SAP पर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी मंजूर

पंजाब में गन्ना किसानों को बड़ी राहत, SAP पर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी मंजूर

पंजाब मंत्रिमंडल ने गन्ना किसानों के लिए एसएपी पर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सीधी सब्सिडी को मंजूरी दी है, जिससे राज्य देश में गन्ने की सबसे ऊंची कीमत देने वाला बन गया है। इसके साथ ही, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के साथ मिलकर बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने का फैसला किया है, ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सके।

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मिथिला मखाना

कृषि निर्यात में बिहार की बड़ी कामयाबी, मिथिला मखाना पहुंचा दुबई

बिहार से पहली बार जीआई-टैग मिथिला मखाना का समुद्री मार्ग से दुबई को निर्यात किया गया है। पूर्णिया जिले से भेजी गई 2 मीट्रिक टन की यह खेप कृषि निर्यात में ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे किसानों को बेहतर दाम, नए बाजार और बिहार की वैश्विक पहचान को मजबूती मिलेगी।

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25–27 फरवरी 2026 को IARI

25–27 फरवरी को IARI में लगेगा पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026, महिला किसानों पर विशेष फोकस

25–27 फरवरी 2026 को IARI, नई दिल्ली में पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 आयोजित होगा। मेला “विकसित कृषि – आत्मनिर्भर भारत” थीम पर और अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसमें नई कृषि तकनीक, योजनाएं, नवाचार, फसल प्रदर्शन और पूसा बीज उपलब्ध होंगे। सभी किसान और कृषि से जुड़े लोग यहाँ जा सकते हैं।

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10 साल में 26% बढ़ी बागवानी,

खेती में बदलाव की कहानी: 10 साल में 26% बढ़ी बागवानी, अनाज पीछे क्यों छूटा?

पिछले 10 सालों में देश में बागवानी फसलों का रकबा 26% बढ़ा है, जबकि अनाज की खेती की रफ्तार धीमी रही। बेहतर दाम, ज्यादा आमदनी और लोगों की बदलती खानपान आदतों के कारण किसान तेजी से फल और सब्ज़ियों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इससे खेती का रुझान अब उच्च मूल्य वाली फसलों की तरफ साफ दिखने लगा है।

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चीनी उत्पादन

चीनी उत्पादन में 22% की बढ़ोतरी, न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग क्यों कर रही है ISMA?

2025–26 सीजन में 15 जनवरी तक देश का चीनी उत्पादन 22% बढ़कर 1.59 करोड़ टन पहुँच गया है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, चीनी के दाम लागत से नीचे जाने और गन्ने की कीमतें बढ़ने से मिलों की हालत कमजोर हो रही है, जिससे किसानों को भुगतान में देरी का खतरा बढ़ गया है। ISMA ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) को बढ़ाने की मांग की है।

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देश में रबी फसलों का कुल रकबा 2.8% बढ़ा

देश में रबी फसलों का कुल रकबा 2.8% बढ़ा, अब पैदावार मौसम पर निर्भर

देश में रबी फसलों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है और कुल रकबा 652.33 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से 2.8% ज्यादा है। गेहूं, चना, मसूर और सरसों की बुआई पूरी हो चुकी है और अब पैदावार आगे के मौसम पर निर्भर करेगी। दालों, सरसों, मक्का और जौ के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि ज्वार के रकबे में गिरावट आई है।

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30% आयात शुल्क

अमेरिकी दालों पर 30% शुल्क, भारत–US ट्रेड डील पर बढ़ा तनाव

भारत ने अमेरिका से आने वाली दालों, खासकर पीली मटर पर 30% आयात शुल्क लगा दिया है। इससे अमेरिका के सांसदों और किसानों में नाराजगी है, क्योंकि भारत अमेरिकी दालों का बड़ा बाजार है। अमेरिका का कहना है कि इस फैसले से उनके किसानों को नुकसान होगा, जबकि भारत इसे घरेलू किसानों की सुरक्षा और दाम नियंत्रण के लिए जरूरी बता रहा है।

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सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को दी मंजूरी

घरेलू भंडार मजबूत, सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 2022 से लगे प्रतिबंध में आंशिक ढील देते हुए 5 लाख टन गेहूं उत्पादों (आटा, मैदा, सूजी) के निर्यात की अनुमति दी है। देश में रिकॉर्ड उत्पादन और पर्याप्त भंडार के बीच यह फैसला लिया गया है, जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारतीय ब्रांड्स के गेहूं उत्पाद मिल सकेंगे। हालांकि, निर्यात की समय-सीमा और मात्रा को लेकर उद्योग को अभी स्पष्टता का इंतजार है।

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हाथरस से बढ़ा निर्यात

यूपी का आलू बना वैश्विक ब्रांड, हाथरस से बढ़ा निर्यात

उत्तर प्रदेश का आलू, खासकर हाथरस जिले का आलू, अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से पहचान बना रहा है। बेहतर गुणवत्ता, और समय पर आपूर्ति के कारण इस साल हाथरस से आलू निर्यात में करीब 5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है और भारत के कुल आलू निर्यात में जिले की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत हो गई है।

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soil health

फसल से सेहत तक: क्यों भारत को अब मिट्टी बचाने की ज़रूरत है?

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में फसलों और लोगों के पोषण को बेहतर बनाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना बेहद ज़रूरी है। इसके लिए खाद की कीमतों में सुधार, ज़मीन और फसल के अनुसार सही खाद के इस्तेमाल और बेहतर खेती के तरीकों पर ज़ोर दिया गया है। रिपोर्ट बताती है कि देश में अनाज की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद बच्चों में कुपोषण बड़ी समस्या बना हुआ है, जिसका एक अहम कारण मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी है।

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