शहद निर्यात को राहत: MEP 31 मार्च 2026 तक बढ़ा

MEP 31 मार्च 2026 तक बढ़ा

सरकार ने प्राकृतिक शहद के निर्यात पर 1,400 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) अब 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है, ताकि भारतीय शहद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिल सके। भारत दुनिया के बड़े शहद उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है और अमेरिका, यूएई व सऊदी अरब जैसे देशों में शहद भेजता है। साथ ही सरकार राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन के जरिए मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर काम कर रही है।

सरकार ने प्राकृतिक शहद (Natural Honey) के निर्यात को लेकर एक अहम फैसला लिया है। अब शहद के निर्यात पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) 1,400 डॉलर प्रति टन 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। यह जानकारी विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना में दी गई है।सरकार ने इससे पहले अगस्त में शहद का MEP 2,000 डॉलर से घटाकर 1,400 डॉलर प्रति टन किया था, ताकि भारतीय शहद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सके। यह व्यवस्था पहले 31 दिसंबर 2025 तक थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।

निर्यात का हाल
वर्तमान वित्त वर्ष (अप्रैल–अक्टूबर) में भारत ने 60,002 टन शहद का निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 118 मिलियन डॉलर रही। वहीं, वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने 1 लाख टन से ज्यादा शहद का निर्यात किया था, जिसकी कुल कीमत 206.47 मिलियन डॉलर थी।

कहाँ जाता है भारतीय शहद
भारत दुनिया के बड़े शहद उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। भारतीय शहद का प्रमुख निर्यात अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों में होता है।

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किस तरह का शहद निर्यात होता है?
भारत से सरसों/रेपसीड शहद, यूकेलिप्टस शहद, लीची शहद, सूरजमुखी शहद सहित कई तरह के प्राकृतिक शहद निर्यात किए जाते हैं।शहद उत्पादन में उत्तर प्रदेश का 17%, पश्चिम बंगाल का 16%, पंजाब का 14%, बिहार का 12% और राजस्थान का 9%
का योगदान है।

मीठी क्रांति और सरकारी योजना
देश भर में सरकार शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (NBHM) चला रही है, जिसे ‘स्वीट रिवोल्यूशन’ का हिस्सा माना जाता है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक और संगठित तरीके से मधुमक्खी पालन को बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाना है।यह योजना नेशनल बी बोर्ड (NBB) के जरिए लागू की जा रही है। इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था। पहले इसके लिए ₹500 करोड़ का बजट तय किया गया था, जिसे अब 2025–26 तक बढ़ा दिया गया है, और इसमें ₹370 करोड़ की राशि शेष है।

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