FPO

एफपीओ की संख्या बढ़ी, लेकिन आर्थिक मदद और सहयोग की जरूरत: रिपोर्ट

भारत में 44,000 से ज्यादा एफपीओ बने हैं, जिन्होंने किसानों को ताकत दी है, लेकिन ज़्यादातर पूंजी, कुशल संसाधन और प्रबंधन की कमी से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट कहती है कि उन्हें टिकाऊ बनाने के लिए वित्तीय मदद और संस्थागत सहयोग ज़रूरी है।

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यूपी सरकार का प्रस्ताव

विवाहित बेटियों को मिलेगा पिता की कृषि भूमि में हिस्सा, यूपी सरकार का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मौजूदा कानून (राजस्व संहिता-2006) के तहत अभी केवल विधवा पत्नी, पुत्र और अविवाहित पुत्री को ही जमीन में अधिकार मिलता है। लेकिन अब धारा 108(2) से “अविवाहित” शब्द हटाने का प्रस्ताव है। इससे विवाहित और अविवाहित बेटियों में भेदभाव खत्म होगा और दोनों को बराबरी से हिस्सा मिलेगा। मध्य प्रदेश और राजस्थान में यह व्यवस्था पहले से लागू है। यूपी में यह प्रस्ताव कैबिनेट और सदन से मंजूरी मिलने के बाद कानून बनेगा।

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यूपी सरकार

सरसों व राई की खेती को बढ़ावा देने के लिए मुफ्त बीज देगी यूपी सरकार, 25 सितंबर तक करें आवेदन

उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को सरसों और राई की खेती के लिए 2 किलो मुफ्त बीज मिनीकिट देगी। किसान 1 से 25 सितंबर 2025 तक कृषि विभाग के पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। ज़्यादा आवेदन आने पर चयन ऑनलाइन लॉटरी से होगा और चुने गए किसानों को बीज सरकारी भंडारों से POS मशीन के जरिए मिलेगा। योजना का मकसद तिलहनी फसलों का उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाना है।

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उत्तर प्रदेश

गन्ना खेती में नई क्रांति: NSI और UPCSR मिलकर करेंगे ब्रीडर सीड का उत्पादन

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को फायदा पहुँचाने के लिए NSI कानपुर और UPCSR शाहजहाँपुर के बीच समझौता हुआ है। NSI अपनी 52 एकड़ भूमि पर उच्च गुणवत्ता वाले ब्रीडर सीड गन्ने का उत्पादन करेगा और UPCSR तकनीकी सहयोग व प्रशिक्षण देगा। इस पहल से हर साल किसानों को लगभग 15,000 अतिरिक्त ब्रीडर सीड गन्ना मिलेगा, जिससे उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ेगी।

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भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR)

15 सितंबर से शुरू होगा गेहूं-जौ बीज का पंजीकरण, किसानों को मिलेगी उन्नत किस्में

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) 15 सितंबर से अपना बीज वितरण पोर्टल खोलेगा। किसान इसमें पंजीकरण कर उन्नत किस्मों के गेहूं और जौ के बीज ले सकेंगे। बीज वितरण “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर होगा। गेहूं की DBW-187, DBW-372, DBW-327, DBW-371 और HD-3226 जैसी उच्च पैदावार और रोग-प्रतिरोधी किस्में किसानों को मिलेंगी। जौ की खेती करने वालों को भी नई किस्में उपलब्ध कराई जाएंगी।

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भारत का विकास

मजबूत हुआ भारत का विकास, कृषि क्षेत्र में 3.7% की छलांग, GDP पहुँची 7.8%

भारत की GDP ग्रोथ पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में 7.8% रही, जो अनुमान से कहीं ज़्यादा है। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर भी 1.5% से बढ़कर 3.7% हो गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे किसानों, वैज्ञानिकों और 140 करोड़ भारतीयों की मेहनत का नतीजा बताया। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत “Dead Economy” नहीं, बल्कि “Long Live Economy” है और विकसित भारत की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

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कृषि मंत्री

पीली मटर के जीरो आयात शुल्क पर कृषि मंत्री ने जताई चिंता

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीली मटर के लगातार फ्री आयात और इससे घरेलू दालों की कीमतों पर पड़ रहे नकारात्मक असर पर चिंता जताई है। उन्होंने किसानों के हित में इस पर 50% आयात शुल्क लगाने की मांग की है।दिसंबर 2023 से अब तक 3.5 मीट्रिक टन से ज्यादा पीली मटर आयात हो चुकी है और यह छूट 31 मार्च 2026 तक जारी है।भारतीय दलहन और अनाज संघ और CACP दोनों ने आयात रोकने या शुल्क बढ़ाने की सिफारिश की है, ताकि घरेलू बाजार स्थिर रहे और किसानों को दाल उत्पादन के लिए प्रोत्साहन मिले।

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जय सिंह

आलू की खेती की मास्टरक्लास, जय सिंह की 40 साल की खेती का अनुभव

उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले के प्रगतिशील किसान जय सिंह 40 साल से आलू और केले की खेती कर रहे हैं। वे खेत को तीन बार रोटावेटर से तैयार कर गोबर की खाद डालते हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में 12–15 क्विंटल बीज आलू (40–50 ग्राम) लगता है, जिसे उपचार के बाद बोया जाता है। पहली सिंचाई हल्की और बाद में पौधों की छतरी बनने पर पानी दिया जाता है। खाद में NPK, यूरिया, मैग्नीशियम और जिंक का संतुलन उनकी पैदावार को बेहतर बनाता है।

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यूपी

यूपी सरकार ने 11 कीटनाशकों पर लगाई रोक, बासमती चावल निर्यात बचाने की तैयारी

उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 अगस्त से तीन महीने के लिए 11 कीटनाशकों पर बैन लगाया है। इन दवाओं के इस्तेमाल से चावल में अवशेष रह जाते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता खराब होती है और विदेशों में निर्यात पर रोक लग जाती है। यूरोपीय यूनियन, अमेरिका, सऊदी अरब, कतर और कई देशों ने ऐसे चावल को लौटा दिया है। इसी वजह से किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वे इन प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल न करें, वरना उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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खाद आपूर्ति

वैश्विक संकट के बावजूद देश में खाद आपूर्ति सामान्य: केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने कहा है कि खरीफ 2025 सीजन में खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों को समय पर व पर्याप्त मात्रा में सप्लाई दी जा रही है। राजस्थान और यूपी में एमआरपी से ज्यादा दाम पर खाद बेचने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अभी तक 183 लाख टन यूरिया, 49 लाख टन डीएपी और 97 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद उपलब्ध है, जो जरूरत से कहीं ज्यादा है। वैश्विक संकट के बावजूद सरकार की कूटनीतिक और सप्लाई व्यवस्थाओं की वजह से खाद की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

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