IFFCO चेयरमैन दिलीप संघाणी ने बाराबंकी की किसान पाठशाला में नैनो यूरिया को खेती का भविष्य बताया। संघाणी ने बताया कि यूरिया के दुष्प्रभाव से बचने और सब्सिडी खर्च कम करने के लिए इफको ने नैनो यूरिया विकसित किया, जो अब किसानों और मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प है।
IFFCO के चेयरमैन दिलीप संघाणी ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में आयोजित किसान पाठशाला के दौरान किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “सहकार से समृद्धि” का नारा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘खेत की बात—खेत पर’ कार्यक्रम के उद्देश्यों को और मजबूत करता है। संघाणी ने कार्यक्रम में बाराबंकी के पद्मश्री किसान रामशरण वर्मा और मुख्यमंत्री योगी की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि दोनों मिलकर किसानों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
नैनो यूरिया का इस्तेमाल
दिलीप संघाणी ने कहा कि वे हमेशा इस बात पर विचार करते हैं कि सहकारिता और कृषि के माध्यम से गाँवों को कैसे अधिक समृद्ध बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब किसानों से रासायनिक खाद, विशेषकर यूरिया, का कम उपयोग करने की अपील की थी, तभी इफको ने इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने पर काम शुरू किया।
उन्होंने कहा कि यूरिया के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए इफको ने नैनो यूरिया पर शोध शुरू किया और इसे सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया। सरकार ने लगभग दो वर्षों तक अलग–अलग मौसम और फसलों पर सफल परीक्षणों के बाद नैनो यूरिया को मंजूरी दी।
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IFFCO चेयरमैन ने कहा—
“आज नैनो यूरिया देश के हित में है। इससे न सिर्फ खाद पर सरकार का भारी सब्सिडी खर्च बचेगा, बल्कि मिट्टी और हम सबके स्वास्थ्य के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है।”
नैनो यूरिया कृषि का आधार
उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया कम मात्रा में अधिक प्रभाव देता है, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारता है और पर्यावरण–अनुकूल खेती को बढ़ावा देता है। संघाणी ने किसानों से नैनो उर्वरक अपनाने की अपील की और कहा कि यह भविष्य की टिकाऊ कृषि का आधार बनेगा।
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