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रबी फसलों की बुआई लगभग पूरी, रकबा 2.8% बढ़ा

देश में रबी फसलों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है। 9 जनवरी तक रबी फसलों का कुल रकबा 644.29 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले साल से 2.8% अधिक है। गेहूं की बुआई पूरी हो चुकी है और मौसम अनुकूल होने से अच्छी पैदावार की उम्मीद है। दालों, तिलहनों, सरसों, मक्का और जौ के रकबे में बढ़ोतरी हुई है, जबकि रबी ज्वार के रकबे में कमी दर्ज की गई है।

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2 जनवरी तक कुल बुवाई क्षेत्र 634.14 लाख हेक्टेयर

रबी सीजन में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर, 2 जनवरी तक कुल बुवाई क्षेत्र 634.14 लाख हेक्टेयर

इस रबी सीजन में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और रकबा पिछले साल से ज्यादा हो गया है। किसानों ने बेहतर कीमत की उम्मीद में गेहूं को प्राथमिकता दी है। अगर मौसम अनुकूल रहा तो इस साल गेहूं समेत रबी फसलों का उत्पादन रिकॉर्ड हो सकता है।

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गेहूं में पहली सिंचाई और खाद देने का सही समय

गेहूं में पहली सिंचाई और खाद देने का सही समय, कई फसलों के लिए पूसा की नई फसल सलाह

पूसा, नई दिल्ली ने किसानों को गेहूं, सरसों, आलू, प्याज और सब्जियों की खेती को लेकर नई फसल सलाह दी है। गेहूं में समय पर पहली सिंचाई, खाद और खरपतवार नियंत्रण पर जोर दिया गया है। साथ ही रतुआ रोग, आलू-टमाटर में झुलसा, सब्जियों में कीट और गेंदा में रोग की नियमित निगरानी की सलाह दी गई है, ताकि किसान बेहतर और सुरक्षित उत्पादन पा सकें।

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पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं?

पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं? किसानों के लिए जरूरी सलाह

दिसंबर से जनवरी के बीच पाला और शीतलहर रबी फसलों के लिए बड़ा खतरा होती है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नमी बनाए रखें, संतुलित खाद का उपयोग करें, कीट-रोगों की निगरानी करें और पुआल या घास से मल्चिंग करें। गेहूं, सरसों, दलहन, सब्ज़ी, बागवानी फसलों और पशुओं को ठंड से बचाने के लिए समय पर सिंचाई, उचित दवा और वैज्ञानिक सलाह लेकर ही उपाय अपनाने की जरूरत है।

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रबी फसलों

रबी फसलों की बुवाई तेज, आंकड़े पिछले साल से आगे

रबी सीजन में बुवाई तेजी से बढ़ रही है और अब तक 479 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बोई जा चुकी है, जो पिछले साल से अधिक है। इस बार गेहूं, सरसों, धान और मक्का की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि मसूर का क्षेत्र थोड़ा कम हुआ है। सरकार ने इस सीजन के लिए खाद्यान्न और तेलहन उत्पादन का बड़ा लक्ष्य रखा है। जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से कम है, लेकिन हाल की बारिश से स्थिति बेहतर हुई है और उम्मीद है कि लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

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यूपी सरकार

किसानों को समय पर बुवाई के लिए यूपी सरकार दे रही है बीज पर सब्सिडी

उत्तर प्रदेश सरकार रबी सीजन में किसानों को सही समय पर बुवाई कराने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि लेट बुवाई से गेहूं का उत्पादन घटता है, इसलिए समय पर बुवाई बेहद जरूरी है। सरकार किसानों से 30 नवंबर 2025 से पहले बीज लेने की अपील कर रही है।

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HD 3388

HD 3388: गर्मी में भी खूब पैदावार देने वाली नई गेहूं किस्म

ICAR-IARI की नई गेहूं किस्म HD 3388 (पूसा यशोधरा) गर्मी सहन करने में सक्षम है और पूर्वी भारत के किसानों के लिए खास उपयोगी है। इसकी पैदावार 52–68 क्विंटल/हेक्टेयर तक होती है और यह सिर्फ 125 दिनों में तैयार हो जाती है। यह रतुआ जैसे रोगों से सुरक्षित रहती है और अच्छी क्वालिटी की रोटियां देती है। इसका बीज पूसा, NSC वेबसाइट और बीज विक्रेताओं पर उपलब्ध है।

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उर्वरकों पर सरकार ने बढ़ाई सब्सिडी

रबी सीजन 2025-26 के लिए उर्वरकों पर सरकार ने बढ़ाई सब्सिडी

केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2025–26 के लिए फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) दरों को मंजूरी दी है। यह योजना 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी और इस पर लगभग ₹37,952 करोड़ खर्च होंगे। सरकार का उद्देश्य किसानों को डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरक सस्ती दरों पर उपलब्ध कराना है ताकि खेती की लागत कम हो सके। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद यह सब्सिडी किसानों को राहत देने का काम करेगी।

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रबी सीजन 2026-27

रबी सीजन 2026-27: सरकार ने बढ़ाई MSP, किसानों को मिलेगा ज्यादा दाम

कैबिनेट ने रबी सीजन 2026-27 के लिए एमएसपी बढ़ा दिए हैं। कुसुम में 600 रुपये और मसूर में 300 रुपये प्रति क्विंटल की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। गेहूँ 2,585, जौ 2,150, चना 5,875, मसूर 7,000, सरसों 6,200 और कुसुम 6,540 रुपये प्रति क्विंटल तय किए गए हैं। इससे किसानों को लागत पर बेहतर मुनाफा मिलेगा।

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fertilizer

रबी सीजन में खाद की बढ़ी मांग, सरकार के सामने चुनौती

रबी सीजन में खाद की मांग 4% बढ़कर 37.87 मिलियन टन रहने का अनुमान है। इसमें यूरिया 19.61, डीएपी 5.34, एमओपी 1.57, कॉम्प्लेक्स 8.24 और एसएसपी 3.12 मिलियन टन की जरूरत होगी। पिछले साल की तुलना में यह मांग ज्यादा है। सरकार के पास अभी 3.25 मिलियन टन यूरिया स्टॉक है और अक्टूबर तक 2 मिलियन टन आयात की उम्मीद है।

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