जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र, किसानों के लिए सरकार कर रही ये काम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में बताया कि जलवायु परिवर्तन से महाराष्ट्र के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सरकार NICRA और फसल बीमा जैसी योजनाओं के जरिए मदद दे रही है। अब तक 11 लाख किसानों को लाभ और ₹26,000 करोड़ से अधिक बीमा राशि दी गई है। फसल नुकसान होने पर SDRF और NDRF से भी सहायता मिलेगी।

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ट्रंप ने भारत पर सस्ते चावल भेजने का लगाया आरोप

ट्रंप ने भारत पर सस्ते चावल भेजने का लगाया आरोप, बढ़ सकती है सख्ती

ट्रंप ने कहा कि भारत, थाईलैंड और चीन अमेरिका में सस्ता चावल भेज रहे हैं जिससे अमेरिकी किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि टैरिफ लगाकर यह मुद्दा जल्द सुलझाया जाएगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, लेकिन अमेरिकी बाजार में उसका हिस्सा बहुत कम है।

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रबी फसलों

रबी फसलों की बुवाई तेज, आंकड़े पिछले साल से आगे

रबी सीजन में बुवाई तेजी से बढ़ रही है और अब तक 479 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बोई जा चुकी है, जो पिछले साल से अधिक है। इस बार गेहूं, सरसों, धान और मक्का की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि मसूर का क्षेत्र थोड़ा कम हुआ है। सरकार ने इस सीजन के लिए खाद्यान्न और तेलहन उत्पादन का बड़ा लक्ष्य रखा है। जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से कम है, लेकिन हाल की बारिश से स्थिति बेहतर हुई है और उम्मीद है कि लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

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प्राकृतिक खेती

प्राकृतिक खेती ही भविष्य: कृषि मंत्री

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान असली वैज्ञानिक हैं और उनकी देसी तकनीकों पर रिसर्च होगी। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ा है, लेकिन रासायनिक खाद और कीटनाशकों की वजह से खेती महंगी हो गई है, इसलिए प्राकृतिक और संतुलित खेती जरूरी है। उद्योग ने कहा कि किसानों को बेहतर तकनीक और विकल्प देने होंगे ताकि उनकी उपज और आय बढ़ सके।

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ICAR

ICAR की सलाह, मक्के की फसल को इचग्रास से कैसे बचाएँ?

मक्के में फैल रही खुजली वाली घास (इचग्रास) बड़ी समस्या बन गई है। इसे शुरुआत में ही सही दवा या हाथ से निकालकर कंट्रोल किया जाए तो लागत कम होती है और उपज ज्यादा मिलती है। ICAR ने किसानों को इसके रोकथाम और पहचान के आसान तरीके बताए हैं।

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कर्नाटक सरकार

कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, मक्का खरीद की लिमिट अब 50 क्विंटल

कर्नाटक सरकार ने मक्का किसानों को राहत देते हुए खरीद लिमिट 20 क्विंटल से बढ़ाकर 50 क्विंटल कर दी है। अब किसानों का मक्का 2,400 रुपये प्रति क्विंटल के MSP पर खरीदा जाएगा। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि बाजार में कीमतें गिरकर 1,800–1,900 रुपये तक पहुँच गई थीं, जिससे किसानों में नाराज़गी थी।

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30 दिन में 45,911 सोलर पंप इंस्टॉल

महाराष्ट्र का रिकॉर्ड: 30 दिन में 45,911 सोलर पंप इंस्टॉल

महाराष्ट्र ने सिर्फ 30 दिनों में 45,911 सोलर सिंचाई पंप लगाकर रिकॉर्ड बनाया है। यह काम PM-कुसुम और राज्य की सोलर पंप योजना के तहत किया गया, जिससे किसानों को दिन में सिंचाई, बिजली और डीज़ल खर्च में बड़ी बचत मिलेगी। राज्य अब तक 7.47 लाख सोलर पंप लगा चुका है और लक्ष्य 10.45 लाख का है।

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एक बीघा से एक लाख कमाने की योजना लागू

मध्य प्रदेश में किसानों के लिए बड़ा कदम, एक बीघा से एक लाख कमाने की योजना लागू

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब लक्ष्य “लखपति बीघा” होगा, यानी एक बीघा में 1 लाख की कमाई। सरकार ने उर्वरक वितरण, ई-मंडी, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और ड्रोन तकनीक पर तेजी से काम किया है। आने वाले तीन साल में सरकार हाईटेक मंडियां, जैविक हाट बाजार, ड्रिप सिंचाई बढ़ाना और पराली जलाना 80% तक कम करना चाहती है। नई योजनाओं से किसानों को सही दाम, बेहतर तकनीक और ज्यादा मुनाफा मिलने की उम्मीद है।

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गन्ने का MSP बढ़ा, सिंचाई प्रोजेक्ट तेज

सीएम भजनलाल शर्मा की घोषणाएँ—गन्ने का MSP बढ़ा, सिंचाई प्रोजेक्ट तेज

श्रीगंगानगर में गंग नहर के 100 साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किसानों के लिए कई घोषणाएं की। गन्ने का MSP 15 रुपये बढ़ाकर किसानों को राहत दी गई। राज्य में सिंचाई सुधार के लिए 1,717 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स मंजूर किए गए, जो अक्टूबर 2027 तक पूरे होंगे। सरकार अब तक कैनाल सिस्टम पर 5,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। PM किसान योजना के तहत 76 लाख किसानों को 10,000 करोड़ रुपये दिए गए और 44,000 करोड़ रुपये के ब्याज-मुक्त कृषि ऋण वितरित किए गए। PM-KUSUM योजना में भी राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।

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यूरिया नीति

भारत में यूरिया नीति पर बड़ी समीक्षा, केंद्र सरकार ने संसद में कही ये बात

सरकार यूरिया की कीमत और लागत को लेकर बड़ी समीक्षा कर रही है। संसद में उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि एक रिपोर्ट की जांच चल रही है जिसमें सरकारी और सहकारी यूरिया फैक्ट्रियों के लिए फिर से ₹2,300 प्रति टन की न्यूनतम लागत लागू करने का सुझाव है। किसानों को यूरिया की कमी और कीमत को लेकर मुश्किलें आ रही हैं, इसलिए सरकार समाधान पर काम कर रही है।

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