पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहेगा चाय कारोबार

पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहेगा चाय कारोबार, दिसंबर की तुड़ाई से बढ़ेगा चाय उत्पादन

भारत के चाय उद्योग के लिए 2025 अच्छा साल रहने की उम्मीद है। इस साल चाय का उत्पादन पिछले साल से थोड़ा ज्यादा रह सकता है, जबकि निर्यात में 15–20 मिलियन किलो तक बढ़ोतरी की संभावना है। दिसंबर में तुड़ाई जारी रहने और ईरान, इराक व चीन को ज्यादा निर्यात से उद्योग को फायदा मिल रहा है।

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भारत का चाय निर्यात बढ़ा

भारत का चाय निर्यात बढ़ा, उत्पादन पर मौसम का असर

जनवरी-अक्टूबर 2025 में भारत का चाय निर्यात 6.47% बढ़कर 228.52 मिलियन किलो हुआ, मूल्य ₹6882.91 करोड़ रहा और औसत कीमत ₹301.20 प्रति किलो। उत्तरी भारत से निर्यात बढ़ा, दक्षिणी भारत से घटा, जबकि खराब मौसम के कारण उत्पादन 21% घटकर 161.93 मिलियन किलो रहा।

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पश्चिम बंगाल में कम हुई चाय की फसल

पश्चिम बंगाल में कम हुई चाय की फसल, असम में स्थिर रहीं बागानें

सितंबर 2025 में भारत का चाय उत्पादन 5.9% घटकर 159.92 मिलियन किलोग्राम रह गया।असम में उत्पादन लगभग स्थिर रहा (94.76 मिलियन किग्रा), जबकि पश्चिम बंगाल में भारी गिरावट आई (48.35 से घटकर 40.03 मिलियन किग्रा)।उत्तर भारत का कुल उत्पादन घटकर 138.65 मिलियन किग्रा और दक्षिण भारत का 21.27 मिलियन किग्रा रहा।

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भारत

भारत में पहली तिमाही में चाय का निर्यात 17% बढ़कर 219 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया,  जून में 32% की वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत का चाय निर्यात मूल्य के संदर्भ में 17 प्रतिशत बढ़कर 218.95 मिलियन डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 187.38 मिलियन डॉलर था। ऐसा पारंपरिक खरीदारों की ओर से चाय की मजबूत मांग के कारण हुआ।

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चाय की खेती

भारत में चाय की खेती, उत्पादन और निर्यात पर एक नजर

चाय, दुनिया में पानी के बाद दूसरा सबसे ज़्यादा पिया जाने वाला पेय पदार्थ है। भारत में कई करोड़ों लोगों की सुबह की शुरुआत चाय की चुस्कियों के साथ होती है। बहुत लोगों की शाम भी चाय के बिना अधूरी होती है। मतलब हम भारतीयों की जीवन में चाय का अहम स्थान है। उत्पादन की बात करें तो भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है। भारत के उत्तर पूर्वी भाग में सबसे अधिक चाय का उत्पादन होता है। इतना ही नहीं भारत दुनिया के सर्वाधिक चाय खपत करने वाले देशों में से एक है। इसके अलावा चाय भारत के नकदी फसलों में से भी एक है।पहाड़ी और आर्थिक पिछड़े इलाकों में चाय की खेती लोगों के लिए रोजगार का स्रोत भी है।

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