क्या है AI टूल ‘सभासार’? ग्राम पंचायत में इसका क्या काम?

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मोदी सरकार ई-गवर्नेंस को प्राथमिकता देते हुए पंचायत स्तर पर इसे प्रभावी बनाने के लिए सभी ढाई लाख पंचायतों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल सभासार से लैस करेगी। यह टूल ग्राम सभा की बैठकों के तुरंत डिजिटल मिनट बनाएगा और 13 भाषाओं में काम करेगा। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने सभासार का विमोचन किया।

नई दिल्ली। डिजिटलाइज़ेशन और ई-गवर्नेंस को प्राथमिकता देते हुई मोदी सरकार अब इसे पंचायत स्तर पर और प्रभावी ढंग से लागू करना चाहती है। सरकार ने ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली को और अधिक गतिशील, पारदर्शी व जवाबदेह बनाने की मंशा से देश की सभी ढाई लाख पंचायतों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टूल सभासार से लैस करने का निर्णय लिया है।

केंद्रीय पंचायतीराज मंत्री ललन सिंह और राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में सभासार का विमोचन किया। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि यह एआइ टूल ग्राम पंचायतों की तकनीकी क्षमता बढ़ाएगा। इसे पंचायत स्तर के अधिकारी या जनप्रतिनिधि अपने मोबाइल में इंस्टाल करेंगे। उसके बाद जब भी ग्राम सभा की कोई बैठक होगी तो किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को हाथ से महत्वपूर्ण बिंदु लिखने या फिर बाद में मीटिंग के नोट बनाने की आवश्यकता नहीं होगी।

सभी बैठकों का रिकॉर्ड भी रहेगा शामिल
अब सभासार से डिजिटल रिकार्ड में यह भी शामिल रहेगा कि पिछली बैठक में क्या-क्या बातें सामने आई थीं और पंचायत कार्मिक व जनप्रतिनिधि उसमें दर्ज करा सकेंगे कि संबंधित बिंदु पर कितनी कार्यवाही आगे बढ़ी। पंचायतीराज मंत्रालय चाहता है कि देशभर में ग्राम पंचायतों के कार्यवृत्त एक समान और व्यवस्थित बनें। अधिकारियों ने बताया कि इस एआइ टूल के संबंध में जल्द ही सभी पंचायतों के संबंधित कार्मिक और जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा।

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13 भाषाओं में काम करेगा टूल
सभासार अपने आप सभी वक्ताओं के वक्तव्य के आधार पर बैठक के मिनट तैयार करेगा। जो भी मुद्दा किसी के भी द्वारा ग्राम पंचायत क्षेत्र के संबंध में उठाया गया होगा, वह प्रमुखता से कार्यवृत्त (मीटिंग मिनट्स) में शामिल हो जाएगा, क्योंकि उसमें मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा। यह टूल फिलहाल अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, कन्नड, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू और बांग्ला समेत कुल 13 भाषाओं में काम करेगा। इसे विकसित करने के पीछे अधिकारी कारण बताते हैं कि पंचायतों में स्टाफ की कमी है। जब भी बैठकें होती हैं तो उनका कार्यवृत्त अच्छे से तैयार नहीं हो पाता। यह भी रिकार्ड व्यवस्थित नहीं रहता कि पिछली बैठक में क्या-क्या मुद्दे उठे थे और उन पर क्या कार्यवाही हुई।

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