भारत एक कृषि प्रधान देश हैं और यहां की आधी से ज्यादा आबादी कृषि पर ही निर्भर है। पिछले कुछ सालों में एक तरफ जहां बड़ी तादाद में किसानों का खेती-किसानी से मोह भंग हुआ है

कृषि में कमाल करने वाले भारत के 10 राज्य

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं और यहां की आधी से ज्यादा आबादी कृषि पर ही निर्भर है। पिछले कुछ सालों में एक तरफ जहां बड़ी तादाद में किसानों का खेती-किसानी से मोह भंग हुआ है, तो दूसरी तरफ वो तादाद भी कम नहीं, जब पढ़े-लिखे युवाओं का रुझान इस तरफ बढ़ा है। कई नौजवान…

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जानकारों का मानना है कि अगर इस दिशा में ठीक तरीके से काम किया गया तो, एग्रेकल्चर सेक्टर को दोबारा बेहतर बनाया जा सकता है।

खेती-किसानी के भी अच्छे दिन आने वाले हैं?

किसानों की बेहतरी के लिए सरकारें तो अपने स्तर काम करती ही रहती हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में किसान भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। वो खेत-किसानी में नई टेक्नोलॉजी, नए तरीकों को अपना रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर इस दिशा में ठीक तरीके से काम किया गया तो,…

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कानपुर के वैज्ञानकों ने गेहूं की नई प्रजाति K-2010 तैयार की है। अगले साल से इसका बीज भी मिलना शुरू हो जाएगा। इस प्रजाति का गेहूं सिर्फ 125 दिनों में तैयार हो जाएगा।

गेहूं की नई प्रजाति K-2010, फसल 125 दिनों में तैयार होगी, पैदावार भी ज्यादा

गेहूं की बुवाई का मौसम है। अगर आप भी गेंहू की खेती करते हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। कानपुर के वैज्ञानिकों ने गेहूं की नई प्रजाति तैयार की है। इसका नाम K-2010 रखा गया है। ये प्रजाति कीट और रोगों से तो सुरक्षित रहेगी ही, साथ ही फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा।…

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अगर आप गन्ने की खेती के लिए बेहतरीन पौध तैयार करना चाहते हैं, तो STP (Space Transplanting Technique) विधि आपके लिए एक बेहतर विकल्प है।

STP विधि से गन्ने की नर्सरी कैसे तैयार करें?

देश की कृषि अर्थव्यवस्था में गन्ने का अहम योगदान है। देश के कुल गन्ना क्षेत्रफल का करीब फीसदी हिस्सा उत्तर भारत के राज्यों से आता है। इन राज्यों में उन्नत गन्ना किस्मों और उन्नत उत्पादन तकनीकों को अपनाकर गन्ने की उत्पादकता को बढ़ाया जाता है। अगर आप गन्ने की खेती के लिए बेहतरीन पौध तैयार…

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काले आलू की खेती से होगी बंपर कमाई

काले आलू की खेती: अच्छी पैदावार, बंपर कमाई

देश के एक बड़े हिस्से में आलू की सब्जी, लोगों की पहली पसंद है। भारत में एक बड़ी आबादी ऐसी है जिनके घर शायद ही कोई ऐसा दिन होता है, जब पूरे दिन में एक भी वक्त आलू की सब्जी नहीं बनती हो। इसके अलावा चिप्स और दूसरी तरह की डिश आलू से तैयार की…

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kabuli chana

डॉलर चना: बुआई से कमाई तक पूरी जानकारी

डॉलर चना जिसे देश के ज्यादातर हिस्सों में काबुली चने के नाम से जाना जाता है, अच्छा मुनाफा दिलाने वाली फसल मानी जाती है। डॉलर चने की तेजी से बढ़ रही डिमांड और बढ़िया कमाई की वजह से किसान भी अब बढ़-चढ़ इसकी खेती कर रहे हैं। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा राजस्थान और यूपी के…

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success story of pomegranate farmer nashik maharashtra

कुली से करोड़पति तक: महाराष्ट्र के अनार किसान की कहानी

ये केदार जाधव हैं, ग़रीब परिवार जन्मे केदार नाशिक के मालेगाँव में कुली का काम करते थे। इनके दूर रिश्तेदारी में एक शख़्स चीनी मिल में सीनियर अधिकारी था, परिवार की स्थिति देख जाधव उनसे काम माँगने गये। ये वो दौर था जब सरकारी नौकरियों में उतनी क़िल्लत नहीं थी, जाधव को भरोसा था एक…

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AGRICULTURE INFRASTRUCTURE

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्कीम के तहत किसान ले सकते हैं 2 करोड़ रुपये तक का लोन, ऐसे करें अप्लाई

सरकार देश में एग्रीकल्चर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को बेहतर बनाने और किसानों की आर्थिक मदद के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्कीम चलाती है। इसके तहत सरकार मशरुम की खेती, हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग, वर्टिकल फार्मिंग, एयरोपोनिक्स फार्मिंग, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स, वेयरहाउस, पैकेजिंग यूनिट बनवाने के लिए किसानों को 2 करोड़ रुपये तक का लोन देती है। इस स्कीम के तहत किसान या किसान संगठन इंटरेस्ट में 03% तक की छूट के साथ अधिकतम 7 साल तक के लिए लोन ले सकते हैं।



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सरसों उत्पादन में राजस्थान टॉप पर, अच्छी उपज के लिए सही किस्म का चयन और खेत की तैयारी महत्वपूर्ण

भारत में सरसों का उत्पादन लगभग सभी राज्यों में होता है, लेकिन उनमें राजस्थान टॉप पर है, जबकि राजस्थान सहित पांच राज्य ऐसे हैं, जहां भारत का कुल 88 प्रतिशत सरसों का उत्पादन होता है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने किसानों को बुवाई से पहले सही किस्मों का चयन और खेत की तैयारी के लिए सलाह दी है।

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उत्तर प्रदेश में सस्टेनेबल कोल्ड चेन डेवलपमेंट पर केंद्रित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन, किसानों को होगा इससे लाभ

उत्तर प्रदेश में सतत कोल्ड चेन विकास पर केंद्रित एक दिवसीय कार्यशाला 22 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित की गई, जिसमें नीति निर्माताओं, कृषि विशेषज्ञों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र के लोगों को एक साथ लाया गया। इस आयोजन का उद्देश्य छोटे किसानों की जरूरतों को पूरा करने पर विशेष जोर देने के साथ राज्य में ऊर्जा-कुशल, रिन्यूएबल और लो-जीडब्ल्यूपी (ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल) कोल्ड-चेन बुनियादी ढांचे को अपनाने में तेजी लाना है।

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