कर्नाटक में MIS योजना को मंजूरी

मक्का किसानों को राहत: कर्नाटक में MIS योजना को मंजूरी

मक्का की कीमतों में गिरावट से परेशान किसानों को राहत देने के लिए कर्नाटक सरकार ने 2025-26 खरीफ सीजन में मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) लागू की है। इसके तहत मक्का के लिए 2,150 रुपये प्रति क्विंटल की तय कीमत रखी गई है और कम दाम पर बेचने वाले किसानों को 250 रुपये प्रति क्विंटल तक मुआवजा मिलेगा। भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जाएगा।

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खाद के संतुलित उपयोग

खाद के संतुलित उपयोग और दुरुपयोग रोकने पर सरकार का फोकस

केंद्रीय उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार खाद के संतुलित उपयोग और गैर-कृषि कार्यों में उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठाएगी। चिंतन शिविर में उन्होंने बताया कि कठिन हालात के बावजूद किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई गई है। बैठक में नई पीढ़ी की खाद, आत्मनिर्भर उत्पादन, डिजिटल व्यवस्था और मिट्टी की सेहत सुधारने पर चर्चा हुई।

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25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में

ICAR की 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित कीं। ये किस्में अधिक उपज देने वाली, जलवायु-सहनशील और रोग-प्रतिरोधी हैं। उन्होंने बताया कि 1969 से अब तक 7205 फसल किस्मों को मंजूरी मिली है, जिनमें से 3236 पिछले 11 वर्षों में विकसित हुईं। मंत्री ने कहा कि भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर 150.18 मिलियन टन का रिकॉर्ड बनाया है और देश विश्व का ‘फूड बास्केट’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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ICAR ने क्या कहा?

IMD का अनुमान, जनवरी में सामान्य से ज़्यादा रहेगा तापमान, ICAR ने क्या कहा?

जनवरी-फरवरी 2026 में तापमान बढ़ने के अनुमान से गेहूं किसानों की चिंता बढ़ी है, लेकिन ICAR के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार असर सीमित रहेगा। अब ज्यादातर क्षेत्रों में गर्मी सहन करने वाली नई गेहूं किस्में बोई जा रही हैं और अगेती बुवाई से भी जोखिम कम हुआ है। बेहतर किस्मों और बढ़े बुवाई रकबे के चलते इस सीजन में भी अच्छे उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है।

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टमाटर के फल क्यों फट रहे हैं?

टमाटर के फल क्यों फट रहे हैं? बीमारी या पोषक तत्व की कमी — जानिए कृषि वैज्ञानिक से

टमाटर और शिमला मिर्च की फसल में फल फटना, पत्तियों का मुड़ना और फूल झड़ना रोग या कीट की वजह से नहीं, बल्कि मिट्टी में बोरान पोषक तत्व की कमी के कारण हो रहा है। किसान गलत इलाज पर पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि सही समय पर मिट्टी जांच और बोरान का संतुलित छिड़काव करने से फसल और बाजार भाव दोनों बचाए जा सकते हैं।

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कड़ाके की ठंड

देशभर में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का कहर, उत्तर भारत में अगले कई दिन शीतलहर का अलर्ट

देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा जारी है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों तक शीतलहर, कोहरा और गिरते तापमान का असर रहेगा, जिससे जनजीवन, यातायात और खेती प्रभावित हो सकती है। किसानों को फसलों को ठंड व पाले से बचाने और पशुपालकों को पशुओं की विशेष देखभाल की सलाह दी गई है।

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सहकारी मॉडल पर रहेगा IFFCO का फोकस

2026 में नैनो उर्वरक, कम लागत और सहकारी मॉडल पर रहेगा IFFCO का फोकस: के. जे. पटेल

IFFCO के एमडी के. जे. पटेल के अनुसार, वर्ष 2026 में इफको का फोकस नैनो उर्वरकों के विस्तार, खेती की लागत घटाने और सहकारी मॉडल को मजबूत करने पर रहेगा। 2025 में इफको ने रिकॉर्ड खाद उत्पादन किया और नैनो उर्वरकों को किसानों का अच्छा समर्थन मिला।

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नासिक

सरकारी नीतियों से प्याज किसानों को नुकसान, एसोसिएशन का आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र स्टेट अनियन ग्रोअर्स फार्मर्स एसोसिएशन के फाउंडर प्रेसिडेंट भारत दिघोले ने आरोप लगाया है कि मार्केट में केंद्र के दखल की वजह से पूरे भारत में प्याज उगाने वालों को 2025 में भारी आर्थ‍िक नुकसान हुआ है। एसोसिएशन ने 2025 में हुए नुकसान के लिए किसानों को डायरेक्ट सब्सिडी के जरिए मुआवजा देने…

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साल 2025

साल 2025 में खेती-किसानी का नया दौर: e-NAM, KCC सीमा, फसल बीमा में सुरक्षा समेत कई बड़े बदलाव

साल 2025 में खेती-किसानी तकनीक, डिजिटल बाजार और सरकारी समर्थन के नए दौर में पहुँची है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, बढ़ी हुई KCC सीमा, मजबूत फसल बीमा, e-NAM से राष्ट्रीय बाजार तक पहुँच और PM-KISAN में Farmer ID व e-KYC जैसे बदलावों से किसानों को बेहतर जानकारी, आसान कर्ज, सुरक्षित फसल, पारदर्शी दाम और सीधी आर्थिक मदद मिल रही है, जिससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन रही है।

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UPSAC

लखनऊ में हुई UPSAC की पहली बोर्ड बैठक, क्षेत्र-विशेष कृषि योजनाओं पर जोर

UPSAC ने उत्तर प्रदेश सरकार से इलाके के अनुसार ठोस तथ्यों पर आधारित कृषि योजनाएँ लागू करने और सफल मॉडल्स को बड़े पैमाने पर अपनाने की सिफारिश की है। परिषद का उद्देश्य टिकाऊ खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाना और कृषि विकास को मजबूत करना है।

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