सरकार ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल समझौते पर रोक लगा दी है. बुधवार, 23 अप्रैल की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में ये फ़ैसला लिया गया है. बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे. जानिए क्या है ये सिंधु जल समझौता? और इसका असर पाकिस्तान पर क्या होगा?

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भारत एक कृषि प्रधान देश हैं और यहां की आधी से ज्यादा आबादी कृषि पर ही निर्भर है। पिछले कुछ सालों में एक तरफ जहां बड़ी तादाद में किसानों का खेती-किसानी से मोह भंग हुआ है

कृषि में कमाल करने वाले भारत के 10 राज्य

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं और यहां की आधी से ज्यादा आबादी कृषि पर ही निर्भर है। पिछले कुछ सालों में एक तरफ जहां बड़ी तादाद में किसानों का खेती-किसानी से मोह भंग हुआ है, तो दूसरी तरफ वो तादाद भी कम नहीं, जब पढ़े-लिखे युवाओं का रुझान इस तरफ बढ़ा है। कई नौजवान…

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ADB की इस रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकासशील देशों पर जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ने की बात कही गई है।

भारत की तरक्की की राह में सबसे बड़ा ‘दुश्मन’!

जलवायु परिवर्तन भारत की तरक्की की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा है। पिछले कुछ सालों में बेमौसम बारिश, कहीं बाढ़, तो कहीं सूखा ना सिर्फ खेती-किसानी पर असर डाल रहा है, बल्कि पूरे देश की कामयाबी की राह में रुकावट बन रहा है। ये हिंदुस्तान के लिए चिंता की बात है, हाल ही…

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कॉफी बोर्ड और जैन इरिगेशन के बीच MOU, टिशू कल्चर पौधों से बढ़ेगा कॉफी उत्पादन

देश में कॉफी का उत्पादन बढ़े इसके लिए कॉफी बोर्ड ने एक समझौता किया है. समझौते में शामिल दूसरी पार्टी है कंपनी JISL (जैन इरिगेशन सिस्टम लिमिटेड). समझौते के तहत जेआईएसएल कॉफी के किसानों को उन्नत, उच्च गुणवत्ता वाले और रोग प्रतिरोधी कॉफी पौधे मुहैया कराएगा.

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स्थाई कृषि (Sustainable Agriculture) तक पहुँचने के लिए क्यों आसान नहीं है भारत की राह?

अंतर्राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्रियों की 32वीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जीरो एमिशन के लक्ष्य को हम पारंपरिक खेती के बजाय सस्टेनेबल फ़ार्मिंग (स्थाई कृषि) के जरिए पाया जा सकता है. लेकिन सस्टेनेबल फ़ार्मिंग (स्थाई कृषि) की ये राह भारत में इतनी आसान है क्या?

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जलवायु परिवर्तन कैसे दरका रहा है किसानों की उम्मीद, कृषि मंत्री के ऐलान से क्या बदलेगा?

“जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की दिशा में बढ़ के सोचने की जरूरत इसलिए क्योंकि जो किसान सारी दुनिया का पेट भर रहे हैं, उनके इस पेशे पर क्लाइमेट चेंज की तेज़ आंच डरावनी है. केंद्र सरकार की जलवायु के अनुकूल फसलों की 1500 नई किस्में तैयार करने की ये पहल सकारात्मक तो है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के खतरों से निपटने के लिए ऐसी पहलों की गति तेज करनी होगी.”

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फसलों की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी, महंगाई से मिलेगी निजात?

मॉनसून की बारिश में भले देरी हुई हो लेकिन फसलों की अब तक हुई बुवाई के आँकड़े राहत की ओर इशारा कर रहे हैं और रिकॉर्ड स्तर पर बुवाई के ये आँकड़े आने वाले दिनों में आम आदमी को महंगाई से कुछ निजात मिलने की उम्मीद भी देते हैं. पढिए, कैसे?

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