प्याज की यह किस्म किसानों के लिए ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’, रंग से तय होती है क़ीमत

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चीजों के रंग भी कई बार कीमत निर्धारित करते हैं. जैसे किसी धातु का पीला होना उसे सोना बनाता है और कोई अपने अंदर सफेदी लिए कोई धातु चांदी कहलाती है. अब सोने और चांदी की क़ीमतों का अंतर तो आपको पता ही होगा. कीमतों का यही अंतर कई बार फसलों में भी है. प्याज भी उसी श्रेणी में है. आप को ये जानकर आश्चर्य होगा कि लाल प्याज की तुलना में सफेद प्याज की खेती आपको एक फिक्स इनकम दे सकती है. खास बात ये है कि सफेद प्याज की इतनी कम खेती के बावजूद भारत विश्व भर में सफेद प्याज का दूसरा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है और उसमें भी देश भर में सफेद प्याज के प्रोडक्शन का चालीस प्रतिशत केवल महाराष्ट्र में ही होता है.

फिक्स्ड इनकम – सफेद प्याज की खूबी

प्याज की महंगाई ने आम आदमी को गाहे-बगाहे रुलाया ही है. लेकिन किसानों के साथ कई बार उल्टा है. जिस साल प्याज की फसल बढ़िया हुई, मंडी से लौटते किसानों के चेहरे पर मायूसी होती है क्योंकि ज्यादा उत्पादन प्याज बिक्री की कीमत घटा देता है. और कई बार 80 रुपए बिकने वाली प्याज किसान 4 रुपए – 5 रुपए किलो बेचकर लौटते हैं. लेकिन ये बात हम लाल प्याज की कर रहे हैं. सफेद प्याज की खेती में इसका उल्टा है. महाराष्ट्र के कई इलाकों में किसान इसकी खेती करते हैं. अखबार इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कम्पनीज सफेद प्याज की खेती करने वाले किसानों के साथ पहले ही डील कर लेती हैं और एक कीमत का निर्धारण हो जाता है. अब फसल अच्छी हो या खराब, किसान सुरक्षित हो जाता है. कंपनी किसानों को बीज तक मुहैया कराती हैं ताकि उत्पादन अच्छा हो. यानी, सफेद प्याज की खेती, सारे खतरों से दूर किसानों को कमाई की गारंटी देती है. इसकी खेती रबी सीजन में की जाती है.

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मिला हुआ है जीआई टैग

महाराष्ट्र में रायगढ़ जिले के अलीबाग के मशहूर सफेद प्याज का ‘भौगोलिक संकेतक’(जीआई टैग) भी मिला हुआ है. जब भी किसी वस्तु या फसल को किसी स्थान विशेष का जीआई टैग मिल जाता है, तब उस फसल को उस जगह का खास प्रोडक्ट माना जाता है. इससे देश भर में तो उसकी अलग पहचान बनती ही है लेकिन उसके साथ उसकी खेती से जुडे किसानों को भी फसल के अच्‍छे दाम मिलते हैं.

स्वास्थ्य के लिए अच्छा

1. इन्फेक्शन के लिए मारक

डॉक्टर्स के मुताबिक सफेद प्याज किसी भी तरह के इन्फेक्शन के लिए औषधि है. ऐसा इसलिए है कि सफेद प्याज में सूजन रोधी (anti inflammatory) गुण होते हैं. इसके अलावा आँख, नाक और कान के इन्फेक्शन में भी सफेद प्याज मदद करती है.

2. एसिडिटी बैलेंस करने के गुण

कई ऐसी चीजें जिन्हें खाने पर हमारे शरीर की अम्लता यानी एसिडिटी बढ़ जाती है, ऐसे में सफेद प्याज उसे कम करने में मदद करता है.

3. सांस संबंधी बीमारियों में सहायक

आयुर्वेद के अनुसार शहद के साथ अगर सफेद प्याज का रस मिला कर अगर कोई सिरप तैयार की जाए और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के छाती पर लगाया जाए तो कई सांस संबंधी बीमारियाँ दूर हो सकती हैं.

4. बालों की समस्या को करता है दूर

 अगर आप बालों झड़ने या टूटने की समस्या से ग्रस्त हैं तब भी सफेद प्याज का रस आपकी मदद करेगा. इसके रस को सिर पर लगाने से बालों को मजबूती मिलती है.

पीले और लाल रंग की तुलना में ये नरम होती है. इनमें पतली, कागज़ जैसी त्वचा होती है और लाल प्याज की तुलना में ज्यादा तेज.  इसका स्वाद काटे जाने के बाद भी देर तक बरकरार रहता है.

लेकिन…..

किसानों के लिए सफेद प्याज की खेती फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह है, यानी जितना तय हुआ उतना मिलना ही है लेकिन कई बार लाल प्याज किसानों की लॉटरी लगा देता है लेकिन तब जब उत्पादन कम हुआ हो और व्यापारी किसी भी कीमत पर प्याज खरीदने को तैयार हों. सफेद प्याज के साथ ऐसा नहीं है. ना रिस्क और ना लॉटरी के साथ भरोसेमंद रिटर्न के लिए किसान इसकी खेती करते हैं.

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