उत्तर प्रदेश सरकार ने धान किसानों और मिलों को बड़ी राहत दी है। अब हाइब्रिड धान पर 3% और मोटे धान पर 1% की अतिरिक्त छूट मिलेगी। इससे करीब 13–15 लाख किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा। सरकार इस योजना पर 186 करोड़ रुपये खर्च करेगी।धान खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए किसान पंजीकरण और सत्यापन अब 80% तक ऑनलाइन हो गया है। जीपीएस से ट्रांसपोर्ट और डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की गई है।
उत्तर प्रदेश में धान की बंपर पैदावार के बीच योगी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने धान खरीद को लेकर रिकवरी दर (recovery rate) में ढील दी है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और मिलों को भी राहत मिलेगी।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने लोकभवन में पत्रकार वार्ता कर छूट के निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिलर्स द्वारा धान की कुटाई में कम रिकवरी का मामला उठाया गया था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया है। वर्ष 2017 में प्रदेश में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाईब्रिड धान के रिकवरी प्रतिशत में तीन प्रतिशत की छूट दी थी।अब हाइब्रिड धान पर 3% की छूट के साथ-साथ मोटे धान पर 1% की अतिरिक्त छूट देने का फैसला किया गया है। इस कदम से राज्य के करीब 13 से 15 लाख धान उत्पादक किसानों को फायदा होगा।
मोटे धान पर अब मिलेगी 1% की अतिरिक्त छूट
केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, खरीदे गए धान से चावल की रिकवरी दर 67% होनी चाहिए, लेकिन ज़मीन पर इतनी रिकवरी नहीं हो पाती। ऐसे में यूपी सरकार 2018 से 3% की छूट दे रही थी।अब इस साल सरकार ने मोटे धान पर एक प्रतिशत की और राहत देने का ऐलान किया है। यानी अब मिलों को केवल 66% रिकवरी ही देनी होगी।सरकार इस योजना पर करीब ₹186 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
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खरीद प्रक्रिया होगी पारदर्शी और डिजिटल
धान खरीद में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है। अब किसानों का पंजीकरण और सत्यापन 70-80% तक ऑनलाइन किया जा रहा है।एग्रीस्टैक (Agristack) के डेटा का उपयोग करके मैन्युअल वेरिफिकेशन की ज़रूरत लगभग खत्म हो गई है।इसके अलावा, जीपीएस युक्त ट्रक से धान का परिवहन और स्टॉक मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि सब कुछ पारदर्शी ढंग से हो।
किसानों, मजदूरों और मिलों, सबको फायदा
सरकार का मानना है कि इस फैसले से किसानों, मजदूरों और मिलों, तीनों को फायदा होगा।मिलों को राहत मिलने से वे किसानों से ज़्यादा धान खरीद पाएंगी। इसका सीधा असर मंडियों में पड़ेगा, जहां किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलेगा।
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