ग्रीष्मकालीन जुताई

ग्रीष्मकालीन जुताई कब करें? मानसून आने से पहले किसान कर लें ये काम, बढ़ेगी पैदावार

बेहतर उत्पादन के लिए खेत की जुताई एक महत्वपूर्ण क्रिया है। तेज धूप में गहरी जुताई करने से मिट्टी में पाए जाने वाले हानिकारक जीवाणु खत्म हो जाते हैं. ग्रीष्मकालीन जुताई मई-जून के दौरान मानसून आने से पहले की जाती है. ग्रीष्मकालीन जुताई कम लागत में गुणवत्तायुक्त उत्पादन में सहायक है. इसलिए किसान अपने खेतों की जुताई मानसून से पहले कर लें. इससे आगामी फसल की बेहतर पैदावार होगी. इसको लेकर कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. 

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उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ उत्पादन में 12 प्रतिशत वृद्धि कर 293 लाख टन करने का रखा लक्ष्य

उत्तर प्रदेश नई खरीफ रणनीति के साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए तैयार है, जिसका लक्ष्य खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन में 12% की वृद्धि कर 293 लाख टन करना है। इस पहल का ध्यान बेहतर फसल नियोजन, मक्का और धान को बढ़ावा देने और जल संरक्षण के लिए 8,500 खेत तालाबों के निर्माण पर है। इससे किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरकों तक पहुँच मिलेगी।

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image 14 - News Potli

ग्रीष्मकालीन धान की बुवाई में बढ़ोतरी, तिलहन में गिरावट, जानें देश में गेहूं की कटाई का हाल

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र की प्रगति के संबंध में कृषि भवन, नई दिल्ली में साप्ताहिक समीक्षा के साथ ही नैफेड व राष्‍ट्रीय बागवानी बोर्ड के अधिकारियों के बैठक की। चौहान ने बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों से फसलों की कटाई, बुआई, उपार्जन, उर्वरक, खाद-बीज की उपलब्धता, मौसम व  सिंचाई के लिए जलाशयों आदि की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही केंद्रीय मंत्री चौहान ने उपज के थोक व खुदरा मूल्यों के बारे में समीक्षा करते हुए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सचिव देवेश चतुर्वेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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पंजाब सरकार

पंजाब में समय से 20 दिन पहले धान की बुआई के फैसले पर कृषि वैज्ञानिकों ने जताई चिंता, मान सरकार को लिखा पत्र

देशभर में गेहूं और दूसरी रबी फसलों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है। अब किसान धान की बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं. इसी बीच पंजाब सरकार धान की बुआई निर्धारित समय से 20 दिन पहले करने की अपनी योजना पर आगे बढ़ रही है, जिससे कृषि वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है. वहीं, राज्य में भूजल की स्थिति पर नए रिपोर्ट से पता चला है कि पंजाब के सभी जिलों में भूजल स्तर में गिरावट आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, 59.17 प्रतिशत क्षेत्र में जल स्तर में 0-2 मीटर की गिरावट देखी गई है, 0.08 प्रतिशत क्षेत्र में 2-4 मीटर की गिरावट देखी गई है और 1 प्रतिशत से कम क्षेत्र में 4 मीटर से अधिक की गिरावट देखी गई है.

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धान की फ़सल - News Potli

धान फसल को झोंका रोग और भूरा फुदका कीट से ऐसे करें बचाव, कृषि विभाग ने दी सलाह

उत्तर प्रदेश के किसानों को राज्य के कृषि विभाग ने धान की फसल में झोंका रोग और भूरा फुदका कीट के प्रकोप से सतर्क रहने को कहा है। कृषि एक्सपर्ट्स ने इन कीटों से फसल को बचाने के लिए रोगनाशक दवाओं और उनके छिड़काव का तरीका बताया है।

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गन्ना की खेती - News Potli

खरीफ सीजन: दलहन, तिलहन और श्री अन्न का बुवाई एरिया बढ़ा लेकिन कपास के एरिया में 11.37 लाख हेक्टेयर की गिरावट

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आज 2 सितंबर को खरीफ सीजन की फसलों के बुवाई आंकड़े जारी किए हैं. आंकड़ों के मुताबिक़ अभी तक ख़रीफ़ फसल की कुल बुवाई 1087 लाख हेक्टेयर से ज्यादा हो चुकी है.



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फीचर - News Potli

सोयाबीन की फसल के दुश्मन बने ये कीट (पीले और हरे मोज़ेक), ऐसे करें बचाव

इस समय महाराष्ट्र के मराठवाड़ा के कई हिस्सों में सोयाबीन की फसल पर पीला मोज़ेक और हरा मोज़ेक यानी केवड़ा रोग देखा जा रहा है. पीला मोज़ेक रोग मूंग के पीले मोज़ेक विषाणु के कारण होता है। हरा मोज़ेक सोयाबीन मोज़ेक वायरस के कारण होता है।

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धान की खेती - News Potli

बकानी रोग बर्बाद कर देता है धान की फसल, विशेषज्ञ से जानिए इसके लक्षण और उपाय

धान खरीफ सीजन की प्रमुख फसल है। और देश के लगभग सभी राज्यों में इसकी खेती होती है। उत्तर प्रदेश में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। प्रदेश में इस समय किसानों ने बड़े स्तर पर धान की फसल लगाई हुई है। लेकिन, अब कई जगह किसानों के सामने फसल में बकानी…

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ख़रीफ़ - News Potli

धान समेत दलहन, तिलहन और गन्ना की बुआई बढ़ी लेकिन कपास और जूट में गिरावट 



ख़रीफ़ फसलों की बुआई इस साल 2 अगस्त तक पिछले साल के मुक़ाबले 25.38 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में हुई है। दलहन, तिलहन, गन्ना, मूंगफली, सोयाबीन और मक्के की बुआई में वृद्धि देखी गयी है वहीं कपास, जूट, बाजरा और रागी फसल की बुआई में कमी आई है।

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सूखा - News Potli

झारखंड में लगातार तीसरे साल सूखे जैसे हालात, धान की खेती वाले 86% खेत पड़े बंजर

झारखंड(Jharkhand) में लगातार तीसरे साल सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। राज्य में 26 जुलाई तक 47 फीसदी कम बारिश हुई है। कम बारिश की वजह से किसान परेशान हैं। लेकिन राज्य के मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों अच्छी में बारिश हो सकती है और अगस्त और सितंबर में भी बारिश का अनुमान है।

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