दलहन आत्मनिर्भरता मिशन

‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ से बढ़ेगी देश की दाल उत्पादन क्षमता

प्रधानमंत्री मोदी 11 अक्टूबर को ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की शुरुआत करेंगे। इसका लक्ष्य तुअर, उड़द और मसूर जैसी दालों का उत्पादन बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाना है। योजना में किसानों से MSP पर 100% खरीद, क्षेत्रफल विस्तार और उत्पादकता बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।

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NITI Aayog

NITI Aayog का प्लान: 2030 तक दालों में आत्मनिर्भर और 2047 तक दोगुना उत्पादन

नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2030 तक दालों में आत्मनिर्भर और 2047 तक उत्पादन दोगुना कर सकता है।2022 में 26.06 मिलियन टन उत्पादन हुआ था, जो 2030 तक 34.45 और 2047 तक 51.57 मिलियन टन पहुँच सकता है।इसके लिए क्लस्टर आधारित खेती, उच्च गुणवत्ता वाले बीज, तकनीक और जलवायु अनुकूलन पर जोर दिया गया है। 2030 तक 3.79 मिलियन टन और 2047 तक 16.48 मिलियन टन अधिशेष दाल उपलब्ध होने की संभावना है।

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अरहर की फसल

अरहर की फसल को स्टरलिटी मोजेक रोग से बचा सकेंगे किसान, कृषि वैज्ञानिकों ने खोजा नया जीन

भारत में अरहर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। दुनिया का लगभग 80 प्रतिशत अरहर उत्पादन भारत में ही होता है। प्रोटीन, खनिज, कार्बोहाइड्रेट, लोहा, कैल्शियम आदि पोषक तत्वों से भरपूर अरहर को दालों का राजा भी कहते हैं।

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भारत सरकार

कीमतों में गिरावट के बीच किसानों ने भारत सरकार से दालों के आयात पर रोक लगाने का किया आग्रह

विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद, भारत बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है। भारतीय बाजारों में दालों का आयात लगातार बढ़ रहा है क्योंकि सरकार ने मार्च 2026 तक अरहर, पीली मटर और उड़द के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दे दी है।

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भारत

भारत का दाल उत्पादन 2034 तक 80 लाख टन बढ़ सकता है: रिपोर्ट

OECD-FAO एग्रीकल्चर आउटलुक 2025–2034 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगले 10 वर्षों में भारत में दालों का उत्पादन लगभग 80 लाख टन बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल भारत में हर साल 25.2 लाख टन से ज्यादा दालों का उत्पादन होता है, जो 2034 तक तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

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कृषि मंत्रालय

2023-24 में खाद्य तेलों की घरेलू मांग में आयात का हिस्सा 56% होगा: कृषि मंत्रालय

सरकार ने संसदीय समिति को बताया है कि पिछले 10 वर्षों में। दालों और  खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन एक दशक पहले की तुलना में अधिक गति से बढ़ा है। यह बात सांसदों द्वारा मांग को पूरा करने के लिए आयात पर भारत की निर्भरता पर उठाई गई चिंता के बीच कही गई है।

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दाल

दाल की खेती के कितने फायदे?

आप जानकर हैरान होंगे कि वित्त वर्ष 2024 में भारत का दाल आयात 84% बढ़कर छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।आपको बता दें कि भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का 25%), उपभोक्ता (विश्व खपत का 27%), तथा आयातक (दालों का 14%) है।

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पीएम-आशा

किसानों से तुअर की 100% खरीद की जाएगी, सरकार ने पीएम-आशा योजना को 2025-26 तक जारी रखने की दी मंजूरी

भारत सरकार ने एकीकृत प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना को 15वें वित्त आयोग चक्र के दौरान 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी। एकीकृत पीएम-आशा योजना किसानों से आसानी से दालों की खरीद की जाये इसके लिए संचालित की जाती है, जो न केवल किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य देने में मदद करेगी बल्कि उपभोक्ताओं के लिए सस्ती कीमतों पर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करके आवश्यक वस्तुओं की कीमत में अस्थिरता को भी नियंत्रित करेगी।

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पल्स मिशन

केंद्र सरकार का ‘Pulse Mission’ पंजाब के किसानों के लिए कैसे महत्वपूर्ण हो सकता है?

पंजाब लंबे समय से गेहूं और धान की खेती पर निर्भर रहा है, जिससे कई समस्याएं पैदा हुई हैं। इनमें भूजल का अत्यधिक दोहन, मिट्टी का गिरता स्वास्थ्य, पर्यावरणीय गिरावट और कृषि आय में गिरावट शामिल है। इसीलिए राज्य को वर्तमान में कृषि विविधीकरण की आवश्यकता है। Pulse Mission पंजाब को ऐसा करने में मदद कर सकता है।

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PULSES

2024 के दौरान दालों का इम्पोर्ट दोगुना होकर रिकॉर्ड 66.33 लाख टन पहुँचा

भारत में दाल की खेती प्रमुखता से की जाती है. दालें हमारे आहार का अहम हिस्सा हैं इसलिए बाज़ार में मांग हमेशा बनी रहती है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक़ भारत विश्व में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का 25%), उपभोक्ता (विश्व खपत का 27%) और आयातक (14%) है. खबर है कि भारत का दाल आयात कैलेंडर वर्ष 2024 के दौरान लगभग दोगुना होकर रिकॉर्ड 66.33 लाख टन हो गया है. यह आयात शुल्क मुक्त करने के सरकार के कदम के बाद हुआ है, ताकि आपूर्ति को बढ़ावा दिया जा सके और वर्ष के दौरान घरेलू उत्पादन में कमी के कारण कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके.

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