शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश)।मई का महीना है, मौसम का पारा ऊपर चढ़ चुका है। गन्ने की फसल में इसी समय चोटी बेधक रोग लगने का खतरा बढा जाता है। ऐसें में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के निदेशक वी के शुक्ल ने गन्ना उत्पादक किसानों को इस कीट के प्रति सचेत किया है।
गर्मी बढ़ने के साथ ही गन्ना उत्पादक किसानों की समस्या बढ़ने वाली है। गन्ना वैज्ञानिक ने किसानों को आगाह किया है कि इसी समय गन्ने की फसल में चोटी बेधक कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। इस रोग से निपटने के शाहजहांपुर स्थित गन्ना संस्थान के वैज्ञानिक ड़ा वी के शुक्ल ने चोटी बेधक कीट से गन्ने की फसल को बचाने के लिए उपाय बताये हैं। गन्ने की फसल में टॉप बोरर की पहली पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी भी दिखने लगी है। वे कहते हैं इस कीट की मादा शलभ चांदी जैली सफेद दिखती है। इसके पीछे नारंगी रंग की संरचना पायी जाती है। ये मादा रात के समय पत्तियों के बीच के शिरे में 80 से 250 अंडे देती है। जो एक के ऊपर एक करके ढ़के होते हैं व भूरे रंग के रोयेंदार परत से ढ़के होते हैं।
टॉप बोरर की सूड़ी हल्के पीले रंग की होती है जो पत्तियो तक मध्य सिरे से होते हुए अगोले तक पहुंच जाती है। वहां ये अगोले की पत्तियों को खाती है जिससे उसमें गोल छर्रे जैसे निसान दिखाई देने लगता है। जब सूड़ी गन्ने को खाती है तो उसमें सड़न पैदा हो जाती है और नीचे की गोख में फुटाव पैदा हो जाता है।
डॉ शुक्ल के मुताबिक किसान नियमित रूप से गन्ने की फसल की देखरेख करें यदि उसमें द्वितीय समूह के कीट या अंडे दिखाई दें तो पत्तियों को तुरंत तोड़कर नष्ट करदें। यदि नही तोड़ेंगे तो गन्ने की कीट गन्ने की गोफ में घुस जायेगी और गन्ने की बढ़वार को रोक देगी। यदि कोई पौधा कीटों के प्रकोप से ज्यादा प्रभावित है तो उसे खुरपी से काटकर नष्ट करदें।
इस कीट की तीसरी पीढ़ी सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है जो जून के तीसरे महीने में आती है। इस समय टॉप बोरर की सूड़ी को नष्ट कर देना चाहिए ताकि अगली पीढ़ी में ना प्रवेश कर पाये ।
ऐसे करें नियंत्रण
- डा शुक्ल के मुताबिक इस कीट की पहली और दूसरी पीढ़ी के से प्रभावित पौधों में मृतसार या डेडहार्ट बनने पर पौधे को जमीन की सतह से सुड़ी सहित नष्ट करदें।
- इमिडाक्लोप्रिड को एक मिली प्रति लीटर के हिसाब से पानी में सैम्पू मिलाकर छिड़काव करें इससे पौधों के ऊपर पाये जाने वाले सूड़ी,अंडे व कीट नष्ट हो जाते हैं।
- अगर फसल में अधिक कीट लग गये हों ज्यादा प्रभावित हुई हो ऐसी स्थिति में क्लोरेनेट्रेनिलिप्रोल 18.5 एस. सी.150 मिली 40 लीटर मिलाकर प्रति एकड़ नमी के स्थिति में ड्रेंचिंग करें।
- टॉप बोरर की समस्या के जैविक निदान के लिए अण्ड परजीवी ट्राइकोग्रामा, जापोनिकम की 20000 वयस्क प्रति हेक्टेयर की दर से जून के अंतिम सप्ताह में लगाए जाने से ये टॉप बोरर को खा जाता है व गन्ने के फसल इसके प्रकोप से बच जाती है।