केंद्र सरकार ने नया बीज कानून (ड्राफ्ट) जारी किया है और 11 दिसंबर तक सभी से सुझाव मांगे हैं। इस कानून का उद्देश्य किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना, नकली बीजों पर रोक लगाना और बीज क्षेत्र को आधुनिक जरूरतों के मुताबिक बनाना है। छोटे उल्लंघनों को अपराधमुक्त करने और गंभीर मामलों में सख्त सजा का प्रावधान रखा गया है।
केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय ने नया बीज कानून (न्यू सीड लॉ) का ड्राफ्ट जारी कर दिया है और लोगों से 11 दिसंबर तक अपने सुझाव भेजने को कहा है। यह नया कानून पुराने सीड्स एक्ट 1966 और सीड्स कंट्रोल ऑर्डर 1983 की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि बीजों से जुड़े नियमों को अब खेती और बाजार की मौजूदा जरूरतों के हिसाब से अपडेट करना जरूरी हो गया है।
नए बीज कानून क्यों?
नए बीज कानून का मकसद है किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज सही कीमत पर उपलब्ध कराना, नकली और खराब बीजों पर रोक लगाना, अच्छी किस्मों के बीजों को देश में लाने की प्रक्रिया आसान बनाना और किसानों के अधिकारों की सुरक्षा करना। ड्राफ्ट में छोटे-मोटे उल्लंघनों पर सख्ती कम करने और बड़े उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है, ताकि कामकाज आसान हो सके और कानून का सही पालन भी हो।
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सरकार ने मांगे सुझाव
सरकार ने ड्राफ्ट और सुझाव भेजने का फॉर्म अपनी वेबसाइट पर डाल दिया है। कोई भी व्यक्ति अपने सुझाव वर्ड या पीडीएफ फाइल में ईमेल कर सकता है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही इशारा दे चुके हैं कि यह नया कानून संसद के बजट सत्र में पेश किया जा सकता है।
किए गए तीन लाख से ज्यादा निरीक्षण
इधर, केंद्र सरकार ने उर्वरक की किल्लत और कालाबाजारी रोकने के लिए भी देशभर में बड़ी कार्रवाई की है। राज्यों के साथ मिलकर किए गए इस अभियान में अभी तक तीन लाख से ज्यादा निरीक्षण किए गए हैं। हजारों नोटिस जारी हुए, कई लाइसेंस रद्द या निलंबित किए गए और सैकड़ों एफआईआर दर्ज हुईं। सबसे ज्यादा कार्रवाई उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार में हुई। इन कदमों से खाद की ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगी और किसानों को समय पर खाद मिल सकी।
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