खाद सब्सिडी होगी पूरी तरह डिजिटल

खाद सब्सिडी होगी पूरी तरह डिजिटल, ई-बिल सिस्टम लॉन्च

केंद्र सरकार ने खाद सब्सिडी को तेज़ और पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत ई-बिल सिस्टम शुरू किया है, जिससे करीब ₹2 लाख करोड़ की सब्सिडी पूरी तरह डिजिटल तरीके से प्रोसेस होगी। इससे कागज़ी काम खत्म होगा, भुगतान में तेजी आएगी और हर लेनदेन पर बेहतर निगरानी व पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

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MEP 31 मार्च 2026 तक बढ़ा

शहद निर्यात को राहत: MEP 31 मार्च 2026 तक बढ़ा

सरकार ने प्राकृतिक शहद के निर्यात पर 1,400 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) अब 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है, ताकि भारतीय शहद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिल सके। भारत दुनिया के बड़े शहद उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है और अमेरिका, यूएई व सऊदी अरब जैसे देशों में शहद भेजता है। साथ ही सरकार राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन के जरिए मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर काम कर रही है।

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नासिक

सरकारी नीतियों से प्याज किसानों को नुकसान, एसोसिएशन का आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र स्टेट अनियन ग्रोअर्स फार्मर्स एसोसिएशन के फाउंडर प्रेसिडेंट भारत दिघोले ने आरोप लगाया है कि मार्केट में केंद्र के दखल की वजह से पूरे भारत में प्याज उगाने वालों को 2025 में भारी आर्थ‍िक नुकसान हुआ है। एसोसिएशन ने 2025 में हुए नुकसान के लिए किसानों को डायरेक्ट सब्सिडी के जरिए मुआवजा देने…

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साल 2025

साल 2025 में खेती-किसानी का नया दौर: e-NAM, KCC सीमा, फसल बीमा में सुरक्षा समेत कई बड़े बदलाव

साल 2025 में खेती-किसानी तकनीक, डिजिटल बाजार और सरकारी समर्थन के नए दौर में पहुँची है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, बढ़ी हुई KCC सीमा, मजबूत फसल बीमा, e-NAM से राष्ट्रीय बाजार तक पहुँच और PM-KISAN में Farmer ID व e-KYC जैसे बदलावों से किसानों को बेहतर जानकारी, आसान कर्ज, सुरक्षित फसल, पारदर्शी दाम और सीधी आर्थिक मदद मिल रही है, जिससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन रही है।

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UPSAC

लखनऊ में हुई UPSAC की पहली बोर्ड बैठक, क्षेत्र-विशेष कृषि योजनाओं पर जोर

UPSAC ने उत्तर प्रदेश सरकार से इलाके के अनुसार ठोस तथ्यों पर आधारित कृषि योजनाएँ लागू करने और सफल मॉडल्स को बड़े पैमाने पर अपनाने की सिफारिश की है। परिषद का उद्देश्य टिकाऊ खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाना और कृषि विकास को मजबूत करना है।

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APEDA

ऑर्गेनिक चीनी के निर्यात को मंजूरी, APEDA के नियमों के तहत होगा निर्यात

सरकार ने ऑर्गेनिक चीनी के निर्यात को मंज़ूरी दे दी है।हर वित्तीय वर्ष में 50,000 टन तक निर्यात किया जा सकेगा, जो APEDA के नियमों के तहत होगा।

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HD 3388

दाल और त‍िलहन का रकबा बढ़ा, लेक‍िन गेहूं स्‍थ‍िर

रबी सीजन 2024-25 में दालों और त‍िलहन का रकबा प‍िछले सीजन की तुलना में थोड़ा बढ़ा है। लेक‍िन गेहूं की बुवाई 32.26 मिलियन हेक्टेयर पर स्थिर है। एक साल पहले गेहूं का रकबा 32.24 मिलियन था। 2023-24 रबी सीजन में गेहूं का कुल रकबा 32.8 मिलियन हेक्टेयर था। गेहूं और दूसरी रबी फसलों की बुआई…

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पीलीभीत

पीलीभीत बनेगा बासमती अनुसंधान और निर्यात का नया हब

पीलीभीत में एपीडा द्वारा देश का दूसरा बासमती बीज उत्पादन और प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा। यह केंद्र किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक खेती और जैविक कृषि का प्रशिक्षण देगा, जिससे बासमती की गुणवत्ता, निर्यात और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

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कपास योजना

₹6,000 करोड़ की कपास योजना को अब भी कैबिनेट मंजूरी का इंतज़ार, घटता रकबा और पैदावार बनी बड़ी चुनौती

केंद्र सरकार की ₹6,000 करोड़ की कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन योजना को अभी कैबिनेट मंजूरी नहीं मिली है। योजना में फंड बंटवारे को लेकर विवाद है, क्योंकि कपड़ा मंत्रालय को 22% हिस्सा मिल रहा है, जबकि कपास की रिसर्च की जिम्मेदारी संभालने वाले ICAR को 10% से भी कम फंड मिल सकता है। इस बीच देश में कपास उत्पादन और रकबा लगातार घट रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और पैदावार सुधारने के लिए रिसर्च, बेहतर किस्मों और किसानों का भरोसा मजबूत करना जरूरी है।

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IFFCO का नया प्राकृतिक उत्पाद ‘धर्मामृत’ लॉन्च

IFFCO का नया प्राकृतिक उत्पाद ‘धर्मामृत’ लॉन्च, नैनो उर्वरकों के साथ टिकाऊ खेती पर फोकस

IFFCO ने बेंगलुरु में धर्मामृत नाम का नया प्राकृतिक सीवीड आधारित उत्पाद लॉन्च किया है। यह अमीनो एसिड और एल्जिनिक एसिड से युक्त है, जो फसलों की बढ़वार, पोषक तत्वों के अवशोषण और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करता है। नैनो उर्वरकों के साथ इसका उपयोग कम लागत में बेहतर उत्पादन और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देगा।

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