बिस्मिल

‘बिस्मिल’ गन्ना किस्म को मिली पांच राज्यों में खेती की मंजूरी

शाहजहाँपुर स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने ‘बिस्मिल’ नाम की नई उच्च उपज वाली गन्ना किस्म (को.शा. 17231) विकसित की है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब यह किस्म उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में भी बोई जा सकेगी। यह वैरायटी रेड रॉट बीमारी के प्रति प्रतिरोधी है। इससे ज़्यादा पैदावार और बेहतर शुगर कंटेंट मिलता है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।

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ICAR ने क्या कहा?

IMD का अनुमान, जनवरी में सामान्य से ज़्यादा रहेगा तापमान, ICAR ने क्या कहा?

जनवरी-फरवरी 2026 में तापमान बढ़ने के अनुमान से गेहूं किसानों की चिंता बढ़ी है, लेकिन ICAR के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार असर सीमित रहेगा। अब ज्यादातर क्षेत्रों में गर्मी सहन करने वाली नई गेहूं किस्में बोई जा रही हैं और अगेती बुवाई से भी जोखिम कम हुआ है। बेहतर किस्मों और बढ़े बुवाई रकबे के चलते इस सीजन में भी अच्छे उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है।

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कपास योजना

₹6,000 करोड़ की कपास योजना को अब भी कैबिनेट मंजूरी का इंतज़ार, घटता रकबा और पैदावार बनी बड़ी चुनौती

केंद्र सरकार की ₹6,000 करोड़ की कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन योजना को अभी कैबिनेट मंजूरी नहीं मिली है। योजना में फंड बंटवारे को लेकर विवाद है, क्योंकि कपड़ा मंत्रालय को 22% हिस्सा मिल रहा है, जबकि कपास की रिसर्च की जिम्मेदारी संभालने वाले ICAR को 10% से भी कम फंड मिल सकता है। इस बीच देश में कपास उत्पादन और रकबा लगातार घट रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और पैदावार सुधारने के लिए रिसर्च, बेहतर किस्मों और किसानों का भरोसा मजबूत करना जरूरी है।

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Nano-fertilizer

Nano-fertilizer को स्थायी मंजूरी देने की तैयारी में सरकार

सरकार नैनो-फर्टिलाइज़र को स्थायी मंजूरी देने की तैयारी कर रही है, लेकिन उससे पहले सभी परीक्षण रिपोर्टों की गहरी जांच होगी। कंपनियों को टैगिंग रोकने की चेतावनी दी गई है। ICAR के अध्ययन में नैनो यूरिया के मिले-जुले नतीजे सामने आए हैं। कुछ जगह उपज घटी तो कुछ जगह 5–15% बढ़ी।

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ICAR

ICAR की सलाह, मक्के की फसल को इचग्रास से कैसे बचाएँ?

मक्के में फैल रही खुजली वाली घास (इचग्रास) बड़ी समस्या बन गई है। इसे शुरुआत में ही सही दवा या हाथ से निकालकर कंट्रोल किया जाए तो लागत कम होती है और उपज ज्यादा मिलती है। ICAR ने किसानों को इसके रोकथाम और पहचान के आसान तरीके बताए हैं।

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Thar Jaivik 41 EC

Thar Jaivik 41 EC: सूखे क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर बायोपेस्टिसाइड

Thar Jaivik 41 EC राजस्थान के ICAR संस्थान द्वारा विकसित एक पेटेंटेड जैविक कीटनाशक है, जो तुम्बा और देशी गाय के मूत्र से बनाया गया है। यह हेलिकोवेर्पा, स्पोडोप्टेरा, व्हाइटफ्लाई और एफिड्स जैसे प्रमुख कीटों को नियंत्रित करता है, लेकिन फायदेमंद कीटों को नुकसान नहीं पहुंचाता।

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किसानों के लिए ICAR की जरूरी सलाह

पूर्वोत्तर में रबी मौसम में मूंगफली की खेती, किसानों के लिए ICAR की जरूरी सलाह

रबी सीजन में मूंगफली की बुवाई नवंबर मध्य से दिसंबर की शुरुआत तक करनी चाहिए। अच्छी किस्मों में TAG-73, कदरी लेपाक्षी और GG-39 शामिल हैं। बीज उपचार, संतुलित खाद, 5–6 सिंचाई और सही समय पर कीट-रोग नियंत्रण से उत्पादन और किसानों की आमदनी बढ़ती है।

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करण खुशबू

गर्मी सहनशील और रस्ट-रोधी ‘करण खुशबू’ पूर्वी भारत के किसानों के लिए बेस्ट

ICAR ने गेहूं की नई किस्म करण खुशबू (DBW-386) जारी की है, जो समय पर बोई गई सिंचित खेती के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 52 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज देती है, 123 दिन में तैयार होती है और रस्ट व व्हीट ब्लास्ट जैसी बीमारियों से सुरक्षित रहती है। इसके साथ ही यह गर्मी सहनशील है। इसकी सिफारिश यूपी के पूर्वी हिस्सों, बिहार, झारखंड, ओडिशा, बंगाल, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए की गई है।

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केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान

बीजों की नई किस्में जरूरी, लेकिन पुरानी किस्मों को भी बचाना होगा: केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नई बीज किस्में जरूरी हैं, लेकिन पुरानी किस्मों को बचाना भी उतना ही अहम है। उन्होंने किसानों को बीज संरक्षण के लिए सम्मानित किया और बताया कि सरकार इसके लिए 15 लाख रुपये तक की सहायता देती है। चौहान ने कहा कि किसानों को अधिनियम की जानकारी बढ़ानी होगी और पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।
कार्यक्रम में कृषि राज्य मंत्रियों ने भी स्थानीय बीजों और पारंपरिक फसलों के संरक्षण पर जोर दिया।

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पंजाब सरकार

पंजाब सरकार ने ICAR को लिखा पत्र, नई गेहूं किस्मों पर आपत्ति

पंजाब सरकार ने ICAR द्वारा मंजूर की गई गेहूं की छह नई किस्मों पर आपत्ति जताई है, क्योंकि इन्हें सामान्य गेहूं की तुलना में 50% ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने कहा कि ये किस्में राज्य की परिस्थितियों के लिए उपयुक्त नहीं हैं और किसानों की लागत बढ़ा सकती हैं। ICAR का कहना है कि इन किस्मों से उत्पादन ज्यादा मिलेगा, इसलिए खाद की मात्रा भी अधिक है। यह विवाद टिकाऊ खेती और अधिक पैदावार वाली खेती के बीच संतुलन पर एक बड़ी बहस को सामने लाता है।

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