शाहजहाँपुर स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने ‘बिस्मिल’ नाम की नई उच्च उपज वाली गन्ना किस्म (को.शा. 17231) विकसित की है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब यह किस्म उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में भी बोई जा सकेगी। यह वैरायटी रेड रॉट बीमारी के प्रति प्रतिरोधी है। इससे ज़्यादा पैदावार और बेहतर शुगर कंटेंट मिलता है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (UPCSR), शाहजहाँपुर ने किसानों के लिए एक नई और बेहतर गन्ने की किस्म को.शा. 17231 विकसित की है, जिसे ‘बिस्मिल’ नाम दिया गया है। अब इस किस्म को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। पहले यह गन्ना केवल उत्तर प्रदेश में ही बोया जा सकता था, लेकिन अब हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के किसान भी इसकी खेती कर सकेंगे।
25 फसलों की 184 नई किस्मों को मंजूरी
यह किस्म महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में उनके नाम पर रखी गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की अखिल भारतीय समन्वित शोध समिति ने हाल ही में देश की 25 फसलों की 184 नई किस्मों को मंजूरी दी है, जिनमें गन्ने की यह किस्म भी शामिल है।
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पहले सिर्फ यूपी के लिए स्वीकृत थी
परिषद के निदेशक वी.के. शुक्ला ने बताया कि यह किस्म पहले केवल उत्तर प्रदेश के लिए स्वीकृत थी, लेकिन केंद्रीय किस्म विमोचन समिति की अनुमति के बाद अब चार अन्य राज्यों में भी इसकी खेती का रास्ता साफ हो गया है। इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की अखिल भारतीय समन्वित गन्ना अनुसंधान परियोजना के तहत विकसित किया गया है। इसका आधिकारिक नाम CoSHA 17231 (कोयंबटूर–शाहजहांपुर) रखा गया है।
लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है क़िस्म
इस किस्म के ब्रीडर डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, यह गन्ना लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है। इसकी औसत पैदावार करीब 86 टन प्रति हेक्टेयर है और इसमें लगभग 14 प्रतिशत चीनी परता पाई गई है।
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