केंद्र सरकार नया सीड्स बिल लाने जा रही है, जिससे बीज व्यवस्था मजबूत होगी और किसानों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। खराब बीज बेचने पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये और जानबूझकर ऐसा करने पर तीन साल तक की जेल का प्रावधान है। यह बिल किसानों और पारंपरिक बीजों पर लागू नहीं होगा, जबकि बीज कंपनियों पर सख्त निगरानी और कार्रवाई की जाएगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रस्तावित नया सीड्स बिल विदेशी कंपनियों को बिना रोक-टोक भारतीय बाजार में प्रवेश देने के लिए नहीं है, बल्कि इसका मकसद देश की बीज व्यवस्था को मज़बूत करना और किसानों को सुरक्षित करना है।
यह बिल अगले महीने संसद में पेश किया जा सकता है। इसमें खराब या नकली बीज बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। अभी तक घटिया बीज बेचने पर सिर्फ़ 500 रुपये का जुर्माना था, लेकिन नए बिल में इसे बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक किया जा रहा है। अगर कोई जानबूझकर खराब बीज बनाता या बेचता है, तो उसे तीन साल तक की जेल भी हो सकती है।
पुराने कानूनों की जगह लेगा नया बिल
यह नया कानून सीड्स एक्ट 1966 और सीड्स कंट्रोल ऑर्डर 1983 की जगह लेगा, जो कई दशक पुराने हो चुके हैं। कृषि मंत्री ने साफ किया कि इस बिल से किसानों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पारंपरिक बीज सुरक्षित रहेंगे
मंत्री ने उन आशंकाओं को गलत बताया जिनमें कहा जा रहा है कि नया कानून पारंपरिक या देसी बीजों को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि यह बिल किसानों और किसान द्वारा विकसित किस्मों पर लागू ही नहीं होगा। मंत्री ने कहा कि किसान पहले की तरह अपना बीज खुद बो सकेंगे, बीज सुरक्षित रख सकेंगे और दूसरे किसानों को बीज दे या बेच सकेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि किसानों में प्रचलित बीज उधार लेने और बाद में सवा गुना लौटाने की परंपरा पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।
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कंपनियों के बीजों पर सख्ती
जो बीज कंपनियों द्वारा बेचे जाएंगे, उन पर ट्रेसबिलिटी यानी बीज की पूरी जानकारी दर्ज करना ज़रूरी होगा। अगर बीज में अंकुरण नहीं हुआ या गुणवत्ता खराब पाई गई, तो कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की राय भी ली जा रही
कृषि मंत्रालय को इस बिल पर अब तक 9,000 से ज़्यादा सुझाव मिले हैं, जिन पर अध्ययन किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि बजट सत्र के पहले चरण में इस बिल को संसद में पेश किया जाए।मतलब ये कि नया सीड्स बिल किसानों को खराब बीज से बचाने, उनके पारंपरिक अधिकारों को सुरक्षित रखने और बीज बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए लाया जा रहा है।
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