गेहूं के बंपर उत्पान का अनुमान लेकिन बदलते मौसम में पीला रतुआ रोग से सावधान रहें किसान

gehun ki fasal

देश में इस बार 33 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं की खेती हो रही है। कड़ाके की सर्दी के चलते इस मौसम को गेहूं की फसल के अनुकूल बताया जा रहा है। गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान ने 112 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का अनुमान जताया है। संस्थान ने किसानों से रतुआ समेत कई रोगों से सावधान रहने की भी सलाह दी है।
लखनऊ/करनाल। गेहूं की फसल के लिए अनुकूल मौसम देखकर गेहूं और जौ रिसर्च सेंटर, करनाल ने उम्मीद जताई है कि इस बार गेहूं की बंपर पैदावार होगी। संस्थान के मुताबिक इस वर्ष 33 मिलियन हेक्टेयर गेहूँ की बुआई की गयी है, जिससे करीब 112 मिलियन टन गेहूं उत्पादन अनुमानित है। संस्थान के मुताबिक ये मौसम गेहूं की फसल के अनुकूल है लेकिन तेजी से बदलते मौसम में फसल में कई रोग लग सकते हैं, इसलिए किसानों को सतर्क होने की सलाह दी है।
हरियाणा के करनाल में स्थित गेहूं के सबसे बड़े केंद्र गेहूं और जौ अनुंसधान संस्थान (IIWBR) ने किसानों के लिए जारी फसल सलाह (crop advisory) में कहा है कि इस मौसम में गेहूं में रतुआ समेत कई रोग लग सकते हैं इसलिए वो विशेष सावधानी बरतें।
संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक (प्रसार) डॉ अनुज कुमार ने कहा, “आजकल 7 से 17° सेल्सियस का तापमान, सुबह के समय धुंध या फिर हल्की बारिश का जो मौसम है वो गेहूं में पीला रतुआ की आशंका को बढ़ाता है। ऐसे में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की जरुरत है।’
डॉ. अनुज ने आगे कहा, “गेहूं की नई किस्मों में इस रोग के लगने की सम्भावना कम है पर खेत में नमी रह जाने या कम उर्वरकता के चलते किसानों को अपने खेतों की निगरानी करते रहना हैं और संस्थानों के दिशा निर्देशों का पालन करते रहें।”

गेहूं की फसल से संबंधित वीडियो नीचे देखिए

गेहूं की खेती से संबंधित सलाह

पीला रतुआ रोग की पहचान
गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग दरअसल खेतों में पानी भर जाने से या पोषक तत्वों की कमी होने से पत्तियां पीली हो जाती हैं और इस पर धारियां बन जाती हैं। अगर खेत में कुछ भी ऐसा है तो समझिए कि फसल में रेतुआ रोग लग गया है या लगने की आशंका है।
डॉ. अनुज ने आगे कहा, “इसकी पहचान का एक आसान तरीका ये भी है कि जब भी पत्तियों पर हाथ फेरा जाएगा तो उंगलियों पर एक पीले रंग का पाउडर आ जाता और प्रभावित खेत में होने पर ये पाउडर आपके कपड़ों पर भी देखने को मिल सकता है।”
रोग के लिए उपचार क्या करें?
आपको फसल पर प्रोपिकानाजोल 0.1 % की दर से, या फिर टेबुकोनाज़ोल 50% + ट्राइफ्लाक्सीजन 25% 0.06% की दर से छिड़काव कर सकते हैं। याद रहे छिड़काव करने से पहले एक बार अपने नजदीकि कृषि विज्ञान केंद्र में रोग विशेषज्ञ से इसकी पहचान और जानकारी ज़रूर ले लें। डॉ अनुज ने बताया कि छिड़काव के समय मौसम साफ होना चाहिए तथा हल्की धूप निकली होनी चाहिए।


फसल का पीला दिखना

फसल सलाह के मुताबिक फसल पर ज्यादा यूरिया के छिड़काव से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है और फसल पर पीलापन दिखने लगता है। ऐसे में यूरिया का छिड़काव भी फौरन रोक दें। बिजाई के बाद की दूसरी सिंचाई पर 25 किलो ग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से ही छिड़काव करें। अगर आप को लगता है की नाइट्रोजन की मात्रा अधिक हो जाती है तो उससे बचने और उसके संतुलित उपयोग के लिए यूरिया को सिंचाई से पहले ही छिड़क कर डालें।

माहूँ लगने पर क्या करें?
गेहूं की पत्तियों पर माहूँ की संख्या 10-15 प्रति कल्ला हो जाती है तो क्यूनालफोस 25% ई.सी. दवा का छिड़काव करें। प्रति एकड़ दवा का छिड़काव 200 से 250 लीटर पानी में 400 ml दवा के अनुपात में ही करें।
डॉ. अनुज कुमार ने आगे कहा, “किसान साथियों फिलहाल पूरे देश में गेहूं की फसल अच्छी है, आपको चिंता करने की जरुरत नहीं हैं। लेकिन फसल में खाद डालने, कीटनाशक का छिड़काव करने, या फिर कोई और कृषि कर्म करने से पहले मौसम का ध्यान जरुर रखें। ऐसा करके हम देश में गेहूं के बंपर उत्पादन में अपना योगदान दे पाएंगे। अच्छी फसल ले पाएंगे।’

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