ड्रिप इरिगेशन और टिशू कल्चर का कमाल,

ड्रिप इरिगेशन और टिशू कल्चर का कमाल, प्रीमियम रेट पर बिक रहा राजस्थान का अनार

पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में अनार की खेती किसानों के लिए आमदनी का बड़ा जरिया बन गई है। ड्रिप इरिगेशन, टिशू कल्चर पौधों और सरकारी सब्सिडी की मदद से बालोतरा, बाड़मेर और जालौर जैसे क्षेत्रों में किसान लाखों रुपये कमा रहे हैं। ईश्वर सिंह और बीमा राम जैसे किसान साबित कर रहे हैं कि सही तकनीक के साथ रेगिस्तान में भी खेती से बड़ा मुनाफा संभव है।

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5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर

5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर: फसल कैलेंडर और स्मार्ट मार्केटिंग से बदली खेती की तस्वीर

चंदौली के युवा किसान अनिल मौर्य ने सिर्फ 5 बिस्वा से शुरुआत कर आज 50 बीघा में आधुनिक खेती का सफल मॉडल खड़ा किया है। बागवानी, ड्रिप सिंचाई, स्मार्ट मार्केटिंग और फसल कैलेंडर के जरिए उन्होंने नई फसलों को अपनाया और बेहतर दाम हासिल किए। कई असफलताओं के बाद भी हार न मानने वाले अनिल मौर्य आज किसानों के लिए प्रेरणा और सीख का केंद्र बन चुके हैं।

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कमाई का मॉडल

एक एकड़ में 10–12 फसलें, कम लागत में ज़्यादा कमाई का मॉडल

सीतापुर के किसान इंद्रजीत मौर्य एक एकड़ जमीन में साल भर 10–12 सब्ज़ियों की खेती कर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। वे देसी जुगाड़, मल्टीलेयर फार्मिंग, ड्रिप सिंचाई और गोमूत्र से बने जैविक कीटनाशक अपनाते हैं। तड़के सब्ज़ियों की तुड़ाई कर समय पर मंडी पहुंचाने से उन्हें बेहतर दाम मिलता है।

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खेती से कमाई की नई मिसाल

खेती से कमाई की नई मिसाल, खंडवा के किसान रविंद्र यादव की कहानी

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के किसान रविंद्र यादव ने मेहनत और तकनीक से खेती को मुनाफे का बिज़नेस बना दिया है।ड्रिप इरिगेशन से पानी की बचत और उत्पादन दोगुना हुआ।वे अरबी और अदरक जैसी फसलों से सालाना 20–25 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।

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भोपाल सिंह बने स्मार्ट किसान

स्प्रिंकलर से सोलर मशीन तक, कैसे भोपाल सिंह बने स्मार्ट किसान का उदाहरण

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के देयंगल गांव के किसान भोपाल सिंह ने पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक तकनीक अपनाई और अपनी 7-8 बीघा जमीन से सालाना 12-15 लाख रुपये तक कमाई शुरू की। उन्होंने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, ट्रैक्टर, सीड ट्रांसप्लांटर, पावर स्प्रेयर जैसी मशीनों और सोलर उपकरणों का इस्तेमाल कर खेती को आसान और मुनाफेदार बनाया। भोपाल सिंह का मानना है कि खेती में सफलता के लिए स्मार्टवर्क जरूरी है।

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ड्रिप इरिगेशन

ड्रिप इरिगेशन: मिट्टी और फसल के हिसाब से स्मार्ट सिंचाई

ड्रिप इरिगेशन खेती की एक स्मार्ट और वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें मिट्टी, फसल और स्थान के अनुसार सही सिस्टम चुना जाता है। यह तकनीक पौधों को जड़ों तक संतुलित पानी और खाद पहुँचाती है। पानी व खाद की बचत, फसल की गुणवत्ता में सुधार, पैदावार में वृद्धि और मज़दूरी खर्च में कमी समेत इसके कई फायदे हैं। खास बात यह है कि ड्रिप इरिगेशन सिर्फ सूखे या महंगी फसलों तक सीमित नहीं, बल्कि हर खेत और हर किसान के लिए उपयोगी है।

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हाई डेंसिटी फार्मिंग

हाई डेंसिटी फार्मिंग: कम जमीन में ज्यादा पैदावार का नया तरीका

हाई डेंसिटी फार्मिंग आधुनिक खेती की तकनीक है, जिसमें पौधों को कम दूरी पर ज़्यादा संख्या में लगाया जाता है ताकि कम ज़मीन से अधिक उत्पादन मिल सके। इसमें पौधों की छंटाई, आकार नियंत्रण, टपक सिंचाई और बेहतर किस्म के पौधों का इस्तेमाल किया जाता है। इस पद्धति से किसानों को जल्दी और बेहतर क्वालिटी की पैदावार मिलती है, जिससे मुनाफ़ा कई गुना बढ़ जाता है। इसका उपयोग आम, अमरूद, केला, संतरा और सब्ज़ियों की खेती में सबसे ज़्यादा होता है।

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हिमाचल

नौकरी छोड़ शुरू की खेती, हिमाचल के सुशील शर्मा अब सेब के बाग से कमा रहे हैं लाखों

हिमाचल के किसान सुशील शर्मा गाला और स्पर वैरायटी सेब की खेती से सालाना 8 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई रहे हैं। उन्होंने महंगे पौधों की जगह खुद ग्राफ्टिंग कर सस्ता पौधा तैयार किया। साथ ही उन्होंने बाग में इंटर क्रॉपिंग, ड्रिप इरीगेशन और एंटी हेल नेट से उत्पादन और क्वालिटी दोनों बढ़ाई है। लॉकडाउन में नौकरी छूटने के बाद शुरू हुई उनकी खेती आज सफलता की मिसाल बन गई है।

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बटुक सिंह जडेजा 350 एकड़ में केसर आम की बागवानी करते हैं। उनके बाग में करीब 35000 पेड़ लगे हैं। उनका आम अमेरिका, लंदन के साथ खाड़ी के कई देशों में जाता है। उनका सालाना टर्नओवर करोड़ों में है।

गुजरात के कच्छ का किसान मजदूर से कैसे बन गया Mango King?

कच्छ के किसान बटुक सिंह जडेजा करीब 350 एकड़ में केसर आम की बागवानी करते हैं। उनका सालाना टर्नओवर करोड़ों में है। गुजरात का कच्छ, भारत का सबसे बड़ा जिला। यहां दुनिया का सबसे बड़ा खारा रेगिस्तान है। 45,674 वर्ग किलोमीटर में फैला ये जिला गुजरात का 23.27 फीसदी हिस्सा है। इस जिले में 10…

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सब्जियां

मात्र एक एकड़ खेत में साल में दस बारह फसलों की खेती करते हैं इंद्रजीत, जानिए इनकी सब्जियां मार्केट में महंगी क्यों बिकती हैं ?

एक एकड़ जमीन में साल भर में दस बारह फसलों की खेती, लागत कम से कम आए इसके लिए ज्यादातर ख़ुद से बनायी हुई जुगाड़ू चीजों का इस्तेमाल, गौ मूत्र से बना पेस्टिसाइड्स का प्रयोग, सब्जियों की अगेती खेती, सब्जियों की तुड़ाई तड़के 3 बजे करना और फिर दूसरों के अपेक्षा कमाई ज़्यादा करना. यही सब बातें इंद्रजीत को दूसरे किसानों से अलग करती है.

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