कम संसाधनों से शुरुआत कर खेती में बनाई बड़ी पहचान, बाराबंकी के युवा किसान मयंक वर्मा की कहानी

बाराबंकी के युवा किसान मयंक वर्मा की सफलता

बाराबंकी के युवा किसान मयंक वर्मा ने कम संसाधनों से शुरुआत करते हुए आधुनिक खेती अपनाई और सफलता पाई। 2016 में मचान विधि से लौकी की खेती कर सिर्फ 1 एकड़ में 5 लाख रुपये कमाए। अब वे 25 एकड़ में उन्नत और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर रहे हैं। उनकी सब्जियां IAS अधिकारियों तक पहुंचती हैं और वे आसपास के किसानों व युवाओं को खेती में प्रेरित कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के युवा किसान मयंक वर्मा आज खेती की दुनिया में एक प्रेरणा बन चुके हैं। कम संसाधनों से शुरुआत करने वाले मयंक ने तकनीक, आधुनिक खेती और वैज्ञानिक सोच की मदद से खेती को न सिर्फ टिकाऊ बल्कि मुनाफेदार मॉडल में बदल दिया है।

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मयंक वर्मा ने 2016 में पहली बार अपने खेत में मचान विधि से लौकी की खेती की। गांव में पहले किसी किसान ने यह तकनीक नहीं अपनाई थी। इस प्रयोग का नतीजा शानदार रहा। सिर्फ 1 एकड़ से उन्हें करीब 5 लाख रुपये की कमाई हुई। यही वह समय था, जिसने मयंक को नई तकनीकों के साथ खेती आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी। वर्तमान में वह 25 एकड़ में उन्नत खेती कर रहे हैं।

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आज मयंक के खेत में उगने वाली सब्जियां सिर्फ स्थानीय बाजार ही नहीं, बल्कि IAS अधिकारियों के घरों तक पहुंच रही हैं। मयंक की कृषि पद्धति में मिट्टी की गुणवत्ता, जल प्रबंधन, पोषण संतुलन और लागत कम रखने पर खास ध्यान दिया जाता है।

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कम लागत में खेती, ज्यादा और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और टिकाऊ और वैज्ञानिक खेती मॉडल उनका लक्ष्य है ।

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मयंक वर्मा अब केवल खेती ही नहीं कर रहे, बल्कि आसपास के किसानों और गांव के युवाओं को कृषि को एक बेहतर करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

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उनकी यात्रा यह साबित करती है कि खेती में सफलता जमीन से ज्यादा सोच, मेहनत और तकनीक पर निर्भर करती है।

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