उत्तर प्रदेश

यूपी के गन्ना किसानों को योगी सरकार ने दिया झटका, नहीं बढ़ाया गन्ने का दाम

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर नहीं है। प्रदेश की योगी सरकार ने गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी गन्ने का मूल्य 370 रुपए प्रति क्विंटल रखा गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट शुरू होने से पहले कैबिनेट में प्रदेश के 10 प्रस्ताव को मंजूरी दी.

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ONION FARMING

छोटी जोत वाले किसानों के लिए मिसाल हैं यूपी के किसान राम प्रवेश मौर्य…जानिए उनकी खेती का तरीक़ा

साल 2019 के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के मुताबिक, भारत में दो हेक्टेयर से कम ज़मीन वाले किसानों का प्रतिशत लगभग 85% था. यानी, देश के ज़्यादातर किसानों के पास एक हेक्टेयर से भी कम ज़मीन है. भारत में ज़्यादातर किसान छोटे और सीमांत किसान हैं. छोटे किसान वे होते हैं जो अपने खेतों में फसल उगाने के लिए अपने श्रम और संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं. उन्हीं किसानों में से एक हैं उत्तर प्रदेश के बहराइच के किसान राम प्रवेश मौर्य, जिन्होंने केवल 1 हेक्टेयर भूमि में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.

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आईपीएम

कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशक का नहीं IPM का इस्तेमाल करें, कम लागत में अच्छी पैदावार होगी

IPM यानी इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट या एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन वो तरीका है, जिसमें फसल को खर-पतवार, कीड़े और रोगों से बचाने के लिए ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं जिनकी लागत बहुत कम आती है।

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yogi adityanath

‘वर्ष 2023-24 का 99.51 प्रतिशत का गन्ना मूल्य भुगतान हम लोग कर चुके हैं..’ बागपत में बोले सीएम योगी

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बागपत में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार किसानों के हित में कई बड़े निर्णय ले रही है. उन्होंने बताया कि पिछले आठ वर्षों में गन्ना किसानों को 2.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है, जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है. 

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डिजिटल क्रांति

क्या है डिजिटल कृषि मिशन?

भारत की डिजिटल क्रांति ने हाल के वर्षों में डिजिटल पहचान, सुरक्षित भुगतान और लेनदेन के माध्यम से शासन और सेवा वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इन विकासों ने वित्त, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और खुदरा सहित क्षेत्रों में काम आसान कर दिये हैं। कृषि क्षेत्र में भी ऐसे ही बदलाव के लिए 2 सितंबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्र सरकार के 1,940 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी के साथ 2,817 करोड़ रुपये के पर्याप्त वित्तीय लागत के साथ ‘डिजिटल कृषि मिशन’ को मंजूरी दी थी।

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उत्तर प्रदेश में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी में अत्याधुनिक बायोचार यूनिट बनाई जायेगी

उत्तर प्रदेश ने राज्य में टिकाऊ कृषि (Sustainable agriculture) को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है।इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और AgroCCS के सीईओ एलेक्सी टिटेंकोव के बीच एक आधिकारिक समझौता हुआ। इसके तहत वाराणसी में एक अत्याधुनिक बायोचार इकाई की स्थापना की जाएगी.

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रिलायंस इंडस्ट्री

पराली से कार्बनिक खाद बना रही है Reliance Industry

Reliance Industry लगभग सभी क्षेत्रों में काम कर रही है. और अब कृषि क्षेत्र में भी. देश में पराली एक बड़ी समस्या है. किसानों के लिए, सरकार के लिए और प्रदूषण की दृष्टि से आम जनता के लिए भी. हर साल पराली जालने से तेज़ी से प्रदूषण बढ़ने की समस्या होती है. हालांकि सरकार ने भी इससे निपटने के लिए कई कदम उठाये हैं. लेकिन अभी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पाया.

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लखनऊ के राजभवन में प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प लगी है प्रदर्शनी, आलू व्यापार को नई दिशा देने के लिए सम्मेलन आयोजित

रंग-बिरंगे फूलों से सजी-धजी यह कोई बगिया नहीं है, बल्कि यह लखनऊ के राजभवन में पुष्प, फल और शाक-भाजी की लगाई गई प्रदर्शनी है। तीन दिवसीय इस प्रदर्शनी में हर दिन हजारों लोग आ रहे हैं। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य न केवल लोगों को खेती के फायदे के बारे में बताना, बल्कि नई तकनीकों को…

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खजूर

अब उत्तर प्रदेश में भी होगी खजूर की खेती, मिर्जापुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में खजूर की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना बना रही है. इसके तहत राज्य सरकार मिर्जापुर में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेगी. सरकार के इस फ़ैसले से राज्य के किसानों को आर्थिक लाभ तो मिलेगा ही इसके साथ ही यूपी खजूर उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर भी बनेगा.

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कृषि

Economic Survey 2024-25: पिछले एक दशक में कृषि आय में सालाना 5.23 प्रतिशत की वृद्धि

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्‍त निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2024-25 पेश करते हुए कहा कि भारत के कृषि क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय लचीलापन दर्शाया है, जो कि सरकारी पहलों जैसे उत्पादकता, फसल विविधता को बढ़ावा देकर और कृषि आय में वृद्धि के कारण संभव हुई है.

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