चीनी उत्पादन

चीनी उत्पादन में 22% की बढ़ोतरी, न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग क्यों कर रही है ISMA?

2025–26 सीजन में 15 जनवरी तक देश का चीनी उत्पादन 22% बढ़कर 1.59 करोड़ टन पहुँच गया है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, चीनी के दाम लागत से नीचे जाने और गन्ने की कीमतें बढ़ने से मिलों की हालत कमजोर हो रही है, जिससे किसानों को भुगतान में देरी का खतरा बढ़ गया है। ISMA ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) को बढ़ाने की मांग की है।

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देश में रबी फसलों का कुल रकबा 2.8% बढ़ा

देश में रबी फसलों का कुल रकबा 2.8% बढ़ा, अब पैदावार मौसम पर निर्भर

देश में रबी फसलों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है और कुल रकबा 652.33 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से 2.8% ज्यादा है। गेहूं, चना, मसूर और सरसों की बुआई पूरी हो चुकी है और अब पैदावार आगे के मौसम पर निर्भर करेगी। दालों, सरसों, मक्का और जौ के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि ज्वार के रकबे में गिरावट आई है।

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सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को दी मंजूरी

घरेलू भंडार मजबूत, सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 2022 से लगे प्रतिबंध में आंशिक ढील देते हुए 5 लाख टन गेहूं उत्पादों (आटा, मैदा, सूजी) के निर्यात की अनुमति दी है। देश में रिकॉर्ड उत्पादन और पर्याप्त भंडार के बीच यह फैसला लिया गया है, जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारतीय ब्रांड्स के गेहूं उत्पाद मिल सकेंगे। हालांकि, निर्यात की समय-सीमा और मात्रा को लेकर उद्योग को अभी स्पष्टता का इंतजार है।

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हाथरस से बढ़ा निर्यात

यूपी का आलू बना वैश्विक ब्रांड, हाथरस से बढ़ा निर्यात

उत्तर प्रदेश का आलू, खासकर हाथरस जिले का आलू, अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से पहचान बना रहा है। बेहतर गुणवत्ता, और समय पर आपूर्ति के कारण इस साल हाथरस से आलू निर्यात में करीब 5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है और भारत के कुल आलू निर्यात में जिले की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत हो गई है।

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soil health

फसल से सेहत तक: क्यों भारत को अब मिट्टी बचाने की ज़रूरत है?

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में फसलों और लोगों के पोषण को बेहतर बनाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना बेहद ज़रूरी है। इसके लिए खाद की कीमतों में सुधार, ज़मीन और फसल के अनुसार सही खाद के इस्तेमाल और बेहतर खेती के तरीकों पर ज़ोर दिया गया है। रिपोर्ट बताती है कि देश में अनाज की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद बच्चों में कुपोषण बड़ी समस्या बना हुआ है, जिसका एक अहम कारण मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी है।

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भारत का चीनी उत्पादन

देश की 89% चीनी सिर्फ तीन राज्यों से, NFCSF के आंकड़ों का खुलासा

2025-26 चीनी सीजन में 15 जनवरी तक भारत का चीनी उत्पादन 158.85 लाख टन पहुंच गया है, जो पिछले साल से 22% अधिक है। महाराष्ट्र में उत्पादन 50% बढ़ा है, जबकि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सीमित बढ़ोतरी हुई है। बेहतर रिकवरी रेट और ज्यादा पेराई से उत्पादन मजबूत रहा, वहीं सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात के तहत कोटे का तीसरा री-अलॉटमेंट भी जारी किया है।

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जानिए टमाटर से कैसे करोड़ों कमाते हैं शिवपुरी के किसान जसपाल

हाई रिस्क फसल, हाई रिटर्न: जानिए टमाटर से कैसे करोड़ों कमाते हैं शिवपुरी के किसान जसपाल

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के किसान जसपाल पिछले कई वर्षों से 50 एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे हैं और उन्हें आज तक कभी घाटा नहीं हुआ। सही खेती तकनीक, बेहतर क्वालिटी और मजबूत मार्केटिंग स्ट्रैटजी के दम पर उन्होंने इस बार करीब ₹1.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया।

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CCI 19 जनवरी से कपास बिक्री शुरू करेगा

19 जनवरी से कपास बिक्री शुरू करेगा CCI, बाजार की नजर सरकारी दामों पर

कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) 19 जनवरी से 2025–26 सीजन में खरीदे गए कपास की बिक्री शुरू करेगा। अब तक CCI ने करीब 80 लाख गांठ कपास खरीदी है। इंपोर्ट ड्यूटी की छूट खत्म होने और बिनौला के दाम बढ़ने से कपास की कीमतें MSP से ऊपर पहुंच गई हैं। वहीं बेहतर उत्पादन के बावजूद भारी इंपोर्ट के चलते इस सीजन में कपास का आयात रिकॉर्ड 50 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है।

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बेहतर उत्पादन के लिए कब करना चाहिए गेहूं में NPK स्प्रे

टाइमिंग और मात्रा का खेल: बेहतर उत्पादन के लिए कब करना चाहिए गेहूं में NPK स्प्रे?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल में सही समय और सही मात्रा में NPK स्प्रे करने से पैदावार और दाने की गुणवत्ता दोनों बढ़ती है। फुटाव, बूट और दूधिया अवस्था—इन तीन अहम चरणों पर अलग-अलग NPK का छिड़काव करने से कल्ले बढ़ते हैं, बालियां मजबूत बनती हैं और दाने मोटे व वजनदार होते हैं। सही समय, उचित पानी और सावधानियों के साथ किया गया स्प्रे बेहतर उत्पादन की कुंजी है।

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उत्तराखंड में सेब की अति सघन बागवानी पर ज़ोर

उत्तराखंड में सेब की अति सघन बागवानी पर ज़ोर, किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

उत्तराखंड सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए सेब की अति सघन बागवानी योजना को तेज़ी से लागू कर रही है। किसानों को क्लस्टर आधारित खेती से जोड़कर सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, नर्सरी अपग्रेड और दीर्घकालिक उत्पादन लक्ष्यों (2030–2050) के तहत योजनाएँ लागू की जाएंगी।

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