यूपी सरकार ने किसान पाठशाला की शुरुआत बाराबंकी से की। सीएम योगी ने किसानों को लागत कम करके उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी और बताया कि यूपी एथेनॉल व फल–सब्ज़ी उत्पादन में देश में नंबर-1 है। पद्मश्री रामशरण वर्मा ने बताया कि उन्नत खेती और सरकारी मदद से उनकी खेती 6 एकड़ से 275 एकड़ हुई। कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती अपनाने और कम खाद उपयोग की अपील की।
योगी सरकार 12 से 29 दिसंबर तक पूरे उत्तर प्रदेश में किसान पाठशाला का आयोजन कर रही है। इसकी शुरुआत आज बाराबंकी जिले से हुई, जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मश्री किसान रामशरण वर्मा के गाँव दौलतपुर के खेत से “खेत की बात खेत पर” कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से संवाद किया, प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी किसानों को चेक व स्वीकृति पत्र भी वितरित किए। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख भी मौजूद रहे।
एक एकड़ में 250 क्विंटल तक आलू उत्पादन संभव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भूमि अत्यंत उपजाऊ है, यहाँ जल संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं और बेहतर कनेक्टिविटी किसानों को बड़ी ताकत देती है। उन्होंने किसानों से आधुनिक और उन्नत खेती अपनाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा तभी किसानों को असली लाभ मिलेगा। उन्होंने बाराबंकी के पद्मश्री किसान रामशरण वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि एक एकड़ में 250 क्विंटल तक आलू उत्पादन संभव है और यह कम लागत में अधिक उत्पादन का बेहतरीन मॉडल है।
यूपी एथेनॉल उत्पादन में पहले स्थान पर
सीएम योगी ने यह भी बताया कि गन्ना किसानों के हित में सरकार लगातार काम कर रही है और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। किसानों को उनके फसलों की सही एमएसपी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में एथेनॉल उत्पादन में पहले स्थान पर है, जहाँ उत्पादन पहले 41 करोड़ लीटर था, वह अब बढ़कर 182 करोड़ लीटर हो गया है। फल और सब्ज़ी उत्पादन में भी यूपी देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। सीएम ने बताया कि किसानों को समय पर उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध कराने के लिए लखनऊ में भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर सीड पार्क विकसित किया जा रहा है।
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प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की और रासायनिक खाद, विशेषकर यूरिया, का कम उपयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाएँ किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं, इसलिए किसानों को इन योजनाओं का अधिकतम लाभ अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने पद्मश्री किसान रामशरण वर्मा को उन्नत खेती का मॉडल बताते हुए किसानों को उनसे प्रेरणा लेने की बात कही।
6 एकड़ से 275 एकड़ तक
कार्यक्रम में पद्मश्री किसान रामशरण वर्मा ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। वर्मा ने बताया कि 32 वर्ष पहले 6 एकड़ से शुरू हुई उनकी खेती आज सहकारिता आधारित बटाई मॉडल पर 275 एकड़ तक पहुँच चुकी है। केला, टमाटर, आलू, मेंथा, तरबूज, खरबूजा और गेहूं की विविध फसल प्रणाली ने उनके उत्पादन और आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
उन्होंने बताया कि टिश्यू कल्चर केले ने किसानों को नई दिशा दी है और टमाटर में 60 हजार रुपये की लागत पर दो से ढाई लाख रुपये तक लाभ मिल रहा है। सरकारी प्रोत्साहन के कारण टमाटर उत्पादन में 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है। छोटे किसान, जो पहले 20–25 हजार रुपये कमाते थे, अब डेढ़ से दो लाख रुपये तक वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं। वर्मा ने कहा कि वे साल में 30 हजार से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं और अपने गांव के लोगों को काम देने में सक्षम हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “आज मैं डेढ़ लाख रुपये का चश्मा पहन रहा हूं, यह सब मेरी खेती और योगी सरकार की योजनाओं से ही संभव हो पाया है।”
नैनो फर्टिलाइज़र भविष्य
कार्यक्रम के दौरान इफको के चेयरमैन ने भी किसानों को संबोधित किया और रासायनिक खाद का कम उपयोग करने तथा नैनो फर्टिलाइज़र के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि नैनो तकनीक भविष्य की जरूरत है और इससे खेती की लागत कम होने के साथ मिट्टी की सेहत भी बेहतर होती है।
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