पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहेगा चाय कारोबार

पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहेगा चाय कारोबार, दिसंबर की तुड़ाई से बढ़ेगा चाय उत्पादन

भारत के चाय उद्योग के लिए 2025 अच्छा साल रहने की उम्मीद है। इस साल चाय का उत्पादन पिछले साल से थोड़ा ज्यादा रह सकता है, जबकि निर्यात में 15–20 मिलियन किलो तक बढ़ोतरी की संभावना है। दिसंबर में तुड़ाई जारी रहने और ईरान, इराक व चीन को ज्यादा निर्यात से उद्योग को फायदा मिल रहा है।

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जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए बड़ी राहत, SKUAST ने जारी की 16 नई उन्नत फसल किस्में

SKUAST ने जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए मक्का, गेहूं, चावल, दालें, सेब, जई और तिलहन की 16 नई जलवायु-अनुकूल और अधिक पैदावार देने वाली किस्में जारी की हैं। ये किस्में ठंडे मौसम और बदलते जलवायु हालात को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं, जिससे उत्पादन, पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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यूपी में खाद की कालाबाजारी पर सख्त एक्शन

यूपी में खाद की कालाबाजारी पर सख्त एक्शन, जिला कृषि अधिकारी निलंबित

उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद की कालाबाजारी पर सख्ती बढ़ा दी है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के अनुसार प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और 130 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा उर्वरक उपलब्ध है। कालाबाजारी और लापरवाही पर सिद्धार्थनगर के जिला कृषि अधिकारी को निलंबित किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नकली खाद और तस्करी करने वालों पर NSA तक की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी

ठंड बढ़ते ही रबी फसलों के लिए अलर्ट, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी

बिहार में बढ़ती ठंड को देखते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने दिसंबर के लिए किसानों को एडवाइजरी जारी की है। वैज्ञानिकों ने गेहूं की बुआई 25 दिसंबर तक पूरी करने, राई और मक्का में सही दूरी व संतुलित खाद देने की सलाह दी है। सब्जियों, खासकर टमाटर में कीटों पर निगरानी रखने और समय पर नियंत्रण करने को कहा गया है।

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सर्दियों में गन्ने की धीमी बढ़वार

सर्दियों में गन्ने की धीमी बढ़वार: घबराने की ज़रूरत नहीं, जानिए क्या कहते हैं वैज्ञानिक ?

सर्दियों में गन्ने की बढ़वार कम होना सामान्य है, इसे रोग या खाद की कमी न समझें। IISR के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एपी द्विवेदी के अनुसार दिसंबर–जनवरी में खाद डालने की जरूरत नहीं होती, बस हल्की सिंचाई करते रहें। तापमान बढ़ते ही जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में गन्ने की बढ़वार फिर तेज हो जाती है।

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MSP पर CCI की रिकॉर्ड कपास खरीद

MSP पर CCI की रिकॉर्ड कपास खरीद, तेलंगाना और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा

2025–26 सीजन में कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अब तक 50 लाख बेल कपास MSP पर खरीदी है, जो पिछले साल से 60% ज्यादा है। इससे कपास के दामों को सहारा मिला है और किसान बाजार के बजाय CCI को कपास बेच रहे हैं। कम रकबा और खराब मौसम के कारण इस साल कपास उत्पादन थोड़ा घटने का अनुमान है।

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किसान सम्मेलन

किसानों के लिए नया बीज कानून जल्द, किसान सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान

राजस्थान के नागौर में किसान सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हित में नए बीज कानून और पेस्टीसाइड एक्ट लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे नकली बीज बेचने वालों पर रोक लगेगी। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब 15 हजार रुपये मासिक आय और दुपहिया वाहन रखने वालों को भी घर मिलेगा।

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25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र लाने की तैयारी

महाराष्ट्र में प्राकृतिक खेती को नई रफ्तार, 25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र लाने की तैयारी

महाराष्ट्र सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि अगले दो साल में 25 लाख हेक्टेयर जमीन को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जाएगा। इससे खेती की लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और किसानों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलेगी।

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सरसों की बुवाई में 4.3% की बढ़ोतरी

सरसों की बुवाई में 4.3% की बढ़ोतरी, राजस्थान से यूपी तक सरसों की फसल ने पकड़ी रफ्तार

देश में इस साल सरसों की खेती का रकबा बढ़ा है। 15 दिसंबर 2025 तक बुवाई करीब 84.67 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल से 4.3% ज्यादा है। राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ज्यादातर राज्यों में फसल की हालत सामान्य है, कीटों का असर कम है और अनुकूल मौसम से फसल की बढ़वार अच्छी बनी हुई है।

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5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर

5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर: फसल कैलेंडर और स्मार्ट मार्केटिंग से बदली खेती की तस्वीर

चंदौली के युवा किसान अनिल मौर्य ने सिर्फ 5 बिस्वा से शुरुआत कर आज 50 बीघा में आधुनिक खेती का सफल मॉडल खड़ा किया है। बागवानी, ड्रिप सिंचाई, स्मार्ट मार्केटिंग और फसल कैलेंडर के जरिए उन्होंने नई फसलों को अपनाया और बेहतर दाम हासिल किए। कई असफलताओं के बाद भी हार न मानने वाले अनिल मौर्य आज किसानों के लिए प्रेरणा और सीख का केंद्र बन चुके हैं।

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