देश में रबी फसलों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है और कुल रकबा 652.33 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से 2.8% ज्यादा है। गेहूं, चना, मसूर और सरसों की बुआई पूरी हो चुकी है और अब पैदावार आगे के मौसम पर निर्भर करेगी। दालों, सरसों, मक्का और जौ के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि ज्वार के रकबे में गिरावट आई है।
देश में रबी फसलों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है। 16 जनवरी तक रबी फसलों का कुल रकबा 652.33 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 2.8 प्रतिशत ज्यादा है। एक साल पहले इसी समय रबी फसलें 631.45 लाख हेक्टेयर में बोई गई थीं। सिर्फ पिछले एक हफ्ते में ही करीब 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई बुआई हुई है।
अब गेहूं, चना, मसूर और सरसों की बुआई पूरी हो चुकी है। ऐसे में मार्च में होने वाली कटाई तक मौसम रबी फसलों की पैदावार तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि रबी फसलें ज्यादा तापमान सहन नहीं कर पातीं, इसलिए आगे का मौसम बहुत निर्णायक होगा।
2025–26 रबी सीजन के लिए सरकार का लक्ष्य
सरकार ने रबी सीजन 2025–26 के लिए 171.14 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें गेहूं: 119 मिलियन टन, चावल: 15.86 मिलियन टन, दालें: 16.57 मिलियन टन, मोटे अनाज: 3.17 मिलियन टन, मक्का: 14.5 मिलियन टन, जौ: 2.05 मिलियन टन और तिलहन: 15.07 मिलियन टन (जिसमें सरसों 13.9 मिलियन टन) शामिल हैं।
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गेहूं का रकबा स्थिर
इस बार गेहूं का रकबा 334.17 लाख हेक्टेयर पर स्थिर है। बीते दो हफ्तों में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। पिछले साल गेहूं का रकबा रिकॉर्ड 328.04 लाख हेक्टेयर था, जिससे उत्पादन भी रिकॉर्ड 117.94 मिलियन टन तक पहुंचा था।
दालों और सरसों का रकबा बढ़ा
दालों का कुल रकबा बढ़कर 137 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल से 2.8 प्रतिशत ज्यादा है।चना: 95.88 लाख हेक्टेयर (5.1% बढ़ोतरी) और मसूर: 18.12 लाख हेक्टेयर है। तिलहनों का रकबा भी बढ़कर 96.86 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसमें सरसों की हिस्सेदारी 89.36 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल से 3.2 प्रतिशत ज्यादा है।
धान, मक्का और जौ में बढ़ोतरी
रबी धान का रकबा 11.4 प्रतिशत बढ़कर 25.58 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, मक्का का रकबा 7.4 प्रतिशत बढ़कर 27.55 लाख हेक्टेयर हो गया है।और जौ की बुआई पूरी हो चुकी है और इसका रकबा 21.1 प्रतिशत बढ़कर 7.37 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।
वहीं सर्दियों में बोई जाने वाली ज्वार का रकबा घटकर 22.54 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल से 5.7 प्रतिशत कम है। हालांकि मोटे अनाजों का कुल रकबा बढ़कर 58.72 लाख हेक्टेयर हो गया है।
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