खेत के खेत बहे, संकट में भविष्य की खेती, गुजरात बाढ़ का विकराल रूप डराने वाला

gujarat flood - News Potli

गुजरात(Gujarat) में इस समय मानसूनी बारिश ने बाढ़ की शक्ल ले ली है, जो आम जन जीवन को प्रभावित तो कर ही रही है। इससे किसानों का भी काफ़ी नुक़सान हो रहा है। कपास और मूंगफली की खेती करने वाले किसानों का सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कच्छ और सौराष्ट्र में सबसे ज्यादा बारिश हो रही है। अब तक राज्य के 7 जिलों से 4 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

गुजरात में इस समय भारी बारिश का दौर जारी है और यह दौर किसानों के लिए बड़ी मुसीबत लेकर आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गुजरात में बीते आठ-नौ दिनों से सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में हो रही भारी बारिश के बाद बुधवार को मध्य गुजरात के कुछ इलाकों में भी जमकर बारिश हुई।इस भयंकर बारिश ने किसानों के फसल को बर्बाद कर दिया है।

सौराष्ट्र क्षेत्र के तटीय इलाके इस मानसून में बहुत ज्‍यादा बारिश से जूझ रहे हैं।देवभूमि द्वारका, पोरबंदर और जूनागढ़ जिलों के कुछ तालुकाओं में तो पिछले चार दिनों से बारिश जारी है। यहां पर अब तक औसत से 150 फीसदी से 200 फीसदी तक बारिश हुई है। इससे किसानों की स्थिति बिगड़ती जा रही है।

टाइम्‍स ऑफ इंडिया के अनुसार खेत तालाबों में तब्दील हो गए हैं। किसानों को अब डर सता रहा है कि वो अगले कुछ सालों तक फसल नहीं ले पाएंगे क्योंकि खेती योग्‍य सारी जमीन बह गई है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, द्वारका तालुका में 200 फीसदी से ज्‍यादा बारिश हुई है। वहीं कल्याणपुर और खंभालिया तालुका में क्रमशः औसत 135 फीसदी और 115 फीसदी वर्षा हुई। इसी तरह से जूनागढ़ जिले के मनावदर तालुका में औसत वर्षा का 48 फीसदी, केशोद में 126 फीसदी, वंथली में 130 फीसदी और मेंदर्दा में 116 फीसदी बारिश हुई। पोरबंदर में औसत 145 प्रतिशत बरसात हो चुकी है।

कल्याणपुर तालुका के एक गांव के किसान मोहन नकुम ने मीडिया से बात कर बताया कि, ‘द्वारका और कल्याणपुर दोनों जगहों पर किसानों को फसल के नुकसान का डर सता रहा है। उन्हें जमीन के बह जाने का भी डर है और साथ ही अब भारी फसल नुकसान की आशंका भी सताने लगी ह।’ किसानों के अनुसार, अगर बारिश रुक जाती है और उन्हें अगले सप्ताह धूप मिलती है, तो इससे फसल का नुकसान कम हो सकता है। लेकिन अभी के मौसम को देखते हुए उन्‍होंने जल्दी धूप की उम्मीद छोड़ दी है।

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