भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय कृषि उत्पादों जैसे चाय, कॉफी, मसाले, प्रोसेस्ड फूड और समुद्री उत्पादों के निर्यात पर ड्यूटी में छूट मिलेगी। इससे EU के बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों व निर्यातकों को फायदा होगा। डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को छूट से बाहर रखा गया है, जबकि MSME, तटीय समुदायों और आयुष सेवाओं को इस समझौते से खास बढ़ावा मिलेगा।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत भारत को अपने कई कृषि उत्पादों के निर्यात पर ड्यूटी में छूट मिली है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इससे प्रोसेस्ड फूड, चाय, कॉफी, मसाले, टेबल ग्रेप्स (अंगूर), भेड़ और मेमने का मांस जैसे उत्पादों का EU के 27 देशों में निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।
इसके अलावा घेरकिन, खीरा, स्वीट कॉर्न, सूखी प्याज और कुछ अन्य फल-सब्जी उत्पादों को भी यूरोपीय बाजार में विशेष बाजार पहुंच मिलेगी। ड्यूटी में छूट से भारतीय उत्पाद वहां ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
संवेदनशील क्षेत्रों को रखा गया सुरक्षित
सरकार ने साफ किया है कि डेयरी, अनाज, पोल्ट्री, सोया मील और कुछ फल-सब्जियां संवेदनशील क्षेत्र हैं, इसलिए इन पर भारत ने कोई आयात शुल्क छूट नहीं दी है। खासतौर पर डेयरी सेक्टर में भारत ने अब तक किसी भी FTA में छूट नहीं दी, क्योंकि इससे छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका जुड़ी है।
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निर्यातकों को मिलेगा आसान फायदा
बिज़नेस लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के तहत यह भी तय किया गया है कि निर्यात होने वाले सामान का पर्याप्त प्रोसेसिंग या निर्माण भारत में हो, तभी उसे ड्यूटी में छूट मिलेगी। नियम ऐसे बनाए गए हैं कि MSME यानी छोटे-मझोले उद्योगों को भी फायदा हो। निर्यातकों को अब सेल्फ-सर्टिफिकेशन की सुविधा मिलेगी, जिससे समय और खर्च दोनों कम होंगे।
समुद्री उत्पादों और तटीय किसानों को लाभ
EU कुछ समुद्री उत्पादों पर लगने वाला 0 से 26 प्रतिशत तक का शुल्क घटाएगा, जिससे झींगा, फ्रोजन फिश और वैल्यू-एडेड सीफूड का निर्यात बढ़ेगा। इससे आंध्र प्रदेश, गुजरात और केरल के तटीय इलाकों के मछुआरों और किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।
आयुष सेवाओं को भी बढ़ावा
इस समझौते से आयुष (AYUSH) यानी आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। जिन EU देशों में नियम नहीं हैं, वहां भारतीय योग और आयुर्वेद विशेषज्ञ अपनी भारतीय डिग्री के आधार पर सेवाएं दे सकेंगे।
मतलब ये कि यह फ्री ट्रेड डील भारतीय कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में बेहतर दाम, ज्यादा अवसर और स्थायी आमदनी दिलाने में मदद करेगी।
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