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हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों को बड़ा झटका, NPK खाद की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी

हिमाचल में बहु-आयामी मात्रा में सेब की खेती की जाती है। ऐसे में सेब के नए सीजन की शुरुआत में खाद के रेट बढ़ने से किसानों को बड़ा झटका लगा है। हिमफेड ने NPK (12-32-16) खाद की कीमतों में 250 रुपये की बढ़ोतरी की है। अब 50 किलो की बोरी की कीमत 1470 रुपये से…

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agriculture

रबी फसलों के अंतर्गत क्षेत्रफल कवरेज पिछले साल की तुलना में 9.62 लाख हेक्टेयर अधिक

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश में कृषि क्षेत्र की प्रगति के संबंध में समीक्षा बैठक की। इस दौरान रबी सीजन की बुआई के संबंध में जानकारी दी गई कि रबी फसलों के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल कवरेज पिछले वर्ष की तुलना में 9.62 लाख हेक्टेयर अधिक है और कुल बुआई क्षेत्र 661.03 लाख हेक्टेयर है, जबकि गत वर्ष यह 651.42 लाख हेक्टेयर था।

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पीएम-आशा

किसानों से तुअर की 100% खरीद की जाएगी, सरकार ने पीएम-आशा योजना को 2025-26 तक जारी रखने की दी मंजूरी

भारत सरकार ने एकीकृत प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना को 15वें वित्त आयोग चक्र के दौरान 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी। एकीकृत पीएम-आशा योजना किसानों से आसानी से दालों की खरीद की जाये इसके लिए संचालित की जाती है, जो न केवल किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य देने में मदद करेगी बल्कि उपभोक्ताओं के लिए सस्ती कीमतों पर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करके आवश्यक वस्तुओं की कीमत में अस्थिरता को भी नियंत्रित करेगी।

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अरंडी के बीज

भारत में अरंडी के बीज उत्पादन में 12 प्रतिशत की गिरावट, कुल क्षेत्रफल 8.67 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान

भारत में अरंडी के बीज की खेती 2024-25 के लिए 12% कम हो गई है, जिसका कुल क्षेत्रफल 8.67 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है। अनुकूल मौसम के कारण उपज में 5% की वृद्धि के बावजूद, कुल उत्पादन 8% घटकर 18.22 लाख टन होने का अनुमान है। प्रमुख उत्पादक राज्य, गुजरात में भी रकबा और उत्पादन दोनों में कमी देखी गई है।

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तुअर दाल

अरहर दाल की MSP पर खरीद में तेजी, बफर स्टॉक में कमी को पूरा करेगी सरकार

देश में दालों के स्टॉक में भारी गिरावट आई है। सरकार ने अरहर दाल समेत अन्य दालों की खरीद बढ़ाने का फैसला लिया है। इस समय अरहर दाल का मौजूदा स्टॉक 35 हजार मैट्रिक टन है, जबकि यह 10 लाख मैट्रिक टन होना चाहिए था। इसके अलावा मूंग, मसूर और चना दाल के स्टॉक में…

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ONION FARMING

छोटी जोत वाले किसानों के लिए मिसाल हैं यूपी के किसान राम प्रवेश मौर्य…जानिए उनकी खेती का तरीक़ा

साल 2019 के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के मुताबिक, भारत में दो हेक्टेयर से कम ज़मीन वाले किसानों का प्रतिशत लगभग 85% था. यानी, देश के ज़्यादातर किसानों के पास एक हेक्टेयर से भी कम ज़मीन है. भारत में ज़्यादातर किसान छोटे और सीमांत किसान हैं. छोटे किसान वे होते हैं जो अपने खेतों में फसल उगाने के लिए अपने श्रम और संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं. उन्हीं किसानों में से एक हैं उत्तर प्रदेश के बहराइच के किसान राम प्रवेश मौर्य, जिन्होंने केवल 1 हेक्टेयर भूमि में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.

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केले और प्याज की सहफसली खेती कैसे करें?

अगर किसी किसान के पास कम ज़मीन है, तो वह केले और प्याज की सहफसली खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते है। इसके अलावा, प्याज के स्थान पर लहसुन भी उगाया जा सकता है, जो 50-60 दिन में हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाता है। जैन इरिगेशन के एग्रोकोमिस्ट राहुल भ्रमबे ने इस विषय पर…

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आईपीएम

कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशक का नहीं IPM का इस्तेमाल करें, कम लागत में अच्छी पैदावार होगी

IPM यानी इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट या एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन वो तरीका है, जिसमें फसल को खर-पतवार, कीड़े और रोगों से बचाने के लिए ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं जिनकी लागत बहुत कम आती है।

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