टमाटर और शिमला मिर्च की फसल में फल फटना, पत्तियों का मुड़ना और फूल झड़ना रोग या कीट की वजह से नहीं, बल्कि मिट्टी में बोरान पोषक तत्व की कमी के कारण हो रहा है। किसान गलत इलाज पर पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि सही समय पर मिट्टी जांच और बोरान का संतुलित छिड़काव करने से फसल और बाजार भाव दोनों बचाए जा सकते हैं।
बाराबंकी समेत कई इलाकों में टमाटर और शिमला मिर्च की खेती करने वाले किसान इन दिनों भारी नुकसान झेल रहे हैं। फसल तैयार होने से ठीक पहले टमाटर फटने लगते हैं, पत्तियां मोटी होकर मुड़ जाती हैं और फूल झड़ने लगते हैं। इससे उत्पादन घट रहा है और बाजार में अच्छे दाम मिलने के समय किसान को सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अधिकांश किसान इस समस्या को रोग या कीट का हमला समझकर महंगी दवाइयों, कीटनाशकों और घरेलू नुस्खों पर हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या ठीक नहीं हो रही।

खेत निरीक्षण में सामने आई असली वजह
न्यूज़ पोटली की ग्राउंड रिपोर्ट में बाराबंकी के प्रभावित किसानों से बातचीत की गई। खेतों का निरीक्षण करने के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने साफ किया कि यह समस्या किसी बीमारी या कीट के कारण नहीं है, बल्कि मिट्टी में बोरान नामक सूक्ष्म पोषक तत्व की गंभीर कमी की वजह से हो रही है।वैज्ञानिकों के अनुसार बोरान की कमी होने पर फूल झड़ने लगते हैं, फल सही तरह विकसित नहीं हो पाते और टमाटर में फल फटने की समस्या बढ़ जाती है। यही वजह है कि दवाइयों के छिड़काव के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिल रही।

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किसानों के लिए क्या है सीख
विशेषज्ञों ने बताया कि रोग और पोषक तत्व की कमी के लक्षण अलग-अलग होते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में किसान दोनों को एक ही समझ लेते हैं। सही समय पर मिट्टी की जांच और आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग करने से इस तरह के नुकसान से बचा जा सकता है।

मिट्टी की नियमित जांच जरूरी
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बोरान का सही मात्रा में और सही समय पर छिड़काव करने से टमाटर और शिमला मिर्च की फसल को बचाया जा सकता है। साथ ही, मिट्टी के पोषण की नियमित जांच से न सिर्फ उत्पादन बढ़ता है बल्कि बाजार भाव का पूरा फायदा भी किसान को मिल पाता है।
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