पश्चिम बंगाल में कम हुई चाय की फसल

पश्चिम बंगाल में कम हुई चाय की फसल, असम में स्थिर रहीं बागानें

सितंबर 2025 में भारत का चाय उत्पादन 5.9% घटकर 159.92 मिलियन किलोग्राम रह गया।असम में उत्पादन लगभग स्थिर रहा (94.76 मिलियन किग्रा), जबकि पश्चिम बंगाल में भारी गिरावट आई (48.35 से घटकर 40.03 मिलियन किग्रा)।उत्तर भारत का कुल उत्पादन घटकर 138.65 मिलियन किग्रा और दक्षिण भारत का 21.27 मिलियन किग्रा रहा।

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भारतीय चाय उद्योग चुनौतियों से जूझ रहा है: भारतीय चाय संघ

भारतीय चाय संघ की रिपोर्ट के अनुसार, चाय उद्योग गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। 2024 में मौसम और कीटों के कारण उत्पादन में कमी देखी गई। 2025 में पश्चिम बंगाल और असम के लिए कम उत्पादन चिंता का विषय है। चाय की नीलामी की कीमतों में गिरावट आई है। 2024 में आयात में वृद्धि हुई, जिससे कीमतों पर असर पड़ा। चाय के निर्यात में मामूली गिरावट देखी गई। उद्योग इन चुनौतियों का सामना कर रहा है।

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असम के आदिवासी किसान सरबेस्वर बसुमतारी को 2024 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

3 रुपये की मज़दूरी से पद्म श्री तक: सरबेस्वर बासुमतारी की अनसुनी कहानी

असम के आदिवासी किसान सरबेस्वर बसुमतारी को 2024 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 3 रुपये दिहाड़ी मजदूर से लेकर देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार जीतने तक, असम के 62 वर्षीय आदिवासी किसान सरबेस्वर बसुमतारी की प्रसिद्धि की यात्रा कई कठिनाइयों से भरी है।

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मछली पालन

बेकार खाली पड़ी जमीन से कमायें करोड़ों.. ऐसे शुरू करें मछली पालन, सरकार भी करेगी मदद

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादन करने वाला देश है। आज विश्व का 8% मतलब, करीब 184 लाख टन मछली का उत्पादन अकेले भारत करता है। पिछले 75 सालों में मछली उत्पादन में करीब 18 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है।

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घर में ऐसे तैयार करें जापान की बोकाशी खाद, मिट्टी की क्वालिटी बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा

जापान की बोकाशी खाद, जैविक खाद बनाने की पुरानी पद्दति है। ये खाद दूसरी खाद की तुलना में काफी अलग है, और यूरिया डीएपी के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती है। असम। जापान की बोकाशी खाद, भारत में मिलने वाली दूसरी खाद से जितनी अलग है, इसके बनाने का तरीका भी उतना ही अलग है। ये…

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असम के चाय

असम के चाय किसानों के लिए खुशखबरी, केंद्र की मदद से किसान 5% चाय बागानों पर करेंगे ऑयल पाम की खेती

केंद्र सरकार ने असम के चाय बागानों को अपने प्रमुख ऑयल पाम मिशन का लाभ उठाने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय उत्तर-पूर्वी चाय संघ के अनुरोध के बाद लिया गया है। उत्तर-पूर्वी चाय संघ ने 4 फरवरी 2025 को केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखकर असम के चाय बागानों को इस योजना के दायरे में लाने की अपील की थी। आपको बता दें कि भारत खाद्य तेलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर पाम ऑयल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में NMEO-OP मिशन से स्वदेशी खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने और आयात खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।

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नौकरी छोड़ कर एक राहुल गुप्ता ने किसान बनना चुना

MNC की नौकरी छोड़ बने किसान, असम के राहुल मात्र 1.5 एकड़ में पॉलीहाउस में खेती से सालाना 35 लाख रुपये की कर रहे कमाई

आजकल जहां एक तरफ युवा MBA जैसी अच्छी पढ़ाई करने के बाद कॉरपोरेट जॉब कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ असम के राहुल गुप्ता MBA करने के बाद MNC में अच्छी नौकरी की लेकिन अब असम के तिनसुकिया में 1.5 एकड़ में पॉलीहाउस में खेती कर रहे हैं।
ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन की मदद से राहुल कीटनाशक मुक्त टमाटर, शिमला मिर्च और हाइड्रोपोनिक विधि से सब्जियां उगाते हैं, जिससे उन्हें सालाना 35 लाख रुपये की कमाई होती है।

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असम के चिरांग जिले के किसान अकबर अली

अकबर अली की सालाना 1.25 करोड़ रुपये की कमाई का जरिया बना तकनीक के साथ ऐपल बेर और ड्रैगन फ्रूट की खेती

भारत की अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने में कृषि क्षेत्र का बहुत बड़ा योगदान है। हाल ही में आए आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि भारतीय कृषि क्षेत्र 42.3 प्रतिशत आबादी को आजीविका देती है और मौजूदा कीमतों पर देश की जीडीपी में इसकी 18.2 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी है। ये तो बात हुई जॉब क्रिएशन की, लेकिन भोजन के लिए तो सौ प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है। इसलिए ये क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण है।

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वनीला

दुनिया की दूसरी सबसे महंगी फसल है Vanilla, असम के किसान अमर बासुमतारी से जानिए इसकी खेती का तरीक़ा

वनीला (Vanilla) दुनिया की दूसरी सबसे महंगी फसल है, जिसकी कीमत 25,000-40,000 रुपये प्रति किलो तक होती है। पहले नंबर पर अभी भी केसर है। भारत में, वनीला की खेती मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर-पूर्वी राज्यों में होती है, लेकिन अब कई अन्य राज्यों के किसानों ने भी इसकी खेती शुरू कर दी है। असम के किसान अमर बासुमतारी भी वनीला की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं।

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मौसम बेमौमस- पार्ट-2: हर साल असम में क्यों आती है बाढ की आपदा?

किसी का जवान बेटा बाढ़ में बह गया… तो किसी बुजुर्ग को बाढ़ के सैलाब ने घर से निकलने का मौका ही नहीं दिया.. कोई पिता बच्चों के लिए खाने का इंतजाम करने गया था, लेकिन लौट नहीं पाया। पहाडों से निकली ब्रह्मपुत्र, बेकी, बराक जैसी नदियों में पानी की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि…

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