कम तापमान में करें सरसों की बुवाई, कृषि विभाग ने दी बीज का शोधन कर बुवाई करने की सलाह

सरसों की बुवाई नवरात्र शुरू होने के साथ ही शुरू हो जाती है, लेकिन अभी तापमान अधिक होने के कारण बुवाई करना ठीक नहीं है।कृषि विभाग ने किसानों को सरसों की बुवाई के लिए एक सप्ताह रुकने की सलाह दी है।इसके साथ ही बुवाई से पहले बीज की जाँच ज़रूर करें।

सरसों रबी फसल की एक प्रमुख तिलहनी फसल है। इस फसल का भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान है। सरसों उत्पादन और क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में चीन और कनाडा के बाद भारत का स्थान है। सरसों की बुवाई का उपयुक्त समय सितम्बर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक है। सरसों की खेती कम सिंचाई और कम लागत की वजह से किसानों के लिए काफी लोकप्रिय है। वहीं इसकी खेती से किसानों को अधिक लाभ भी होता है। सरसों के तेल का इस्तेमाल भारत के लगभग हर एक घर में किया जाता है। इसीलिए इसकी माँग मार्केट में हमेशा रहती है।

बुवाई के लिए 15-25 डिग्री सेल्सियस तापमान ज़रूरी
कृषि विभाग के मुताबिक़ सरसों की बुवाई के लिए 15-25 डिग्री सेल्सियस तापमान सही माना जाता है। तभी सरसों के बीज का सही अंकुरण हो पाता है। अधिक तापमान पर बीज झुलस सकता है।अभी तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।यह तापमान सरसों की बुवाई के लिए अधिक है। सरसों की फसल सूखे और ठंडे वातावरण में अच्छी उगती है।

बुवाई का तरीक़ा
कृषि विभाग के मुताबिक़ सरसों की बुवाई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। सिंचित क्षेत्रों में सरसों बीज की गहराई 5 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। इसके अलावा फसलों का सही उत्पादन के लिए समय पर रोग कीट का उचित नियंत्रण करना ज़रूरी है।

ऐसे करें बीज शोधन
कृषि विभाग के अनुसार सरसों बीज बोन से पहले बीज शोधन के लिये 5 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से लेकर बीज का शोधन करके ही बुवाई करनी चाहिए। फिलहाल किसान तापमान कुछ और नीचे गिरने तक बुवाई रोके रखें।

राजस्थान में सबसे ज़्यादा उत्पादन 
सरसों का उत्पादन भारत के लगभग सभी राज्यों में होता है, लेकिन सरसों उत्पादन के मामले में राजस्थान भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे है, जबकि राजस्थान सहित पांच राज्य ऐसे हैं, जहां भारत का कुल 88 प्रतिशत सरसों का उत्पादन किया जाता है। 

सरसों की उन्नत क़िस्म
राई या सरसों के लिए बोई जाने वाली उन्नतशील प्रजातियाँ जैसे क्रांति, माया, वरुणा, इसे हम टी-59 भी कहते हैं, पूसा बोल्ड उर्वशी, तथा नरेन्द्र राई प्रजातियाँ की बुवाई सिंचित दशा में की जाती है तथा असिंचित दशा में बोई जाने वाली सरसों की प्रजातियाँ जैसे की वरुणा, वैभव तथा वरदान, इत्यादि प्रजातियाँ की बवाई करना चाहिए।

आपको बता दें कि आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़ सरसों का उत्पादन 2020-21 में लगभग 8.6 मीट्रिक टन से बढ़कर 2021-22 में 11 मीट्रिक टन और 2022-23 में 11.35 मीट्रिक टन हो गया है। खेती का रकबा 2020-21 में 6.70 मिलियन हेक्टेयर (एमएच) से बढ़कर 2022-23 में 8.8 मिलियन हेक्टेयर हो गया है। जबकि 2023-24 के मौसम में सरसों का उत्पादन 12 मीट्रिक टन के सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने की संभावना है, जिसमें लगभग 10 मिलियन हेक्टेयर का बोया गया क्षेत्र है, जिससे खाद्य तेलों की घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा।

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