देश में रबी फसलों का कुल रकबा 2.8% बढ़ा

देश में रबी फसलों का कुल रकबा 2.8% बढ़ा, अब पैदावार मौसम पर निर्भर

देश में रबी फसलों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है और कुल रकबा 652.33 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से 2.8% ज्यादा है। गेहूं, चना, मसूर और सरसों की बुआई पूरी हो चुकी है और अब पैदावार आगे के मौसम पर निर्भर करेगी। दालों, सरसों, मक्का और जौ के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि ज्वार के रकबे में गिरावट आई है।

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रबी फसलों

रबी फसलों की बुवाई तेज, आंकड़े पिछले साल से आगे

रबी सीजन में बुवाई तेजी से बढ़ रही है और अब तक 479 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बोई जा चुकी है, जो पिछले साल से अधिक है। इस बार गेहूं, सरसों, धान और मक्का की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि मसूर का क्षेत्र थोड़ा कम हुआ है। सरकार ने इस सीजन के लिए खाद्यान्न और तेलहन उत्पादन का बड़ा लक्ष्य रखा है। जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से कम है, लेकिन हाल की बारिश से स्थिति बेहतर हुई है और उम्मीद है कि लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

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रबी सीजन 2025-26

रबी सीजन 2025-26: बुवाई में जबरदस्त तेजी, किसानों में उत्साह

रबी सीजन 2025-26 में बुवाई पिछले साल से 27% ज्यादा हुई है। अब तक 130.32 लाख हेक्टेयर में फसलें बोई जा चुकी हैं।
सबसे ज्यादा बढ़त गेहूं, दलहन और तिलहन में रही है।किसानों का रुझान इन फसलों की ओर बढ़ा है और उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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ICAR का ‘शटपदा टर्मिनेटर'

दलहनी फसलों के लिए नई ढाल, ICAR का ‘शटपदा टर्मिनेटर’

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने “शटपदा टर्मिनेटर” नाम का एक नया ईको-फ्रेंडली बायोपेस्टिसाइड विकसित किया है, जो Helicoverpa armigera जैसे कीटों से चना, अरहर और अन्य दलहनी फसलों की रक्षा करता है। यह Bacillus thuringiensis var. kurstaki से बना है, इसलिए पर्यावरण के लिए सुरक्षित है। दलहनी फसलों को कीटों से बचाने के लिए…

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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ सीजन 2025–26 के लिए महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों में दलहन-तिलहन की बड़ी खरीद योजनाओं की मंजूरी दे दी है।

खरीफ 2025–26 के लिए दलहन-तिलहन की बड़ी खरीद योजनाओं को मंजूरी

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ सीजन 2025–26 के लिए महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों में दलहन-तिलहन की बड़ी खरीद योजनाओं की मंजूरी दे दी है। तेलंगाना के किसानों के लिए मूंग, उड़द 100% और सोयाबीन खरीद की स्वीकृति, ओडिशा को अरहर की 100% खरीद और महाराष्ट्र में मूंग, उड़द 100%, सोयाबीन की सबसे बड़ी…

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MSP से नीचे बिक रही खरीफ की दालें और तिलहन

MSP से नीचे बिक रही खरीफ की दालें और तिलहन, किसानों की बढ़ी चिंता

खरीफ सीजन 2025-26 की दालें और तिलहन इस बार MSP से काफी कम दामों पर बिक रहे हैं। मूंग, उड़द और तूर औसतन 1,500–1,700 रुपये प्रति क्विंटल तक सस्ते हैं, वहीं मूंगफली और सोयाबीन भी MSP से नीचे बिक रहे हैं। कीमतें गिरने की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार और सस्ते आयात को माना जा रहा है। कर्नाटक और तेलंगाना ने सरकार से तुरंत खरीद शुरू करने और मात्रा सीमा खत्म करने की मांग की है।

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यूपी

यूपी में तिलहन और दलहन के रकबे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, जानिए सोयाबीन, अरहर और मक्का का रकबा कितना बढ़ा?

उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान तिलहन और दलहन की खेती में तेजी देखी जा रही है। तिल, मूंगफली और सोयाबीन के रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें तिल की खेती में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है। अरहर किसानों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है, जबकि धान, मक्का और कपास की खेती में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिससे खरीफ फसल के कुल रकबे में वृद्धि हुई है।

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दाल

दाल की खेती के कितने फायदे?

आप जानकर हैरान होंगे कि वित्त वर्ष 2024 में भारत का दाल आयात 84% बढ़कर छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।आपको बता दें कि भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का 25%), उपभोक्ता (विश्व खपत का 27%), तथा आयातक (दालों का 14%) है।

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यूपी

यूपी में बढ़ रहा दलहन-तिलहन का उत्पादन, जानिए अभी जरूरत का कितना फीसदी हो रहा उत्पादन

केंद्र व राज्य सरकारें देश को दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए इसकी खेती को बढ़ावा दे रही हैं। केंद्र सरकार ने तो किसानों से वादा भी किया है कि सरकार उनकी उपज को सौ प्रतिशत MSP पर ख़रीदेगी। दलहन हम जितना उगते हैं उससे ज़्यादा खाते हैं, इसीलिए दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है। लेकिन यूपी में दलहन-तिलहन के उत्पादन में सुधार देखने को मिला है। प्रदेश सरकार के कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले आठ साल में दलहन के उत्पादन में करीब ढाई गुना की वृद्धि हुई है।

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देश में दालों के स्टॉक में भारी गिरावट, महंगाई बढ़ने की आशंका

देश में दालों के स्टॉक में भारी गिरावट आई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पिछले दो सालों में दालों की कीमतें समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक रही, जिसके कारण सरकारी संस्थाओं ने दालों की खरीदारी नहीं की। वहीं, दालों का बंपर स्टॉक 35 लाख टन होना चाहिए था, लेकिन अब…

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