ड्रैगन फ्रूट की हाई-डेंसिटी खेती से बढ़ी कमाई, सस्ती तरल खाद से 80% तक कम हुआ खर्च

सस्ती तरल खाद

मुंबई के स्मिथ देढिया ने स्पेन से MBA करने के बाद खेती को चुना और कच्छ में ड्रैगन फ्रूट की आधुनिक खेती शुरू की। उन्होंने हाई-डेंसिटी तकनीक, ट्रेलिस सिस्टम और एडवांस ड्रिप सिंचाई से पैदावार बढ़ाई। साथ ही 25 टन टैंक में गोबर, SSP और DAP मिलाकर सस्ती तरल खाद तैयार करने की तकनीक विकसित की, जिससे पौधों की ग्रोथ तेज़ होती है और खाद का खर्च 80% तक घट जाता है। उनकी कहानी बताती है कि आधुनिक तकनीक से खेती को मुनाफ़े का बिज़नेस बनाया जा सकता है।

कहते हैं कि अगर सोच बड़ी हो और हिम्मत मजबूत, तो खेती भी करोड़ों का बिज़नेस बन सकती है। यही कर दिखाया है गुजरात के कच्छ के किसान स्मिथ देढिया ने। मूल रूप से मुंबई से ताल्लुक रखने वाले स्मिथ ने स्पेन से MBA in Entrepreneurship किया, लेकिन विदेश में नौकरी करने के बजाय उन्होंने अपने पैतृक गाँव लौटकर खेती को नया रूप देने का फैसला लिया।

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क्यों चुनी ड्रैगन फ्रूट खेती?
स्मिथ ने ड्रैगन फ्रूट की खेती इसलिए चुनी क्योंकि यह कम पानी में भी अच्छी तरह उगता है और इसकी मार्केट में मांग लगातार बढ़ रही है। हाई-डेंसिटी तकनीक से वे एक एकड़ में करीब 4,000 पौधे लगाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने खेतों में ओवरहेड ट्रेलिस सिस्टम बनाया है, जिससे पौधे चक्रवात जैसी आपदाओं से सुरक्षित रहते हैं।

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आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
खेती को आधुनिक बनाने के लिए स्मिथ ने Jain Irrigation के वेंचुरी ड्रिप सिस्टम, वेदर स्टेशन और मिट्टी सेंसर जैसी एडवांस तकनीकें अपनाई हैं। इससे पानी और खाद दोनों की सही मात्रा पौधों तक पहुँचती है और फसल की क्वालिटी और भी बेहतर होती है।

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सस्ती तरल खाद बनाने की तकनीक
स्मिथ की सबसे बड़ी खोज है उनकी वॉटर-सॉल्यूबल खाद। उन्होंने 25 टन क्षमता वाला टैंक बनाया है, जिसमें वे गोबर की खाद में सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और DAP मिलाते हैं। टैंक के ऊपर रेन पाइप सिस्टम लगाया गया है, जिसे दिन में 1-2 घंटे चलाया जाता है। करीब 4-5 महीने बाद यह मिश्रण घुलनशील तरल खाद में बदल जाता है। इस खाद से पौधों को तेजी से पोषण मिलता है और उनकी ग्रोथ कई गुना बढ़ जाती है।

किसानों के लिए बड़ी सीख
सबसे खास बात यह है कि इस तकनीक से खाद का खर्च करीब 80% तक कम हो जाता है, जिससे खेती न सिर्फ किफायती बल्कि ज़्यादा लाभदायक भी बन जाती है। स्मिथ देढिया की कहानी यह साबित करती है कि अगर पढ़ाई और आधुनिक तकनीक को खेती से जोड़ा जाए, तो खेती सिर्फ गुज़ारे का साधन नहीं, बल्कि एक सफल बिज़नेस बन सकती है।

वीडियो देखिए –

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