इफको खरीदेगा है 2500 किसान ड्रोन: 5-7 मिनट में एक एकड़ में होगा छिड़काव

WhatsApp Image 2023 07 05 at 5.28.22 PM - News Potli

नई दिल्ली/ लखनऊः आने वाले दिनों में किसानों के लिए खेतों में उर्वरकों का छिड़काव और आसान हो जाएगा। खेती-किसानी में नैनो फर्टीलाइजर लाने वाली सहकारी संस्था इफको कृषि में तकनीकी जरूरतों पर खासा ध्यान दे रहा ही। इस दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए किसानों की अग्रणी कॉपरेविटव संस्था इफको ने 2500 ड्रोन की खरीद शुरु की है। इन ड्रोन के जरिए इफको तरल उर्वरकों का छिड़काव किया जाएगा।
ड्रोन खरीद का मक़सद नैनो यूरिया के छिड़काव को बढ़ावा देने के साथ ही गांव के लोगों को ड्रोन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने के उसके राष्ट्रव्यापी अभियान को बढ़ावा देना है। इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. यू.एस अवस्थी ने कहा कि इफको ने इफको किसान ड्रोन के माध्यम से कृषि ड्रोन में प्रवेश किया है। पानी में घुलनशील उर्वरक/कीटनाशक/खरपतवारनाशी के छिड़काव के लिए 2500 ड़्रोन की खरीद भारत में सबसे बड़ा स्मार्ट कृषि समाधान है। स्प्रे समाधान के लिए इफको 5000 ग्रामीण उद्मियों को प्रशिक्षित भी करेगा।


इफको ने कहा कि उसे विश्वास है कि सहकार से समृद्धि के सपने को पूरा करने में उसका ये कदम मील का पत्थर साबित होगा। ड्रोन खरीद के साथ संस्था ने इसका भी ख्याल रखा है कि उसे कैसे खेतों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए उसने 2,500 इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर को भी खरीदने का फैसला किया है।


सरकार खेती-किसानी में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। एक तरफ जहां सरकार कृषि के इस्तेमाल लिए ड्रोन खरीद पर 50 फीसदी जो अधिकतम 5 लाख रुपये तक हो सकती है कि सब्सिडी भी दे रही है, तो सरकार के इस कदम को सहकारी संस्था इफको अपने लगतार आगे ले जाने का काम कर रही है, और ऐसा हो भी क्यों ना। ड्रोन के इस्तेमाल से एग्रीकल्चर में ड्रोन का इस्तेमाल पानी, वक्त और मज़दूरी तीनों बचाता है। जिन उर्वरक और पेस्टीसाइड को एक एकड़ खेत में छिड़काव के लिए किसान करीब एक घंटे लगाता है, ड्रोन से वो स्प्रे महज 5-7 मिनट में ही हो जाता है। इसकी लागत भी महज 200-250 रुपये प्रति एकड़ है। ड्रोन से स्प्रे ना सिर्फ कॉस्ट इफेक्टिव है बल्कि इसके दूसरे बहुत से फायदे हैं। कीटनाशक का ड्रोन से छिड़काव करने वाले किसान बताते है कि जब कीटनाशक पानी पत्तों पर गिरता है तो पत्ते साफ होते हैं। उसका फोटोसेंथेसिस बेहतर होता है। फोटो सेंथेसिस बेहतर होगा तो सूरज का एबज़ॉर्बश्न बेहतर होगा। पौधा सूर्य की रोशनी बेहतर लेगा तो प्रोडक्शन बेहतर होगा। उसका असर ये कि 12-15 फीसदी तक उत्पादन बढ़ सकता है। सीधे लफ्ज़ों में कहें तो ज्यादा मुनाफा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *