केंद्र सरकार ने 2022 से लगे प्रतिबंध में आंशिक ढील देते हुए 5 लाख टन गेहूं उत्पादों (आटा, मैदा, सूजी) के निर्यात की अनुमति दी है। देश में रिकॉर्ड उत्पादन और पर्याप्त भंडार के बीच यह फैसला लिया गया है, जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारतीय ब्रांड्स के गेहूं उत्पाद मिल सकेंगे। हालांकि, निर्यात की समय-सीमा और मात्रा को लेकर उद्योग को अभी स्पष्टता का इंतजार है।
गेहूं की नई फसल की कटाई अप्रैल से शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने गेहूं उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने वर्ष 2022 से लगे प्रतिबंध में आंशिक ढील देते हुए 5 लाख टन गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात की अनुमति दे दी है। इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारत की जानी-पहचानी कंपनियों का आटा, मैदा और सूजी आसानी से मिल सकेगा।
कितना और कैसे होगा निर्यात
DGFT ने 16 जनवरी को जारी अधिसूचना में कहा है कि गेहूं और उससे बने उत्पादों का निर्यात अब भी प्रतिबंधित श्रेणी में रहेगा, लेकिन HS कोड 1101 के तहत आटा, मैदा, सूजी (समोलिना), होल व्हीट आटा और उससे जुड़े उत्पादों का कुल 5 लाख टन तक निर्यात विशेष अनुमति (एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन) के जरिए किया जा सकेगा। इसके लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
उद्योग की लंबे समय से मांग
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2025 में उद्योग की मांग को DGFT को भेजा था। उद्योग का कहना था कि देश में गेहूं का पर्याप्त भंडार है और उत्पादन भी अच्छा रहने वाला है, इसलिए आटा, सूजी और मैदा के निर्यात की अनुमति दी जाए। शुरुआत में 10 लाख टन तक निर्यात की अनुमति देने का सुझाव भी दिया गया था।आपको बता दें कि मई 2022 से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध है और अक्टूबर 2022 से गेहूं उत्पादों का निर्यात भी बंद किया गया था।
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रिकॉर्ड उत्पादन से मजबूत स्थिति
भारत में 2024-25 में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन 117.54 मिलियन टन रहा है। सरकार ने 2025-26 के लिए 119 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।कृषि मंत्रालय के अनुसार 9 जनवरी तक गेहूं की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है और रकबा 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से ज्यादा है।सरकार ने 2024-25 में 30 मिलियन टन गेहूं की खरीद की, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। निर्यात पर रोक के चलते घरेलू बाजार में कीमतें भी काफी हद तक नियंत्रित रहीं।
निर्यात में चुनौतियां भी
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत के निर्यात प्रतिबंध के बाद मध्य-पूर्व देशों में कई नए आटा मिल्स लग गए, जो दुनिया भर में रहने वाले करीब 4 करोड़ भारतीयों की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। ऐसे में अब निर्यात की अनुमति मिलने का फायदा मुख्य रूप से आशिर्वाद, फॉर्च्यून और राजधानी जैसे बड़े ब्रांड्स को ही मिलेगा।मिलर्स का मानना है कि तुरंत बड़े ऑर्डर मिलना आसान नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
उद्योग का यह भी कहना है कि सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है कि निर्यात की अनुमति कब से मिलेगी और उसकी वैधता कितने समय तक होगी। अगर अनुमति 31 मार्च तक ही सीमित रहती है, तो पूरे 5 लाख टन का निर्यात करना मुश्किल हो सकता है।
उद्योग का सुझाव है कि अगर निर्यात अगले वित्त वर्ष में भी जारी रखा जाता है, तो निर्यात की मात्रा बढ़ाई जानी चाहिए।
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