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मिर्च की कमी ने बढ़ाए दाम

मिर्च की कमी ने बढ़ाए दाम, किसानों को मिल रहा बेहतर भाव

इस साल मिर्च की पैदावार कम रहने से बाजार में कमी बनी हुई है, जिससे दाम काफी बढ़ गए हैं। कीट-रोग, ज्यादा बारिश और खेती का रकबा घटने से किसानों को नुकसान हुआ, लेकिन जिनकी फसल बची है उन्हें अच्छे भाव मिल रहे हैं। निर्यात मांग बढ़ने से भी कीमतें ऊँची हैं और आने वाले समय में दाम बहुत ज्यादा गिरने की उम्मीद नहीं है।

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भारत–EU फ्री ट्रेड डील

India-EU FTA: कारोबार के नए रास्ते खुले, कृषि और डेयरी सेक्टर को भारत ने रखा सुरक्षित

भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) तय हुआ है। इस समझौते से भारत के 90% से ज्यादा उत्पादों को यूरोप में बिना शुल्क पहुंच मिलेगी, जिससे कपड़ा, समुद्री उत्पाद, चमड़ा और केमिकल जैसे सेक्टरों को बड़ा फायदा होगा। भारत भी यूरोपीय उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से रियायत देगा, जबकि कृषि, डेयरी और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा दी गई है। इस डील से दोनों के बीच व्यापार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद है।

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उत्तर भारत में फिर बदलेगा मौसम

उत्तर भारत में फिर बदलेगा मौसम, पश्चिमी विक्षोभ से बारिश-बर्फबारी के आसार

उत्तर भारत में 27- 28 जनवरी को एक तेज पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके असर से पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी, जबकि मैदानी क्षेत्रों में बारिश, तेज हवा और ठंड बढ़ने की संभावना है। कोहरा और शीतलहर का असर भी जारी रह सकता है, ऐसे में लोगों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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77वें गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस पर आईसीएआर में किसानों से मिले कृषि मंत्री, MSP से लेकर निर्यात तक पर जोर

77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूसा, नई दिल्ली स्थित आईसीएआर में देशभर से आए किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। दालों की 100% MSP पर खरीद, चावल निर्यात की बाधाएं हटाने, फसल बीमा में सुधार, वैज्ञानिक मदद और डिजिटल फार्मर आईडी जैसी पहलों से खेती को लाभकारी पेशा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

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मध्य प्रदेश में 2026 होगा ‘कृषि वर्ष’,

मध्य प्रदेश में 2026 होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों पर सरकार का बड़ा फोकस

मध्य प्रदेश सरकार ने 2026 को “कृषि वर्ष” के रूप में मनाने का फैसला किया है। कृषि बजट बढ़कर 27,000 करोड़ रुपये हो गया है और किसानों की आय बढ़ाने, तकनीक, प्राकृतिक खेती और ई-मंडी जैसी योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। राज्य को दूध उत्पादन का केंद्र बनाने, पशुपालन को लाभकारी करने और गौशालाओं के लिए मदद बढ़ाने की घोषणा की गई है।

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श्रीरंग देवबा लाड को पद्मश्री

कपास अनुसंधान में अहम योगदान देने वाले श्रीरंग देवबा लाड को पद्मश्री

कपास खेती में नवाचार कर किसानों की पैदावार और आमदनी बढ़ाने वाले महाराष्ट्र के कृषि विशेषज्ञ श्रीरंग देवबा लाड को साल 2026 के पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। ‘कृषि ऋषि’ के नाम से मशहूर लाड का कहना है कि यह सम्मान उनके लिए निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि किसानों तक तकनीक और ज्ञान पहुंचाने की नई प्रेरणा है।

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मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

बीज संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन, मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के किसान रघुपत सिंह को पारंपरिक सब्जियों के विलुप्त होते बीजों के संरक्षण और उन्हें फिर से किसानों तक पहुंचाने के असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की है। रघुपत सिंह ने बीज संरक्षण को अपने जीवन का मिशन बनाया और 55 से अधिक विलुप्त सब्जियों के बीज बचाकर तीन लाख से ज्यादा किसानों को उनसे जोड़ा।

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डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्म सम्मान

गाजीपुर से पूसा तक: बासमती को नई पहचान दिलाने वाले डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्म सम्मान

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा में पूसा के पूर्व निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह समेत 5 कृषि वैज्ञानिक और 4 किसानों को सम्मानित करने का ऐलान हुआ है। डॉ. सिंह ने बासमती धान की रोगरोधी और हर्बिसाइड टॉलरेंट किस्में विकसित कर भारतीय बासमती चावल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान दिलाई।

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पद्म पुरस्कार 2026

पद्म पुरस्कार 2026: किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कार 2026 की सूची जारी की गई, जिसमें देशभर के 45 गुमनाम नायकों को सम्मानित किया गया है। इस साल कुल 131 पद्म पुरस्कार दिए जाएंगे। कृषि क्षेत्र से जुड़े 5 कृषि वैज्ञानिकों और 4 किसानों को भी पद्म सम्मान के लिए चुना गया है। इनमें उत्तर प्रदेश, असम, तेलंगाना और महाराष्ट्र के किसान शामिल हैं। यह सूची ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों के योगदान को पहचान देने पर ज़ोर देती है।

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अरहर की खेती में छोटा बदलाव

अरहर की खेती में छोटा बदलाव, 20% तक बढ़ेगी पैदावार

इक्रिसैट के अनुसार अरहर (तूर) की खेती में अगर सीधे बुवाई की बजाय नर्सरी में पौधे तैयार कर रोपाई की जाए, तो पैदावार करीब 20% तक बढ़ सकती है। इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.5 टन से बढ़कर लगभग 3 टन हो जाता है। यह तरीका पौधों को मजबूत बनाता है, फसल की अवधि 12–18 दिन कम करता है और अनियमित बारिश व सूखे के खतरे को घटाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है।

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