यूपी के 132 गन्ना किसानों को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने किया सम्मानित
10 जून को लोक भवन में राज्य गन्ना उत्पादन प्रतियोगिता में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत 132 प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया
10 जून को लोक भवन में राज्य गन्ना उत्पादन प्रतियोगिता में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत 132 प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया
4 सितंबर 1972 को एक आम अनुसंधान केंद्र के रूप में प्रारम्भ किया गया था जिसे 1 जून 1984 को एक पूर्ण संस्थान का दर्जा मिला। शुरू में यहां केवल आम पर शोध होता था। लेकिन अब आम, अमरूद, आंवला, बेल, जामुन के साथ अन्य फलों और सब्जियों पर भी शोध हो रहा है।
“हमारे यहां गर्मी में तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है और इस फसल को पकने के लिए गर्मी का मौसम चाहिए तो मैनें रिस्क लेके 12 साल पहले पौधा लगा दिया”
230 रुपये दिन की दिहाडी है चाय के बागानों में काम करने वाले मजदूरों की।सरकार और बागान मालिक मिलकर इन श्रमिकों के लिए योजनाओं के तहत काम
भी करते हैं फिर भी मजदूर वर्ग है ना-खुश। न्यूज पोटली को इसके पीछे के तीन कारण मिलें पहली नेपाल, दूसरी जलवायु परिवर्तन और तीसरी पैदावार और क्वालिटी के मुताबिक रुपये नहीं मिल पाना।
उन्नति से जुड़े 400 से ज्यादा लोग हिमालय की शिवालिक पहाडियों से वन संपद्दा, जड़ी बूटियां और औषधियां आप तक पहुंचाते हैं। उन्नति के पास 32 हजार एकड़ का जैविक सर्टिफाइड जंगल है
गन्ना कृषकों की बढ़ रही उपज दृष्टिगत प्रति हेक्टेयर सट्टे की सीमा में की गयी बढ़ोत्तरी
फसल में कीट-पंतगों के अटैक से फसल बर्बाद हो रही, उसे रोकने के लिए किसान बाजार से तरह तरह के कीटनाशक का छिड़काव करता रहता हैं। इन सब से किसान की लागत में भी बढ़ोत्तरी आ रही है। किसान कीटनाशक के बजाय IPM पर इन्वेस्ट करे तो अपनी लागत में कमी ला सकता है।
दुनियभर में फिग यानि अंजीर की 20 से ज्यादा किस्में खाने योग्य हैं। भारत में, कोंड्रिया, तिमला,चालिसगांव, फिग डायना, पूना फिग और फिग दिनकर काफी प्रचलित हैं। पूना फिग को महाराष्ट्र क्षेत्र के लिए उपयुक्त बताया जाता है।
महाराष्ट्र का ये युवा किसान अपने खेतों में प्रति एकड़ 1000 कुंटल से ज्यादा गन्ना पैदा करता ही है और यही तकनीकी दूसरे किसानों को सिखाता भी है। महाराष्ट्र और भारत के दूसरे राज्य ही नहीं, नेपाल तक के किसान उनसे ज्यादा गन्ना पैदा करने के लिए ट्रेनिंग लेने आते हैं।
खेत में पानी भर जाने पर इंजन लगाकर पानी को खेत से बाहर निकालते हैं पर उसमें भी समय और पैसा लगता है और फसल को नुकसान तो हो ही चुका होता है। जलभराव की इन समस्याओं को एक सिस्टम लगाकर खत्म किया जा सकता हैं।