एक एकड़ में 10–12 फसलें, कम लागत में ज़्यादा कमाई का मॉडल

कमाई का मॉडल

सीतापुर के किसान इंद्रजीत मौर्य एक एकड़ जमीन में साल भर 10–12 सब्ज़ियों की खेती कर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। वे देसी जुगाड़, मल्टीलेयर फार्मिंग, ड्रिप सिंचाई और गोमूत्र से बने जैविक कीटनाशक अपनाते हैं। तड़के सब्ज़ियों की तुड़ाई कर समय पर मंडी पहुंचाने से उन्हें बेहतर दाम मिलता है।

एक एकड़ जमीन में साल भर 10–12 फसलें उगाना, खर्च कम रखने के लिए ज्यादातर देसी और खुद तैयार किए गए साधनों का इस्तेमाल करना, गोमूत्र से बने जैविक कीटनाशक अपनाना और सब्ज़ियों की अगेती खेती करना—ये सब चीज़ें इंद्रजीत को आम किसानों से अलग पहचान दिलाती हैं।

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उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के मल्लपुर गांव के रहने वाले इंद्रजीत मौर्य खेती में लागत घटाने के लिए हैंडमेड पॉलीहाउस, मल्चिंग और जुगाड़ से तैयार मचान का इस्तेमाल कर मल्टीलेयर फार्मिंग करते हैं। इससे कम जमीन में ज्यादा उत्पादन संभव हो पाता है।

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वे सब्ज़ियों की तुड़ाई भी बहुत सुबह, तड़के करीब 3 बजे करते हैं, ताकि उनकी फसल सबसे ताज़ा हालत में बाजार पहुंचे और उन्हें बेहतर दाम मिल सके।

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इंद्रजीत ने धान, गेहूं और गन्ना जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों से दूरी बनाई है। इसकी जगह वे पूरे साल तरह-तरह की सब्ज़ियों की खेती करते हैं और पानी की बचत के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई है। इसके अलावा वे रासायनिक दवाओं पर खर्च करने के बजाय खुद गोमूत्र से कीटनाशक बनाकर फसलों में इस्तेमाल करते हैं, जिससे लागत भी घटती है और फसल सुरक्षित रहती है।

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बाजार में उन्हें इसलिए भी अच्छी कीमत मिलती है क्योंकि वे एक दिन पहले तोड़ने की बजाय सब्ज़ियों की तुड़ाई बिल्कुल ताज़ा हालत में करते हैं। सुबह 3 बजे तुड़ाई कर 6–7 बजे तक सब्ज़ियां मंडी पहुंच जाती हैं, जिससे उनकी उपज दूसरों की तुलना में ज्यादा ताज़ा रहती है और खरीदार बेहतर दाम देने को तैयार रहते हैं।

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