गंगा में समा गया पूरा गांव, बिहार के जवइनिया गांव से ग्राउंड रिपोर्ट

बिहार का जवइनिया गांव गंगा की कटान में बह गया है। 100 से ज्यादा घर नदी में समा गए।

बिहार के जवइनिया में गंगा की कटान में 100 से ज्यादा घर बह गए। गांव में अब कुछ ही घर बचे हैं, जो रहने के लायक नहीं हैं। गांव वालों का आरोप है कि, ठोकर बनाने के लिए 9.8 करोड़ रुपये पास हुए थे। अगर ये काम हो जाता, तो आज उन्हें ये दिन नहीं देखना पड़ता।

किसी ने साहूकार तो किसी ने बैंक से कर्ज लेकर घर बनावाया था। किसी को इस बार फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, तो कोई इस फसल को बेचकर अपने आशियाने को बेहतर करने का इरादा बना रहा था, लेकिन महज कुछ दिनों में सभी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। बिहार में भोजपुर का जवइनिया गांव आज बाढ़ के आंसू रो रहा है। कुछ घरों को छोड़ दें ज्यादातर मकान गंगा की कटान में बह गए। न्यूज़ पोटली की ग्राउंड रिपोर्टिंग में जो हालात दिखे वो बद से बदतर हैं।

3 दिन पहले यहां पूरा घर था। हम लोगों को किसी को पता नहीं था कि, हम लोगों का घर इतना जल्दी कट के गिर जाएगा। 7 बजे के बाद में कटान शुरू हुआ, कल यहां तक आ गया था बिल्कुल।कन्हैया ठाकुर, जवइनिया

BIHAR FLOOD JAWANIYA VILLAGE - News Potli
जवइनिया गांव

हर साल क्यों आती है बाढ़?

मॉनसून में बारिश के चलते सोन और गंगा दोनों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। गंगा की बाढ़ पश्चिमी बिहार में बक्सर और आरा से शुरू होती है। सोन नदी की बाढ़ डिहरी, रोहतास और भोजपुर के कई इलाकों को घेरती है। जवइनियां गांव बिहार के भोजपुर जिले में स्थित है, जो गंगा और सोन नदी के संगम के करीब है। यहां पर सोन नदी गंगा में मिलती है, लेकिन बालू (silt) का भारी जमाव गंगा की धारा को प्रभावित करता है। जब दोनों नदियों में एक साथ जलस्तर बढ़ता है, तो संगम क्षेत्र से निकास बाधित हो जाता है, और बाढ़ का पानी गांवों की ओर फैल जाता है।

2-4 घर बचा होगा तो होगा, नहीं तो सब खत्म है। पूरा गांव चला गया है। एक से एक मकान गंगा जी में विलीन हो गया। सारा सामान, पशु सब चला गया। क्या करेंगे? हमारे गांव के सभी लोग अभी स्कूल में शरण लिए हुए हैं। नेता जीतने के बाद देखने तक नहीं आता कि तुम मर रहे या जी रहे होदया यादव, जवइनिया

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ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान न्यूज़ पोटली की टीम को प्रशासन की तरफ से किए जा रहे इंतेजाम नाकाफी दिखे। बड़ी तादाद में volunteer वहां लोगों के लिए खाने पीने का इंतजाम करती नजर आई। लोगों का मानना है कि, अगर सरकार की तरफ से ठोकर बनाने के लिए दिए गए 9.8 करोड़ का सही से इस्तेमाल हो जाता तो आज उन्हें ये मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती।

 परसों से कटान शुरू है। उस दिन 5 घर ढह गए। धीरे-धीरे और घर ढहते गए। हम सभी लोगों की पूरी बिल्डिंग ही गंगा में चली गई। कोई अभी तक मदद को नहीं आया। सरकार ने 9.8 करोड़ रुपये दिए थे, ठोकर बनाने को। इतने में तो गरीबों का ज़मीन से घर बन जाता, लेकिन सब ने भ्रष्टाचार करके उसे लूट लिया- अंजू देवी, जवइनिया

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कब-कब आई बाढ़?

वैसे तो जवाइनिया गांव निचले इलाके में होने की वजह से हर साल बाढ़ का दंश झेलता है, लेकन कई साल ऐसे आए जब पानी के तेज़ बहाव ने विकराल रूप ले लिया। दो साल पहले 2023 में बाढ़ आई हालांकि इस दौरान किसी के जान-माल का नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन गंगा का पानी लंबे वक्त तक ठहरा रहा। 2019 में बाढ़ ज्यादी रही। गंगा और सोन नदी का जल्तर रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचट गया। गांव वालों का कहना है लेकिन 2023 और 2019 से कहीं ज्यादा बाढ़ ने 2016 में विकराल रूल लिया था। उस साल गांव वालों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।

