ICAR की समिति ने गेहूं और जौ की 28 नई किस्मों को मंजूरी दी है। इनमें 23 गेहूं और 5 जौ की किस्में शामिल हैं। यह फैसला गेहूं की बुवाई शुरू होने से पहले लिया गया है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बार किस्मों की स्वीकृति प्रक्रिया सख्त रखने के निर्देश दिए थे। नई किस्मों से उच्च उपज और जलवायु सहनशीलता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन 119 मिलियन टन तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की एक अहम समिति ने गेहूं और जौ की 28 नई किस्मों को मंजूरी दे दी है। अब इन किस्मों को रिलीज़ करने पर अंतिम फैसला सीड सब-कमेटी करेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में गेहूं की बुवाई का सीजन शुरू होने वाला है।
46 किस्मों में से 28 को मिली हरी झंडी
ICAR के सहायक महानिदेशक एस.के. प्रधान की अध्यक्षता में अगस्त में हुई बैठक में 46 नई किस्मों पर चर्चा हुई थी। इनमें से 28 किस्मों को स्वीकृति के लिए चुना गया, जिनमें 23 गेहूं की और 5 जौ की किस्में शामिल हैं। ये किस्में सरकारी संस्थानों और निजी कंपनियों दोनों ने विकसित की हैं।
कड़ी निगरानी में हुआ इस बार चयन
इस बार मंजूरी की प्रक्रिया और सख्त रखी गई है। दरअसल, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराज़गी जताई थी कि कई नई किस्में किसानों द्वारा अपनाई ही नहीं जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब किसान इन किस्मों को नहीं अपनाते, तो उन्हें बाजार में लाने का क्या मतलब है।
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नई गेहूं की किस्में
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा भेजी गई चार गेहूं की किस्मों में से दो को मंजूरी मिली PBW 906 और PBW 915।PBW 915 को उसकी बेहतर उपज और रस्ट रोग से सुरक्षा के लिए उत्तर-पूर्व मैदान क्षेत्र में उपयुक्त माना गया है।PBW 906 केंद्रीय क्षेत्र के लिए बेहतर है और यह भी ज्यादा उपज और रस्ट प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है। इसी तरह, IARI (पूसा) की 11 किस्मों में से 7 और IIWBR की 6 में से 2 गेहूं की किस्में मंजूर हुईं, जबकि IIWBR की सभी 3 जौ की किस्मों को हरी झंडी मिली।
गेहूं उत्पादन में नई उम्मीदें
केंद्र सरकार ने मई 2024 में ही 13 नई गेहूं और 3 नई जौ की किस्मों को व्यावसायिक खेती के लिए नोटिफाई किया था।
पूर्व में कुछ किस्में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी जारी की गई थीं, जहाँ आमतौर पर गेहूं की खेती नहीं होती।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को यह अध्ययन करना चाहिए कि ट्रायल में सफल रहने के बावजूद किसानों ने उन किस्मों को क्यों नहीं अपनाया।
उत्पादन लक्ष्य 119 मिलियन टन का
भारत का गेहूं उत्पादन 2024–25 में 117.51 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो अब तक का सबसे अधिक है। सरकार इस बार 119 मिलियन टन का लक्ष्य रख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मंजूरी और उच्च उपज व जलवायु अनुकूल बीजों का उपयोग इस लक्ष्य को पाने में अहम भूमिका निभाएगा।
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