बिहार की मंडियां बनेंगी सुपर बाजार

किसानों को मिलेगा सही दाम, बिहार की मंडियां बनेंगी सुपर बाजार

बिहार सरकार किसानों को फसल का सही दाम दिलाने के लिए कृषि रोड मैप 2023-28 के तहत मंडियों को आधुनिक बना रही है। राज्य की 53 में से 22 मंडियों को ‘सुपर बाजार’ की तरह विकसित किया जा रहा है, ताकि किसान सीधे बाजार से जुड़ सकें और बिचौलियों की भूमिका घटे। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खेती की व्यवस्था मजबूत होगी।

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सस्ती होने से यूरिया किसानों की पहली पसंद

सस्ती होने से यूरिया किसानों की पहली पसंद, बिक्री बढ़ी लेकिन उत्पादन घटा

अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की बिक्री 3.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि देश में इसका उत्पादन घटा, जिससे आयात में बड़ी बढ़ोतरी हुई। सस्ती कीमत के कारण यूरिया किसानों की पहली पसंद बना हुआ है। डीएपी और अन्य खादों में उत्पादन-आयात का संतुलन बदला है। एफएआई के मुताबिक अब सरकार और उद्योग संतुलित खाद उपयोग पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, ताकि मिट्टी और फसलों के हिसाब से सही मात्रा में खाद का इस्तेमाल हो सके।

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एफपीओ

तमिलनाडु में एफपीओ को मजबूत करने के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति

कृषि मंत्रालय ने तमिलनाडु में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। यह समिति एफपीओ के कामकाज, प्रबंधन, बाजार से जुड़ाव और मूल्यवर्धन से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा करेगी और सुधार के सुझाव देगी। समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें आईसीएआर-एनआरसीबी सहित कई संस्थाएं सहयोग करेंगी।

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भारतीय चाय के भविष्य पर मंथन

भारतीय चाय के भविष्य पर मंथन, 29 जनवरी को नीलगिरी में बड़ी बैठक

तमिलनाडु के कून्नूर में 29 जनवरी को राष्ट्रीय चाय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के चाय निर्माता शामिल होंगे। FITMA की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में चाय उद्योग की चुनौतियों, नीति निर्माण, गुणवत्ता सुधार और चाय की खपत बढ़ाने की योजना “मिशन 1K” पर चर्चा होगी। यह सम्मेलन भारतीय चाय के भविष्य को नई दिशा देने की कोशिश है।

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सरकार का नया टेक्नोलॉजी प्लान

ज्यादा यूरिया पर लगाम, सरकार का नया टेक्नोलॉजी प्लान

सरकार तकनीक की मदद से खाद के सही इस्तेमाल पर काम कर रही है। एग्रीस्टैक के जरिए खेत, फसल और खाद को जोड़कर यह तय किया जा रहा है कि कितनी खाद की जरूरत है। पायलट प्रोजेक्ट से हरियाणा जैसे राज्यों में यूरिया और डीएपी की बड़ी बचत हुई है। ज्यादा यूरिया के नुकसान को देखते हुए सरकार जागरूकता अभियान और ‘धरती माता निगरानी समितियां’ चला रही है।

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उर्वरकों में आत्मनिर्भरता नहीं

उर्वरकों में आत्मनिर्भरता नहीं, संतुलित इस्तेमाल ही असली रास्ता: अर्थशास्त्री गुलाटी

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए रासायनिक उर्वरकों में आत्मनिर्भर होना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि यूरिया, डीएपी और पोटाश के लिए देश आयात पर निर्भर है। प्रो. अशोक गुलाटी ने उर्वरकों के संतुलित और कुशल उपयोग पर ज़ोर देते हुए यूरिया-प्रधान सब्सिडी नीति में सुधार की जरूरत बताई। नीति आयोग के रमेश चंद ने हर जगह 4:2:1 एनपीके अनुपात लागू करने को अवैज्ञानिक बताया।

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एक एकड़ से 14 लाख तक कमा

एक एकड़ से 14 लाख तक कमाई, सही तकनीक और टाइमिंग ने बदली अदरक की खेती की तस्वीर

महाराष्ट्र के संभाजीनगर जिले के किसान तुकाराम ने अदरक की खेती में सही तकनीक, टाइमिंग और योजना अपनाकर एक एकड़ से करीब 14 लाख रुपये तक की कमाई की है। रेज्ड बेड, सही दूरी पर बुवाई, बीज की बेहतर तैयारी और आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से उन्होंने उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ाए।

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मिर्च की कमी ने बढ़ाए दाम

मिर्च की कमी ने बढ़ाए दाम, किसानों को मिल रहा बेहतर भाव

इस साल मिर्च की पैदावार कम रहने से बाजार में कमी बनी हुई है, जिससे दाम काफी बढ़ गए हैं। कीट-रोग, ज्यादा बारिश और खेती का रकबा घटने से किसानों को नुकसान हुआ, लेकिन जिनकी फसल बची है उन्हें अच्छे भाव मिल रहे हैं। निर्यात मांग बढ़ने से भी कीमतें ऊँची हैं और आने वाले समय में दाम बहुत ज्यादा गिरने की उम्मीद नहीं है।

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77वें गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस पर आईसीएआर में किसानों से मिले कृषि मंत्री, MSP से लेकर निर्यात तक पर जोर

77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूसा, नई दिल्ली स्थित आईसीएआर में देशभर से आए किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। दालों की 100% MSP पर खरीद, चावल निर्यात की बाधाएं हटाने, फसल बीमा में सुधार, वैज्ञानिक मदद और डिजिटल फार्मर आईडी जैसी पहलों से खेती को लाभकारी पेशा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

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श्रीरंग देवबा लाड को पद्मश्री

कपास अनुसंधान में अहम योगदान देने वाले श्रीरंग देवबा लाड को पद्मश्री

कपास खेती में नवाचार कर किसानों की पैदावार और आमदनी बढ़ाने वाले महाराष्ट्र के कृषि विशेषज्ञ श्रीरंग देवबा लाड को साल 2026 के पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। ‘कृषि ऋषि’ के नाम से मशहूर लाड का कहना है कि यह सम्मान उनके लिए निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि किसानों तक तकनीक और ज्ञान पहुंचाने की नई प्रेरणा है।

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