भारत की कृषि, किसानों का संकट, कृषि की अर्थव्यवस्था, एमएसपी और किसान आंदोलन के संदर्भ में न्यूज पोटली ने पी साईनाथ से लंबी वार्ता की। देखिए उसके कुछ खास अंश।
“मैं पांच शब्द में कृषि संकट को बताता हूं। Corporate Takeover of Indian Agriculture, कॉरपोरेट ने हिंदुस्तान की खेती बाड़ी को हाईजैक कर लिया है। एक जगह किसान ने हमसे पूछा आप हमें किसान क्यों बोलते हो, हमारे हाथ में क्या है? बीज कौन बनाता है प्राइवेट कंपनी, बीज कौन बेचता है प्राइवेट कंपनी। पानी डिस्ट्रीब्यूशन भी आप प्राइवेटाइज (निजीकरण) कर रहे हैं, बहुत जगह पानी हमारे हाथ में नहीं है। बीज हमारे हाथ नहीं, डीएपी, यूरिया हमारे हाथ में नहीं, जो भी फर्टिलाइजर हैं वो बड़ा कॉरपोरेट पावर है, वो बनाते हैं किसान के हाथ में सिर्फ कर्ज़ा, लोन है, अभी बोले किसान हैं क्या हम?” वरिष्ठ पत्रकार और लेखक पी साईनाथ कृषि संकट पर कहते हैं।
न्यूज पोटली से बात करते हुए पी. साईनाथ आगे कहते हैं, “20 साल पहले मैंने किसानों के मुद्दों को लिखा तो कहा ये कृषि संकट है, 8-10 साल बाद मुझे समझ में आया कि कृषि संकट अब बड़ा हो गया है। और इससे सिर्फ किसान लोग नहीं बाकी लोग भी प्रभावित हो रहे हैं, अब ये समाज का संकट है। 5-7 साल पहले मेरा आंकलन ये है कि कृषि का संकट अब सभ्यता का संकट है।”
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