पंजाब मंत्रिमंडल ने गन्ना किसानों के लिए एसएपी पर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सीधी सब्सिडी को मंजूरी दी है, जिससे राज्य देश में गन्ने की सबसे ऊंची कीमत देने वाला बन गया है। इसके साथ ही, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के साथ मिलकर बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने का फैसला किया है, ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सके।
चंडीगढ़।पंजाब मंत्रिमंडल ने गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए राज्य द्वारा निर्धारित मूल्य (एसएपी) पर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की प्रत्यक्ष सब्सिडी को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ ही पंजाब देश में गन्ने की सबसे ऊंची कीमत देने वाला राज्य बन गया है।
68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार का यह फैसला फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि 2025–26 के पेराई सत्र के दौरान यह 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी निजी चीनी मिलों के जरिए सीधे गन्ना किसानों को दी जाएगी।
गन्ने का SAP अब 416 रुपये प्रति क्विंटल
सरकार के अनुसार, पंजाब में गन्ने का एसएपी अब 416 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के 401 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है। सरकार का कहना है कि इस बढ़ोतरी से राज्य के गन्ना किसानों को देश में सबसे बेहतर मुआवजा मिलता रहेगा और उनकी आय सुरक्षा और मजबूत होगी।
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क्या है SAP?
State Agreed Price (SAP) वह न्यूनतम कीमत होती है, जो राज्य सरकार किसानों की फसल, खासकर गन्ने के लिए तय करती है। इस कीमत से कम पर किसानों से फसल नहीं खरीदी जा सकती। आमतौर पर यह केंद्र सरकार द्वारा तय FRP से अधिक होती है, ताकि किसानों को उनकी उपज का सुरक्षित और बेहतर दाम मिल सके और उनकी आय सुरक्षित रहे।
बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने की पहल
इस बीच, फसल विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने एक और अहम फैसला लिया है। पंजाब के बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के साथ सहयोग को मंजूरी दी गई है। इस सहयोग के तहत जापानी तकनीक को अपनाया जाएगा, जिससे बागवानी विकास, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, जल प्रबंधन और कौशल विकास को मजबूती मिलेगी।सरकार का लक्ष्य इस पहल के जरिए पंजाब की अर्थव्यवस्था में बागवानी की हिस्सेदारी को दोगुना करना है। यह कदम किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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