उर्वरकों में आत्मनिर्भरता नहीं

उर्वरकों में आत्मनिर्भरता नहीं, संतुलित इस्तेमाल ही असली रास्ता: अर्थशास्त्री गुलाटी

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए रासायनिक उर्वरकों में आत्मनिर्भर होना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि यूरिया, डीएपी और पोटाश के लिए देश आयात पर निर्भर है। प्रो. अशोक गुलाटी ने उर्वरकों के संतुलित और कुशल उपयोग पर ज़ोर देते हुए यूरिया-प्रधान सब्सिडी नीति में सुधार की जरूरत बताई। नीति आयोग के रमेश चंद ने हर जगह 4:2:1 एनपीके अनुपात लागू करने को अवैज्ञानिक बताया।

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बेहतर उत्पादन के लिए कब करना चाहिए गेहूं में NPK स्प्रे

टाइमिंग और मात्रा का खेल: बेहतर उत्पादन के लिए कब करना चाहिए गेहूं में NPK स्प्रे?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल में सही समय और सही मात्रा में NPK स्प्रे करने से पैदावार और दाने की गुणवत्ता दोनों बढ़ती है। फुटाव, बूट और दूधिया अवस्था—इन तीन अहम चरणों पर अलग-अलग NPK का छिड़काव करने से कल्ले बढ़ते हैं, बालियां मजबूत बनती हैं और दाने मोटे व वजनदार होते हैं। सही समय, उचित पानी और सावधानियों के साथ किया गया स्प्रे बेहतर उत्पादन की कुंजी है।

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यूरिया बिक्री में 20% की बढ़ोतरी

दिसंबर में खाद की खपत का बदला रुख: DAP की बिक्री घटी, यूरिया बिक्री में 20% की बढ़ोतरी

ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में DAP की बिक्री घटी, जबकि यूरिया की बिक्री में करीब 20 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कॉम्प्लेक्स खाद की बिक्री में मामूली बढ़त हुई है। सरकार का कहना है कि सभी प्रमुख खादों की उपलब्धता पर्याप्त है और पूरे महीने की मांग पूरी करने के लिए स्टॉक मौजूद है।

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हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों को बड़ा झटका, NPK खाद की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी

हिमाचल में बहु-आयामी मात्रा में सेब की खेती की जाती है। ऐसे में सेब के नए सीजन की शुरुआत में खाद के रेट बढ़ने से किसानों को बड़ा झटका लगा है। हिमफेड ने NPK (12-32-16) खाद की कीमतों में 250 रुपये की बढ़ोतरी की है। अब 50 किलो की बोरी की कीमत 1470 रुपये से…

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