कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल में सही समय और सही मात्रा में NPK स्प्रे करने से पैदावार और दाने की गुणवत्ता दोनों बढ़ती है। फुटाव, बूट और दूधिया अवस्था—इन तीन अहम चरणों पर अलग-अलग NPK का छिड़काव करने से कल्ले बढ़ते हैं, बालियां मजबूत बनती हैं और दाने मोटे व वजनदार होते हैं। सही समय, उचित पानी और सावधानियों के साथ किया गया स्प्रे बेहतर उत्पादन की कुंजी है।
गेहूं की खेती में टाइमिंग और मात्रा दोनों की बड़ी भूमिका होती है। बुवाई से लेकर सिंचाई, खाद, दवा और कटाई तक हर काम सही समय और सही मात्रा में किया जाए, तभी फसल की गुणवत्ता और पैदावार बेहतर होती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए अहम जानकारी साझा की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गेहूं की फसल में सही अवस्था पर संतुलित मात्रा में NPK का स्प्रे किया जाए, तो न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि दाने का वजन, चमक और गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इसी वजह से गेहूं की फसल में तीन महत्वपूर्ण चरणों पर NPK स्प्रे को जरूरी बताया जा रहा है।
गेहूं में NPK स्प्रे के तीन अहम चरण
1. फुटाव अवस्था (30–45 दिन) इस अवस्था में NPK 19:19:19 का स्प्रे करने की सलाह दी जाती है। इससे फसल में कल्ले ज्यादा निकलते हैं और जड़ें मजबूत होती हैं, जो आगे की पैदावार की नींव बनती हैं।
2. बूट अवस्था (70–85 दिन) इस समय NPK 0:52:34 का छिड़काव लाभकारी होता है। इससे बालियों के बनने में मदद मिलती है और दानों की संख्या बढ़ती है।
3. दूधिया अवस्था (दाना भरते समय) दाना भरने के समय NPK 0:0:50 का स्प्रे करने से दाने मोटे, चमकदार और वजनदार बनते हैं, जिससे कुल उपज में इज़ाफा होता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
स्प्रे करते समय रखें ये सावधानियां प्रति एकड़ 150–200 लीटर पानी का उपयोग करें। स्प्रे सुबह ओस सूखने के बाद या शाम को करें। खरपतवार नाशी दवाओं के साथ NPK न मिलाएं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान गेहूं की फसल में इन तीनों चरणों पर सही NPK स्प्रे करते हैं, तो उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता में भी स्पष्ट सुधार देखा जा सकता है।
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