Green step at Bhopal International Airport, electrifying with solar energy
The panels setup are capable of producing approximately 1.5 Lakh units of electricity per year, leading to a reduction of 106 metric tons of carbon dioxide emissions annually
The panels setup are capable of producing approximately 1.5 Lakh units of electricity per year, leading to a reduction of 106 metric tons of carbon dioxide emissions annually
दुनियभर में फिग यानि अंजीर की 20 से ज्यादा किस्में खाने योग्य हैं। भारत में, कोंड्रिया, तिमला,चालिसगांव, फिग डायना, पूना फिग और फिग दिनकर काफी प्रचलित हैं। पूना फिग को महाराष्ट्र क्षेत्र के लिए उपयुक्त बताया जाता है।
महाराष्ट्र का ये युवा किसान अपने खेतों में प्रति एकड़ 1000 कुंटल से ज्यादा गन्ना पैदा करता ही है और यही तकनीकी दूसरे किसानों को सिखाता भी है। महाराष्ट्र और भारत के दूसरे राज्य ही नहीं, नेपाल तक के किसान उनसे ज्यादा गन्ना पैदा करने के लिए ट्रेनिंग लेने आते हैं।
खेत में पानी भर जाने पर इंजन लगाकर पानी को खेत से बाहर निकालते हैं पर उसमें भी समय और पैसा लगता है और फसल को नुकसान तो हो ही चुका होता है। जलभराव की इन समस्याओं को एक सिस्टम लगाकर खत्म किया जा सकता हैं।
बढ़ती गर्मी से हमारा शरीर परेशान हो जाता है, शरीर का तापमान सही बना रहे, ज्यादा पसीना न निकले इसके लिए हम पंखा, कूलर, ऐसी इन सबका इस्तेमाल करते हैं, पर क्या इससे आपके शरीर को अंदर से सच में राहत मिल जाती है, क्या सच में शरीर में ताजगी आ जाती है?
किसान भाइयों अनार का पौधा एक बार लगाने पर 25 साल तक फल देता है। यानि इसकी खेती में पहले साल लागत आती है, उसके बाद मुनाफा ही मुनाफा।
अनार का पौधा 2 से 4 साल में फल देने लगता है। इसके फल 120 से 180 दिन में तैयार होते है।
फेरीवाले से बढ़कर आज बैजनाथ प्रजापति ने निजामाबाद मार्केट में अपना एक शोरूम खोल लिया है। सरकार की एक पहल ODOP (one district one product) के तहत उनका मिट्टी के बर्तन का काम और बढ़ गया।
14201, 13235, 15023 के साथ ही C0-118, C0-238, कोसा 8272, कोसा 13231, 15207, 15466 समेत कई उन्नतशील किस्मों की बुवाई करते हैं हिंमाशु नाथ सिंह
गन्ना किसानों के अगले 45-60 दिन हैं महत्वपूर्ण, 15 मार्च से मई तक बोरर कीटों से गन्ने की फसल को कैसे बचाएं?
इस साल फसल का जितना नुकसान जनवरी-फरवरी में हुआ, वो 2022 में जनवरी-फरवरी में हुए फसल के नुकसान से 13 गुना ज्यादा है।