समझिए कि 9 फीट,11 फीट का मकान ढह गया। कोई सरकार की व्यवस्था नहीं है। कभी-कभी खाने को कुछ मिलता है, नहीं तो बच्चे खाने के बिना मरते हैं। गरीब लोग हैं, किसी के पास इतना पैसा नहीं है कि, जाकर अपनी जमीन खरीद ले। रहने की व्यवस्था नहीं है। अगर बारिश हो जाए, तो कहां रहेंगे वो लोग। नेता लोग आते है, कह कर चला जाते हैं कि, हम व्यवस्था करते हैं, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं है। बस नेता ये कहते हैं कि, हम व्यवस्था में लगे हैं। सुरक्षा करते हैं, लेकिन कुछ भी नहीं है। सरकार ने 9 करोड़ नहीं 13 करोड़ दिए। 9 करोड़ एक बार, फिर 4 करोड़ रुपये पास हुआ। एक करोड़ रुपये भी खर्चा नहीं हुआ है। नहीं तो गांव नहीं ढहता।- अनिल राय, जवइनिया

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25 जुलाई को पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव जवनिया गांव पहुंचे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया। इस दौरान, जहां वे खड़े थे, उसके सामने एक घर गंगा में समा गया। पप्पू यादव ने भी इस घटना का वीडियो X पर शेयर कर सरकार पर हमला बोला है। सांसद ने लिखा, “राजधानी पटना से सिर्फ़ 100 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित भोजपुर का जवनिया गांव पूरी तरह डूब गया है, लेकिन सरकार को कोई खबर नहीं”

आज पब्लिक का घर गिर रहा है। कर्जा लेकर घर बनाए थे। पूरा घर गिर गया। सरकार आकर देखती क्यों नहीं कि हमने क्या बनाया? ठेकेकार ने क्या किया है। ठोकर बनाया होता तो आज ये हालात नहीं बनते। अब पब्लिक पानी में जिये या मरे। सरकार ने कोई मदद नहीं की। कहां आकर सरकार कह रही है चलो आपको जगह दे रहे चल कर वहां रहो, एक महीने भी रहो।- उरमिला देवी

गांव के हर शख्स की नाराजगी सरकार और प्रशासन से दिखी। सभी का ये मानना है कि, ठोकर बनाने के लिए पास हुए बजट में भ्रष्टाचार की वजह से ही आज गंगा ने इतना विकराल रूप लिया और गांव बह गया। जवइनिया से सटे चक्की नौरंगा गांव के लोगों को भी अब उनके गांव के कटने का डर सता रहा है। हमारी टीम ने पाया कि, दोनों गांवों के बीच एक पतली सड़क का ही फासला है। एक तरफ का गांव तो लगभग खत्म ही हो चुका है, अगर नदी ने और विकराल रूप लिया तो दूसरे गांव में हालात मुश्किल भरे हो सकते हैं। हमने चक्की नौरंगा गांव के निवासी छोटू कुमार से बात की। उनकी नाराजगी बहुत ज्यादा सरकार से है। वो मानते हैं कि आज सरकारी लापवारी की वजह से ही एक गांव तो कट गया, दूसरा कटने के मुहाने पर खड़ा है। अगर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात इस साइड भी वैसे ही हो जाएंगे।

कोई सरकार यहां मदद को नहीं आई। जैसे यहां बाढ़ आती है, सबसे पहले तो SDRF, NDRF की टीम तैनात होनी चाहिए। यहां पर आपको कोई टीम नहीं दिखेगी। कोई किट नहीं है सुविधा के लिए कि कोई गिर भी जाए तो उसे बचाया जा सके। यहां पर कोई व्यवस्था नहीं है। डीएम और एसडीएम यहां आते हैं और दिखाते हैं कि, हां सर हम यहां आ गए। आते हैं 2 मिनट देखते हैं और भाग जाते हैं। यहां कोई कुछ नहीं कर रहा है किसी के लिए। सिर्फ वोट में आते हैं, हाथ जोड़ते हैं और चले जाते हैं नेता।छोटू कुमार, चक्की नौरंगा गांव

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हमने जब प्रशासन से इस बाबत जानना चाहा कि, हालात इतने बुरे कैसे बन गए तो, एसडीएम संजीत कुमार ने कहा कि, सरकार और प्रशासन की तरफ गांव के हालात को सुधारने की पूरी कोशिश की जा रही है।

पॉलीथीन शीट का वितरण कर रेह हैं। टेंट लगवाए हैं। जो लोग विस्थापित हुए हैं, वहां रहने की सुविधा है। जनरेटर है। शौचालय का निर्माण हम लोगों ने करवाया है। साथ ही मेडिकल की सुविधा और पशुओं के लिए भी व्यवस्था और अभी हम लोगों ने 40 क्विंटल भूसा भी वितरण कराया है। हम लोग SOP के तहत जो सुविधा होनी चाहिए वो हम लोग मुहैय्या करा रहे हैं। हमारे अधिकारी तीन शिफ्ट में यहां पर डेली कैंप करते हैं। सुविधाओं को प्रॉपर तरीके से मुहैय्या कराने पर हम लोग काम कर रहे हैं।- जगदीशपुर, एसडीएम, जगदीशपुर

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इस बीच राहत की बात ये है कि, फिलहाल बिहार में गंगा जल स्तर घटने लगा है। जिससे निचले इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है। कोसी नदी का जलस्तर भी अभी स्थिर है। कोसी में तेजी से हुई बढ़ोतरी के बाद अब जलस्तर कम हो रहा है।

पूरी रिपोर्ट यहां देखिए

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